खरगोन जिले में सामने आए करोड़ों नहीं, लेकिन लाखों रुपए के इस चर्चित बैंक गबन मामले ने हर किसी को हैरान कर दिया है। जिला सहकारी केंद्रीय बैंक की ठीबगांव शाखा में कार्यरत महिला कैशियर ऋतु गोस्वामी को पुलिस ने गिरफ्तार कर लिया है। आरोप है कि उसने बैंक से 41 लाख 58 हजार 95 रुपए का गबन किया और फिर फरार हो गई। कई दिनों तक दिल्ली, मुंबई और अन्य शहरों में छिपने के बाद आखिरकार पुलिस ने उसे पकड़ लिया।
पुलिस पूछताछ में जो जानकारी सामने आई, उसने इस मामले को और भी चौंकाने वाला बना दिया। आरोपी महिला ने बताया कि गबन की गई रकम में से 35 लाख रुपए से ज्यादा राशि उसने एक ऑनलाइन गेमिंग प्लेटफॉर्म ‘स्टार मेकर’ पर गंवा दी। इसके अलावा परिवार के साथ घूमने, हवाई यात्रा करने और अन्य खर्चों में भी बड़ी रकम खर्च की गई। पुलिस अब पूरे पैसों के इस्तेमाल और लेन-देन की जांच कर रही है।
ऑनलाइन गेमिंग की लत ने पहुंचाया जेल
पुलिस अधिकारियों के मुताबिक ऋतु गोस्वामी किसी लिंक के जरिए ऑनलाइन गेमिंग प्लेटफॉर्म से जुड़ी थी। शुरुआत में छोटे स्तर पर खेला गया यह गेम धीरे-धीरे उसकी आदत बन गया। इसके बाद उसने बड़ी रकम लगानी शुरू कर दी। जांच में पता चला है कि बैंक से निकाली गई राशि का बड़ा हिस्सा इसी गेम में खर्च हुआ।
विशेषज्ञों का कहना है कि हाल के वर्षों में ऑनलाइन गेमिंग और वर्चुअल प्लेटफॉर्म पर पैसे लगाने के मामले तेजी से बढ़े हैं। कई लोग जल्दी कमाई की उम्मीद में बड़ी रकम दांव पर लगा देते हैं और बाद में आर्थिक संकट में फंस जाते हैं। खरगोन का यह मामला भी इसी खतरे की ओर इशारा करता है। पुलिस अब आरोपी के बैंक खातों, मोबाइल डेटा और डिजिटल लेन-देन की भी जांच कर रही है ताकि यह पता लगाया जा सके कि रकम कहां-कहां खर्च हुई और क्या इसमें किसी अन्य व्यक्ति की भी भूमिका थी।
फरार आरोपियों की तलाश जारी, वसूली पर फोकस
गबन का मामला सामने आने के बाद पुलिस ने कई टीमों का गठन किया था। जांच के दौरान पता चला कि ऋतु गोस्वामी पहले मुंबई स्थित अपने ससुराल पहुंची थी। वहां उसने परिवार को बताया कि वह छुट्टी पर आई है। गिरफ्तारी से बचने के लिए मोबाइल नंबर तक बंद करवा दिए गए। पुलिस टीम ने दिल्ली के रोहिणी इलाके में भी कई दिनों तक निगरानी रखी, लेकिन आरोपी वहां से निकल चुकी थी। बाद में इंदौर होते हुए खरगोन लौटने पर उसे गिरफ्तार कर लिया गया।
एसपी रवींद्र वर्मा के अनुसार मामले में केवल महिला कैशियर ही नहीं, बल्कि शाखा से जुड़े अन्य लोगों की भूमिका भी जांच के दायरे में है। सहायक कैशियर त्रयंबक वाणी और पूर्व शाखा प्रबंधक राजेश राठौड़ समेत अन्य आरोपियों की तलाश की जा रही है। पुलिस का मुख्य फोकस अब बाकी रकम की वसूली और पूरे नेटवर्क की जांच पर है। बैंक की आंतरिक जांच रिपोर्ट के आधार पर दर्ज इस मामले ने बैंकिंग सिस्टम में निगरानी और जवाबदेही को लेकर भी कई सवाल खड़े कर दिए हैं। आने वाले दिनों में जांच से और अहम खुलासे सामने आ सकते हैं।






