खरगोन जिले के सनावद क्षेत्र में शुक्रवार को प्रशासन का बुलडोजर एक बड़े अवैध निर्माण पर चला। चांदनीपुरा इलाके में बने एस्ट्रो टर्फ को करीब तीन घंटे तक चले अभियान में पूरी तरह ध्वस्त कर दिया गया। कार्रवाई के दौरान भारी पुलिस बल तैनात रहा ताकि किसी तरह की अप्रिय स्थिति न बने। यह कार्रवाई हाल ही में सामने आए चर्चित मामले के बाद बढ़ते विरोध और प्रशासनिक जांच के बीच की गई।
स्थानीय प्रशासन के मुताबिक, संबंधित निर्माण के लिए जरूरी अनुमति नहीं ली गई थी। इसी आधार पर पुलिस, राजस्व विभाग और नगर पालिका की संयुक्त टीम ने कार्रवाई की। मौके पर सात जेसीबी मशीनें लगाई गईं और पूरे इलाके की निगरानी की गई। प्रशासन ने स्पष्ट किया कि अवैध निर्माण के खिलाफ कार्रवाई कानून के दायरे में की जाती है और हर मामले में तय प्रक्रिया का पालन किया जाता है।
अवैध निर्माण पर कार्रवाई क्यों हुई?
सनावद में दर्ज आपराधिक मामले के बाद कई सामाजिक संगठनों ने आरोपी के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की मांग उठाई थी। संगठनों का कहना था कि आरोपी से जुड़े अवैध निर्माणों की भी जांच होनी चाहिए। इसी मांग को लेकर रैली निकाली गई और स्थानीय जनप्रतिनिधि को ज्ञापन सौंपा गया। इसके बाद प्रशासन ने निर्माण से जुड़े दस्तावेजों की जांच शुरू की।
जांच के दौरान संबंधित एस्ट्रो टर्फ की अनुमति और निर्माण से जुड़े रिकॉर्ड की पड़ताल की गई। प्रशासन का दावा है कि आवश्यक मंजूरी के अभाव में यह निर्माण नियमों के अनुरूप नहीं पाया गया। इसके बाद संबंधित विभागों ने संयुक्त रूप से कार्रवाई की योजना बनाई। शुक्रवार को सुबह से ही पुलिस, नगर पालिका और राजस्व विभाग की टीमें मौके पर पहुंचीं और सुरक्षा व्यवस्था के बीच बुलडोजर अभियान शुरू किया गया।
करीब तीन घंटे की कार्रवाई के बाद पूरा ढांचा हटा दिया गया। इस दौरान किसी तरह की बड़ी कानून-व्यवस्था की समस्या सामने नहीं आई। वहीं, पुलिस ने पहले ही मामले में आरोपी को गिरफ्तार कर न्यायिक हिरासत में भेज दिया था। हालांकि, आरोपी के खिलाफ दर्ज आपराधिक मामले की सुनवाई अदालत में तय कानूनी प्रक्रिया के तहत जारी रहेगी।
प्रशासन की कार्रवाई और कानूनी प्रक्रिया पर क्या है स्थिति?
विशेषज्ञों का मानना है कि किसी भी आपराधिक मामले और अवैध निर्माण से जुड़ी कार्रवाई दो अलग-अलग कानूनी प्रक्रियाएं होती हैं। यदि कोई निर्माण स्थानीय नियमों का उल्लंघन करता है, तो संबंधित विभाग जांच के बाद उसे हटाने की कार्रवाई कर सकते हैं। वहीं किसी व्यक्ति के खिलाफ दर्ज आपराधिक आरोपों का फैसला केवल अदालत उपलब्ध सबूतों और कानून के आधार पर करती है।
इस मामले में स्थानीय जनप्रतिनिधि ने भी अधिकारियों के साथ बैठक कर कार्रवाई की समीक्षा की। उन्होंने कहा कि नियमों के खिलाफ बने निर्माणों पर कार्रवाई में किसी तरह की ढिलाई नहीं होनी चाहिए। साथ ही यह भी कहा कि यदि कार्रवाई में अनावश्यक देरी हुई है, तो उसकी भी जांच कराई जाएगी।
फिलहाल प्रशासन का कहना है कि जिले में अवैध निर्माणों के खिलाफ अभियान आगे भी जारी रहेगा और हर कार्रवाई संबंधित कानूनों तथा विभागीय प्रक्रिया के अनुसार की जाएगी। वहीं, इस पूरे मामले में अदालत में चल रही कानूनी कार्यवाही अपने तय रास्ते पर जारी रहेगी। प्रशासन ने लोगों से अपील की है कि किसी भी संवेदनशील मामले में अफवाहों से बचें और केवल आधिकारिक जानकारी पर भरोसा करें।






