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इस अनोखे मंदिर में ग्रहण के वक्त भी होते हैं पूजा-पाठ, नहीं होता कोई असर, जानें वजह

Written by:Bhawna Choubey
Published:
चंद्र ग्रहण 2025 (Lunar Eclipse 2025) पर देशभर के मंदिरों में परंपरा के अनुसार पूजा-पाठ रोक दी जाएगी और कपाट बंद रहेंगे। लेकिन दिल्ली का प्रसिद्ध काली मंदिर ऐसा है, जो इस नियम से अलग है। यहां ग्रहण का कोई असर नहीं माना जाता और मंदिर हमेशा खुला रहता है।
इस अनोखे मंदिर में ग्रहण के वक्त भी होते हैं पूजा-पाठ, नहीं होता कोई असर, जानें वजह

भारत में ग्रहण का महत्व सिर्फ खगोलीय घटना तक सीमित नहीं है, बल्कि यह धार्मिक आस्थाओं और परंपराओं से भी गहराई से जुड़ा है। जब भी सूर्य ग्रहण या चंद्र ग्रहण लगता है, देशभर के मंदिरों में पूजा-पाठ रोक दिया जाता है। मंदिरों के कपाट बंद कर दिए जाते हैं और श्रद्धालु ग्रहण खत्म होने के बाद ही भगवान का दर्शन कर पाते हैं। यह परंपरा सदियों से चली आ रही है और लोग आज भी इसे पूरी श्रद्धा के साथ मानते हैं।

लेकिन क्या आप जानते हैं कि दिल्ली में एक ऐसा अनोखा मंदिर है, जहां ग्रहण का असर बिल्कुल नहीं माना जाता? यह मंदिर है कालकाजी मंदिर। मान्यता है कि यहां देवी शक्ति इतनी प्रबल हैं कि उन पर किसी भी ग्रहण का प्रभाव नहीं पड़ता। यही वजह है कि चाहे चंद्र ग्रहण हो या सूर्य ग्रहण, मंदिर के कपाट खुले रहते हैं और भक्त बिना रुकावट मां के दर्शन कर सकते हैं। यह परंपरा कालकाजी मंदिर को और भी खास बना देती है।

कालकाजी मंदिर जहां ग्रहण का असर नहीं होता

दिल्ली का कालकाजी मंदिर मां काली को समर्पित है। यहां की मान्यता इतनी प्रबल है कि ग्रहण जैसी बड़ी खगोलीय घटना भी मंदिर की परंपराओं को प्रभावित नहीं करती। जहां एक ओर पूरे भारत के मंदिरों में ग्रहण के दौरान पूजा-पाठ रोक दी जाती है, वहीं कालकाजी मंदिर में भक्त सामान्य दिनों की तरह पूजा कर सकते हैं।

1. ग्रहण के दौरान मंदिर बंद करने की परंपरा

हिंदू धर्मशास्त्रों के अनुसार, ग्रहण के समय वातावरण में नकारात्मक ऊर्जा फैल जाती है। इसी कारण से ग्रहण लगने से पहले मंदिरों के कपाट बंद कर दिए जाते हैं और मूर्तियों को ढक दिया जाता है। ग्रहण खत्म होने के बाद मंदिरों की शुद्धि की जाती है और फिर से पूजा-पाठ शुरू होता है। यह परंपरा ज्यादातर मंदिरों में आज भी निभाई जाती है।

2. कालकाजी मंदिर की अनोखी मान्यता

दिल्ली का कालकाजी मंदिर इस परंपरा से बिल्कुल अलग है। यहां की मान्यता है कि मां काली स्वयं इतनी शक्तिशाली हैं कि ग्रहण जैसी नकारात्मक ऊर्जा उन पर कोई असर नहीं डाल सकती। इसलिए यहां ग्रहण के दौरान भी मंदिर बंद नहीं होते। भक्तजन ग्रहण के समय भी दर्शन और पूजा कर सकते हैं। यही वजह है कि इस मंदिर में ग्रहण का समय और भी खास और पवित्र माना जाता है।

3. श्रद्धालुओं की आस्था और अनुभव

ग्रहण के समय कालकाजी मंदिर में बड़ी संख्या में भक्त दर्शन के लिए पहुंचते हैं। उनका मानना है कि ग्रहण के दौरान मां काली के दर्शन करना बेहद शुभ होता है और इससे जीवन की कठिनाइयां दूर होती हैं। कई श्रद्धालु बताते हैं कि यहां दर्शन करने से उन्हें आत्मिक शांति और सकारात्मक ऊर्जा मिलती है। यही वजह है कि लूनर इक्लिप्स 2025 के दौरान भी यहां भक्तों की भीड़ उमड़ने की संभावना है।