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Food Cycling : खाने की बर्बादी रोकें, फूड साइक्लिंग से अपनाएं स्मार्ट किचन हैबिट्स

Written by:Shruty Kushwaha
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हमारी संस्कृति में अन्न को देवता कहा जाता है। इसका निहितार्थ यही है कि हम अनाज को बर्बाद न करें और एक-एक कण का सही इस्तेमाल हो। दुनियाभर में हर साल लाखों टन खाना बर्बाद हो जाता है, जो न सिर्फ भोजन की कमी को बढ़ाता है बल्कि पर्यावरण पर भी नकारात्मक प्रभाव डालता है। फूड साइक्लिंग इस समस्या का एक आसान और प्रभावी समाधान हो सकता है। हमें एक बार फिर खाने की कद्र करना सीखना होगा जिससे भोजन की बर्बादी को रोका जा सके।
Food Cycling : खाने की बर्बादी रोकें, फूड साइक्लिंग से अपनाएं स्मार्ट किचन हैबिट्स

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Food Cycling : संतरे और नींबू का उपयोग कर हम छिलके फेंक देते हैं। आम या बेर की गुठली भी कचरे में जाती है। और अक्सर बासी रोटी, चावल या सब्जी को भी डस्टबीन में डाल दिया जाता है। इस तरह कई खाद्य पदार्थ जो दुबारा इस्तेमाल किए जा सकते हैं, अक्सर फेंक दिए जाते हैं। लेकिन थोड़ी समझदारी और सूझबूझ से इनका दुबारा उपयोग कर हम भोजन की बर्बादी कम कर सकते हैं। साथ ही, फूड साइक्लिंग के जरिए भोजन बचाने की मुहिम में अपना योगदान भी दे सकते हैं।

क्या आप जानते हैं कि हर साल दुनिया भर में लगभग 1.3 बिलियन टन भोजन बर्बाद होता है, जो कुल खाद्य उत्पादन का करीब एक तिहाई है (Food and Agriculture Organization, 2021) है। ये समस्या न सिर्फ खाने की कमी बढ़ाती है बल्कि पर्यावरण और अर्थव्यवस्था को भी नुकसान पहुंचाती है। ऐसे में भोजन की बर्बादी को कम करने और संसाधनों का बेहतर उपयोग सुनिश्चित करने के लिए फूड साइक्लिंग एक प्रभावी समाधान के रूप में उभर रहा है।

क्या है Food cycling

फूड साइक्लिंग वो तरीका है जिसमें बचे हुए खाने को या खाद्य पदार्थों के हिस्से को दोबारा इस्तेमाल किया जाता है, उसकी रिसाइक्लिंग की जाती है। इसका मकसद भोजन की बर्बादी रोकना और प्राकृतिक संसाधनों का सही इस्तेमाल करना है। फूड साइक्लिंग का मतलब भोजन और जैविक कचरे को दुबारा उपयोग करके पोषण और पर्यावरण को संतुलित रखना है। इसे कई तरह की वस्तुओं से किया जा सकता है जैसे कि फलों और सब्जियों के छिलके, बीज और गुठलियों का उपयोग कर और बचे हुए खाने को दुबारा इस्तेमाल करके।

फूड साइक्लिंग को लेकर संयुक्त राष्ट्र के लक्ष्य

फूड साइक्लिंग sustainable development में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है क्योंकि यह भोजन की बर्बादी को कम करने में मदद करता है। संयुक्त राष्ट्र के सतत विकास लक्ष्यों (SDGs) के तहत, यह कई लक्ष्यों को पूरा करने में योगदान देता है। उदाहरण के लिए “भूखमरी खत्म करना” “जिम्मेदार उपभोग और उत्पादन” और “जलवायु परिवर्तन पर कार्रवाई” के तहत बचे हुए भोजन या उसके अंश को सही तरीके से उपयोग में लाने से एक बेहतर दुनिया बनाने में मदद हो सकती है।

किस तरह कर सकते हैं फूड साइक्लिंग

आज के समय में फूड वेस्टेज एक बड़ी समस्या बन चुकी है। अक्सर ये होता है कि हम रेस्टॉरेंट में जाकर कुछ ऑर्डर करते हैं और बचा हुआ खाना छोड़ देते हैं। अब वो सीधे डस्टबीन में जाएगा। लेकिन अगर आप उसे पैक कराकर घर ले आएं और उसमें थोड़ा बदलाव कर दुबारा इस्तेमाल कर लें तो इस तरह से आप भोजन की बर्बादी को रोक पाएंगे। या आप इस भोजन को किसी ज़रूरतमंद को भी दे सकते हैं। ऐसे कई उदाहरण हो सकते हैं। सब्जियों और फलों के छिलकों से कोई डिश बनाना, गुठलियों को सुखाकर उनका पाउडर बनाकर इस्तेमाल करना, अंडे के छिलके और बची हुई चायपत्ती को खाद की तरह उपयोग करना..ऐसे कई तरीके हो सकते हैं जिससे आप फूड साइक्लिंग को बढ़ावा दे सकते हैं।

इस तरह करें खाद्य पदार्थों का दुबारा इस्तेमाल

फूड साइक्लिंग उन खाद्य पदार्थों और वस्तुओं से की जा सकती है, जो आमतौर पर कचरे में फेंक दिए जाते हैं लेकिन पोषण से भरपूर होते हैं और इनका दुबारा उपयोग किया जा सकता है। उदाहरण के लिए, फलों और सब्जियों के छिलके (जैसे केला, तरबूज और आलू के छिलके) का आप सूप, चटनी या स्मूदी बनाने में इस्तेमाल कर सकते हैं। इसी तरह बचे हुए चावल या रोटी से उपमा, परांठा या पुलाव बनाया जा सकता है। फलों के बीज जैसे तरबूज या कद्दू के बीज को रोस्ट करके स्नैक के रूप में खाया जा सकता है। वहीं, बची हुई चाय की पत्तियों, अंडे के छिलकों को खाद के रूप में उपयोग किया जा सकता है। इस प्रकार फूड साइक्लिंग से न सिर्फ खाद्य पदार्थों की बर्बादी कम होती है, बल्कि ये आपके पोषण और जेब के लिए भी फायदेमंद साबित होगा।

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Shruty Kushwaha
लेखक के बारे में
2001 में माखनलाल चतुर्वेदी राष्ट्रीय पत्रकारिता विश्वविद्यालय भोपाल से पत्रकारिता में स्नातकोत्तर (M.J, Masters of Journalism)। 2001 से 2013 तक ईटीवी हैदराबाद, सहारा न्यूज दिल्ली-भोपाल, लाइव इंडिया मुंबई में कार्य अनुभव। साहित्य पठन-पाठन में विशेष रूचि। View all posts by Shruty Kushwaha
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