ऐतिहासिक भोजशाला परिसर आज कड़ी सुरक्षा के बीच पूजा और इबादत का केंद्र बना हुआ है। बसंत पंचमी और शुक्रवार एक ही दिन पड़ने के कारण यहां हिंदू समुदाय मां सरस्वती की अखंड पूजा कर रहा है, वहीं मुस्लिम समुदाय जुमे की नमाज अदा करेगा। सुप्रीम कोर्ट के हस्तक्षेप के बाद दोनों समुदायों के लिए एक सौहार्दपूर्ण रास्ता निकाला गया है।
यह स्थिति तब बनी जब हिंदू संगठनों ने बसंत पंचमी के अवसर पर सूर्योदय से सूर्यास्त तक पूजा करने की मांग की थी, जबकि मुस्लिम पक्ष हर शुक्रवार की तरह जुमे की नमाज पढ़ने पर कायम था। मामले की संवेदनशीलता को देखते हुए सुप्रीम कोर्ट ने दोनों पक्षों की दलीलों को सुना और एक संतुलित समाधान दिया।
सुप्रीम कोर्ट का संतुलित आदेश
अदालत ने अपने आदेश में स्पष्ट किया कि हिंदू पक्ष सूर्योदय से लेकर सूर्यास्त तक भोजशाला में अखंड पूजा और हवन कर सकेगा। वहीं, मुस्लिम समुदाय के लिए दोपहर 1 बजे से 3 बजे के बीच नमाज के लिए परिसर में ही एक अलग जगह उपलब्ध कराई जाएगी। प्रशासन द्वारा नमाजियों के लिए पास की व्यवस्था की गई है और दोनों समुदायों के प्रवेश व निकास के लिए अलग-अलग रास्ते बनाए गए हैं ताकि किसी भी तरह का टकराव न हो।
छावनी में तब्दील हुआ धार
सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद कानून-व्यवस्था बनाए रखना प्रशासन के लिए सबसे बड़ी चुनौती है। इसे देखते हुए पूरे धार जिले, विशेषकर भोजशाला के आसपास के इलाके को छावनी में तब्दील कर दिया गया है। करीब 8 हजार पुलिस और CRPF के जवानों को सुरक्षा में तैनात किया गया है।
भोजशाला परिसर में कड़ी बैरिकेडिंग की गई है और चप्पे-चप्पे पर सुरक्षाबलों की नजर है। पुलिस लगातार फ्लैग मार्च कर रही है। इलाके की निगरानी के लिए CCTV कैमरे और ड्रोन का इस्तेमाल किया जा रहा है। इसके अलावा, परिसर में प्रवेश करने वालों के लिए भी सख्त नियम हैं। किसी भी तरह की ज्वलनशील सामग्री जैसे बोतल या केन में पेट्रोल/डीजल ले जाने पर पाबंदी है।
प्रशासन ने की शांति की अपील
अदालत के फैसले के बाद जिला कलेक्टर समेत तमाम आला अधिकारियों ने दोनों पक्षों के प्रमुख लोगों के साथ बैठक की। इस बैठक में सभी से आपसी सम्मान और शांति बनाए रखने की अपील की गई। कोर्ट के फैसले से हिंदू समाज ने खुशी जाहिर की है, क्योंकि इससे उनकी अखंड पूजा का संकल्प पूरा हो सकेगा। प्रशासन किसी भी अप्रिय स्थिति से निपटने के लिए पूरी तरह से मुस्तैद है।





