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कान्हा नेशनल पार्क में फिर मृत मिला तेंदुआ, टेरिटोरियल फाइट की आशंका

Written by:Bhawna Choubey
Published:
कान्हा टाइगर रिज़र्व के किसली ज़ोन में नर तेंदुए की मौत ने वन्यजीव संरक्षण पर नए सवाल खड़े कर दिए हैं। एक्सपर्ट्स टाइगर से टेरिटोरियल फाइट को वजह मान रहे हैं, वहीं लगातार हो रही मौतों से पार्क मैनेजमेंट और निगरानी व्यवस्था पर गंभीर चिंता बढ़ गई है।
कान्हा नेशनल पार्क में फिर मृत मिला तेंदुआ, टेरिटोरियल फाइट की आशंका

मध्य प्रदेश के कान्हा टाइगर रिज़र्व से एक बार फिर चिंताजनक खबर सामने आई है। जिस कान्हा को दुनिया भर में बाघों और जैव विविधता के लिए जाना जाता है, वहीं अब लगातार हो रही वन्यजीव मौतें सवाल खड़े कर रही हैं। मंगलवार को किसली ज़ोन के मोची दादर बीट में एक नर तेंदुए का शव मिलने से पूरे वन विभाग में हड़कंप मच गया।

बीते कुछ महीनों में कान्हा नेशनल पार्क में बाघों और तेंदुओं की मौतों की संख्या बढ़ी है। यह घटना सिर्फ एक जानवर की मौत नहीं है, बल्कि उस पारिस्थितिकी तंत्र पर भी सवाल है, जिसे सुरक्षित माना जाता रहा है। यही वजह है कि यह मामला आम लोगों से लेकर वन्यजीव विशेषज्ञों तक सभी के लिए चिंता का विषय बन गया है।

किसली ज़ोन में मिला नर तेंदुए का शव

वन विभाग की नियमित गश्ती टीम जब किसली ज़ोन के मोची दादर बीट के कक्ष क्रमांक 6 में पहुंची, तो उन्हें एक नर तेंदुआ मृत अवस्था में मिला। प्राथमिक जांच में तेंदुए की उम्र करीब 10 से 12 वर्ष आंकी गई। सूचना मिलते ही वरिष्ठ वन अधिकारी, पशु चिकित्सक और विशेषज्ञों की टीम मौके पर पहुंची।

पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट में तेंदुए के सिर पर बाघ के दांतों के गहरे निशान पाए गए। विशेषज्ञों का कहना है कि यह साफ तौर पर टेरिटोरियल फाइट यानी क्षेत्रीय संघर्ष का संकेत देता है। जंगलों में बाघ अपने इलाके को लेकर बेहद आक्रामक होते हैं और अक्सर तेंदुए जैसे दूसरे मांसाहारी जीवों से भिड़ जाते हैं।

प्रोटोकॉल के तहत अंतिम संस्कार

तेंदुए का शव मिलने के बाद वन विभाग ने तय प्रोटोकॉल के अनुसार कार्रवाई की। मौके पर पोस्टमॉर्टम के बाद NTCA यानी नेशनल टाइगर कंजरवेशन अथॉरिटी के दिशा-निर्देशों के तहत अंतिम संस्कार किया गया। पूरी प्रक्रिया की वीडियोग्राफी और डॉक्यूमेंटेशन भी किया गया, ताकि किसी भी तरह की पारदर्शिता पर सवाल न उठे। वन विभाग का कहना है कि प्रारंभिक जांच में यह प्राकृतिक संघर्ष का मामला लग रहा है, लेकिन सभी पहलुओं को ध्यान में रखते हुए विस्तृत जांच जारी है। यह कदम इसलिए भी जरूरी है, क्योंकि कान्हा जैसे अंतरराष्ट्रीय स्तर पर प्रसिद्ध पार्क में हर मौत का असर उसकी साख पर पड़ता है।

गश्त और कैमरा ट्रैप बढ़े, फिर भी सवाल बरकरार

घटना के बाद मोची दादर और आसपास के क्षेत्रों में गश्त बढ़ा दी गई है। कैमरा ट्रैप की संख्या भी बढ़ाई जा रही है, ताकि बाघों और तेंदुओं की गतिविधियों पर लगातार नजर रखी जा सके। वन विभाग का दावा है कि निगरानी प्रणाली को और मजबूत किया जा रहा है। इन कदमों के बावजूद वन्यजीव मौतों की संख्या कम नहीं हो रही। इससे यह सवाल उठता है कि क्या मौजूदा सर्विलांस सिस्टम पर्याप्त है, या फिर इसमें बड़े स्तर पर सुधार की जरूरत है। पर्यावरणविदों का मानना है कि सिर्फ कैमरे बढ़ाने से समाधान नहीं होगा, बल्कि पूरे मैनेजमेंट सिस्टम की समीक्षा जरूरी है।

छह महीने में 6 बाघ और 3 तेंदुए की मौत

आंकड़ों पर नजर डालें तो स्थिति और गंभीर नजर आती है। पिछले छह महीनों में कान्हा टाइगर रिज़र्व में छह बाघ और तीन तेंदुओं की मौत हो चुकी है। यह संख्या किसी भी वन्यजीव संरक्षण क्षेत्र के लिए चिंता का विषय है, खासकर तब जब वह क्षेत्र अंतरराष्ट्रीय पहचान रखता हो। जंगलों में प्राकृतिक मौतें होती हैं, लेकिन जब घटनाएं लगातार सामने आएं, तो उनकी वजहों को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता। यह सिर्फ जानवरों की मौत नहीं, बल्कि पूरे इकोसिस्टम की सेहत का संकेत होती है।