Hindi News

MP के इन शहरों में रसोई गैस की भारी किल्लत, 5 लाख घरों में ठंडे पड़े चूल्हे, जनता में नाराज़गी

Written by:Bhawna Choubey
Published:
सतना और मैहर में रसोई गैस सिलेंडर की किल्लत ने हज़ारों परिवारों की रसोई ठप कर दी है। विवाह और त्योहारों के बीच घटती सप्लाई ने लोगों की मुश्किलें बढ़ा दी हैं, एजेंसियों के स्टॉक खाली, प्रशासन अब भी मौन।
MP के इन शहरों में रसोई गैस की भारी किल्लत, 5 लाख घरों में ठंडे पड़े चूल्हे, जनता में नाराज़गी

मध्य प्रदेश के सतना और मैहर जिलों में रसोई गैस की किल्लत (Gas Cylinder Shortage) गहराती जा रही है। जहां पहले हर दिन हज़ारों सिलेंडरों की डिलीवरी होती थी, वहीं अब एजेंसियों के पास स्टॉक लगभग खत्म हो चुका है। घरों में खाना बनाना मुश्किल हो गया है, और कई परिवार अब लकड़ी या पारंपरिक चूल्हों का सहारा लेने को मजबूर हैं।

लोगों का कहना है कि उन्होंने गैस की बुकिंग कई दिन पहले कर रखी है, लेकिन अब तक सिलेंडर नहीं मिला। एजेंसियों पर फोन करने पर सिर्फ एक जवाब मिलता है, सप्लाई नहीं आई है। त्योहारी और शादी के मौसम में जब गैस की सबसे ज्यादा जरूरत होती है, उसी वक्त इसकी कमी ने लोगों की परेशानियां बढ़ा दी हैं।

आधी हो गई गैस सप्लाई, हज़ारों बुकिंग लटकी

तेल कंपनियों से जुड़े सूत्रों के मुताबिक, फिलहाल सतना और मैहर में गैस की आपूर्ति अपने सामान्य स्तर के सिर्फ 40–50 प्रतिशत तक ही रह गई है। रिफिलिंग प्लांटों में गैस की कमी के चलते एजेंसियों तक सिलेंडरों की संख्या घट गई है। जहां पहले एक दिन में हज़ारों सिलेंडर पहुंचते थे, अब डिलीवरी मुश्किल से 20 प्रतिशत रह गई है। हज़ारों उपभोक्ताओं की बुकिंग वेटिंग लिस्ट में फंसी हुई है। एजेंसियों से कहा जा रहा है कि अगले हफ्ते तक इंतज़ार करें, लेकिन कई घरों में खाना बनाना अब मुश्किल होता जा रहा है। जिन परिवारों में शादी या कोई बड़ा आयोजन है, वे सबसे ज्यादा प्रभावित हैं।

विवाह सीजन में बढ़ी मांग, हालात और बिगड़े

नवंबर का महीना मध्य प्रदेश में शादियों और धार्मिक आयोजनों का समय होता है। सतना और मैहर जैसे इलाकों में घर-घर में तैयारियां चल रही हैं, लेकिन गैस की कमी ने सबकी टेंशन बढ़ा दी है। सतना शहर, मैहर और चित्रकूट जैसे क्षेत्रों में हजारों परिवार, होटल, भोजनालय और धार्मिक स्थल प्रभावित हुए हैं। कई जगह रसोई व्यवस्था पूरी तरह ठप हो चुकी है। धार्मिक स्थलों पर जहां हर दिन सैकड़ों लोगों के लिए भोजन बनता है, वहां अब लकड़ी और कोयले का इस्तेमाल शुरू हो गया है। त्योहारी और विवाह सीजन में गैस की डिमांड सामान्य दिनों से लगभग दोगुनी हो जाती है। लेकिन इस बार रिफिलिंग प्लांटों में स्टॉक की कमी और ट्रांसपोर्टेशन में रुकावट के चलते हालात बिगड़ गए हैं।

कंपनियों और प्रशासन की चुप्पी से बढ़ी जनता की नाराज़गी

स्थानीय लोगों का कहना है कि स्थिति बिगड़ने के बावजूद न तो तेल कंपनियों ने कोई पहल की है और न ही प्रशासन ने ठोस कदम उठाया है। किसी भी अधिकारी की ओर से अब तक कोई सार्वजनिक सूचना या समाधान की घोषणा नहीं की गई। लोगों का कहना है कि सरकार जहां हर घर रसोई गैस योजना का दावा करती है, वहीं ज़मीनी हकीकत कुछ और ही है। जब आम परिवारों को रोज़मर्रा की जरूरत के लिए गैस नहीं मिल रही, तो योजनाएं बेअसर लग रही हैं। अब आम जनता में नाराज़गी बढ़ती जा रही है, और लोगों का कहना है कि अगर हालात नहीं सुधरे तो विरोध प्रदर्शन भी किया जा सकता है।

छोटे व्यापारियों और होटल संचालकों पर भी संकट

गैस संकट का असर सिर्फ घरों तक सीमित नहीं है। सतना और मैहर के छोटे होटल, ढाबे, और खानपान से जुड़े व्यवसायों पर इसका सीधा प्रभाव पड़ा है। गैस की कमी के चलते कई दुकानों को ग्राहकों के ऑर्डर कैंसिल करने पड़े हैं। कई रेस्टोरेंट्स और ढाबों ने अब लकड़ी और कोयले से खाना बनाना शुरू कर दिया है, जिससे खर्च बढ़ गया है और समय भी ज्यादा लग रहा है। कुछ व्यापारियों का कहना है कि अगर स्थिति ऐसे ही बनी रही तो उन्हें दुकानें बंद करनी पड़ सकती हैं।

गैस आपूर्ति क्यों रुक रही है?

सूत्रों के अनुसार, सतना और मैहर में गैस सप्लाई बाधित होने के पीछे कई वजहें हैं। कई प्लांटों में उत्पादन अस्थायी रूप से प्रभावित हुआ है। गैस टैंकरों की कमी से वितरण की गति धीमी पड़ी है। नवंबर में शादी और त्योहारों के चलते डिमांड दोगुनी हो गई है। रीवा और जबलपुर के प्लांटों से आपूर्ति में देरी की वजह से सतना और मैहर की डिलीवरी अटक गई है। अधिकारियों का कहना है कि स्थिति पर नजर रखी जा रही है और अगले कुछ दिनों में आपूर्ति सामान्य करने का प्रयास जारी है। हालांकि, उन्होंने यह स्पष्ट नहीं किया कि हालात कब तक सुधर पाएंगे।

संकट का असर आम जनता पर

इस गैस संकट ने आम लोगों के रोज़मर्रा के जीवन को गहराई से प्रभावित किया है। कई परिवारों में सुबह-शाम का खाना बनाना मुश्किल हो गया है। कुछ लोगों ने अस्थायी रूप से पड़ोसियों से सिलेंडर उधार लेकर काम चलाना शुरू कर दिया है। रसोई गैस सिर्फ ईंधन नहीं, बल्कि हर घर की ज़रूरत है। इसकी कमी का सीधा असर परिवारों की दिनचर्या और मनोस्थिति पर पड़ता है। महिलाएं सबसे ज़्यादा परेशान हैं, क्योंकि उन्हें अब दोबारा लकड़ी या कोयले से खाना बनाने की मजबूरी झेलनी पड़ रही है।

सरकार और कंपनियों के लिए चेतावनी का समय

यह संकट सिर्फ एक आपूर्ति समस्या नहीं है, बल्कि सिस्टम की लापरवाही और तैयारी की कमी का नतीजा भी है। त्योहारी सीजन में जब मांग का अंदाजा पहले से लगाया जा सकता था, तब समय रहते स्टॉक और वितरण बढ़ाने की योजना क्यों नहीं बनाई गई? यह सवाल अब आम जनता के बीच गूंज रहा है। सरकार और तेल कंपनियों को अब गंभीरता से कदम उठाने होंगे, क्योंकि अगर यह संकट और बढ़ा तो यह सिर्फ एक जिले की समस्या नहीं रहेगी पूरे प्रदेश में असर दिखेगा।

 

Bhawna Choubey
लेखक के बारे में
मुझे लगता है कि कलम में बहुत ताकत होती है और खबरें हमेशा सच सामने लाती हैं। इसी सच्चाई को सीखने और समझने के लिए मैं रोज़ाना पत्रकारिता के नए पहलुओं को सीखती हूँ। View all posts by Bhawna Choubey
Follow Us :GoogleNews