MP सरकार ने औद्योगिक क्षेत्रों में आवासीय प्रोजेक्ट के नियम बदले, अब बहुमंजिला फ्लैट बनेंगे, पहले से चल रही योजनाओं को छूट

मध्य प्रदेश सरकार के नए नियम औद्योगिक क्षेत्रों में आवासीय जमीन के इस्तेमाल और औद्योगिक इकाइयों के लिए बनाई जाने वाली आवासीय सुविधाओं, दोनों पर लागू होंगे। इसके तहत जमीन को छोटे-छोटे प्लॉट में बांटकर बेचने या रो-हाउस बनाने की अनुमति नहीं होगी।
MP सरकार ने औद्योगिक क्षेत्रों में आवासीय प्रोजेक्ट के नियम बदले, अब बहुमंजिला फ्लैट बनेंगे, पहले से चल रही योजनाओं को छूट

मध्य प्रदेश में इंडस्ट्रियल एरिया के अंदर आवासीय निर्माण को लेकर सरकार ने नए नियम लागू किए हैं। दरअसल अब नई परियोजनाओं में स्वतंत्र मकान, रो-हाउस और अलग-अलग आवासीय प्लॉट नहीं बनाए जा सकेंगे। यहां सिर्फ बहुमंजिला फ्लैट और ग्रुप हाउसिंग प्रोजेक्ट बनाने की अनुमति होगी जिनमें सिंगल और डबल बेडरूम वाले घर बनाए जा सकेंगे। औद्योगिक नीति एवं निवेश प्रोत्साहन विभाग ने इस संबंध में नोटिफिकेशन जारी किया है। पुराने निर्माण और पहले से चल रही योजनाओं को इन नियमों से बाहर रखा गया है।

वहीं नए नियमों के मुताबिक औद्योगिक क्षेत्रों में अब केवल फ्लैट या बहुमंजिला ग्रुप हाउसिंग प्रोजेक्ट बनाए जा सकेंगे। इनमें सिंगल और डबल बेडरूम वाले आवासीय यूनिट के साथ हॉस्टल और उनसे जुड़ी सामाजिक सुविधाएं भी विकसित की जा सकेंगी। इसका मतलब है कि नई आवासीय परियोजनाओं में स्वतंत्र घरों और अलग-अलग प्लॉट के बजाय एक ही परिसर में कई फ्लैट बनाने पर जोर रहेगा।

आवासीय योजनाओं या पुराने निर्माण पर नहीं पड़ेगा असर

दरअसल ये नियम उन जमीनों पर भी लागू होंगे जिन्हें आवासीय उपयोग के लिए तय किया गया है। इसके अलाव औद्योगिक इकाइयों को आवंटित जमीन पर कर्मचारियों के रहने के लिए बनाई जाने वाली कैप्टिव आवासीय सुविधाएं भी इसके दायरे में आएंगी। किसी भी परियोजना के लिए पहले सक्षम प्राधिकारी से मंजूरी लेना जरूरी होगा। निर्माण के दौरान मास्टर प्लान, विकास योजना, भवन उपविधियों, जमीन आवंटन की शर्तों, अग्नि सुरक्षा और पर्यावरण के नियमों का पालन करना होगा। हालांकि इन नियमों का असर पहले से चल रही आवासीय योजनाओं या पुराने निर्माण पर नहीं पड़ेगा। यानी इंडस्ट्रियल एरिया में पहले से बने मकान और मौजूदा आवासीय परिसर इन नए प्रावधानों के कारण प्रभावित नहीं होंगे। नए नियमों का संबंध आगे शुरू होने वाली परियोजनाओं से है।

छूट और हस्तांतरण के नए नियम

दरअसल सरकार ने औद्योगिक क्षेत्रों में जमीन की कीमत तय करने का तरीका भी स्पष्ट किया है। ग्रामीण और शहरी क्षेत्रों में विकसित या विकसित किए जाने वाले औद्योगिक क्षेत्रों में जमीन का मूल्य संबंधित क्षेत्र की असिंचित कृषि भूमि के लिए तय कलेक्टर गाइडलाइन को 0.6 से भाग देकर निकाला जाएगा। हालांकि किसी भी स्थिति में जमीन की कीमत 250 रुपये प्रति वर्गमीटर से कम नहीं होगी। अगर इस गणना से कीमत इससे कम आती है तो एमपीआईडीसी के प्रबंध संचालक को संचालक मंडल की अनुमति से कीमत बढ़ाने का अधिकार होगा।

अतिरिक्त हिस्से को छूट नहीं मिलेगी

वहीं निवेश के आधार पर तय सीमा से ज्यादा जमीन लेने पर अतिरिक्त हिस्से को छूट नहीं मिलेगी। उदाहरण के तौर पर यदि कोई कंपनी प्लांट और मशीनरी में 200 करोड़ रुपये का निवेश करती है और उसे 25 हेक्टेयर जमीन आवंटित होती है तो 20 हेक्टेयर जमीन पर ही छूट मिलेगी। बाकी 5 हेक्टेयर पर यह छूट लागू नहीं होगी। नियमों में 40 हेक्टेयर तक जमीन आवंटन पर प्रीमियम की गणना के दौरान जमीन के मूल्य में 50% छूट का प्रावधान भी दिया गया है।

इसके अलावा, किसी औद्योगिक इकाई के पास आवंटित जमीन का कुछ हिस्सा इस्तेमाल में नहीं है, तो उसे तय शर्तों के तहत अलग करके हस्तांतरित किया जा सकेगा। इसके लिए अनुपयोगी जमीन का हिस्सा अधिकतम 50% या कम से कम 5,000 वर्गमीटर तक हो सकता है और वहां अलग सड़क मार्ग उपलब्ध होना जरूरी होगा। मूल आवंटी को हस्तांतरण से पहले भू-भाटक, संधारण शुल्क और बाकी सभी बकाया चुकाने होंगे। साथ ही, आवंटन के दस्तावेजों में जरूरी बदलाव कराकर समर्पण से जुड़े दस्तावेज निष्पादित और पंजीकृत कराने होंगे।

जमीन और भवन आवंटन के अधिकार भी तय

वहीं नए नियमों में एमपीआईडीसी के अधिकारियों के बीच जमीन और भवन आवंटन के अधिकार भी तय किए गए हैं। औद्योगिक भवनों के आवंटन का अधिकार क्षेत्रीय कार्यालय के कार्यकारी संचालक को दिया गया है। आवासीय और व्यावसायिक इस्तेमाल के लिए जमीन आवंटित करने के मामले में क्षेत्रीय कार्यालय के कार्यकारी संचालक 10,000 वर्गमीटर तक की जमीन आवंटित कर सकेंगे जबकि इससे ज्यादा जमीन आवंटित करने का अधिकार प्रबंध संचालक के पास होगा। नियमों में पब्लिक-प्राइवेट पार्टनरशिप (पीपीपी) मॉडल पर औद्योगिक आवास परियोजनाएं शुरू करने का प्रावधान भी है।

Rishabh Namdev
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