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4 महीने बाद भी नहीं आया प्राथमिक शिक्षक चयन परीक्षा का परिणाम, अभ्यर्थी 18 फरवरी को करेंगे शांतिपूर्ण आंदोलन

Written by:Banshika Sharma
Published:
प्राथमिक शिक्षक चयन परीक्षा के नतीजे घोषित हुए साढ़े चार महीने से अधिक समय बीत चुका है, लेकिन परिणाम अभी तक जारी नहीं किया गया। बार-बार फॉर्म एडिट का विकल्प खोलने से अभ्यर्थियों में असंतोष बढ़ा है, जिसके चलते 18 फरवरी को संबंधित कार्यालय के सामने शांतिपूर्ण प्रदर्शन की योजना है।
4 महीने बाद भी नहीं आया प्राथमिक शिक्षक चयन परीक्षा का परिणाम, अभ्यर्थी 18 फरवरी को करेंगे शांतिपूर्ण आंदोलन

मध्य प्रदेश में प्राथमिक शिक्षक चयन परीक्षा में शामिल हजारों अभ्यर्थी अब धैर्य खोते नजर आ रहे हैं। परीक्षा संपन्न हुए लगभग साढ़े चार महीने का समय बीत चुका है, लेकिन परिणाम की घोषणा अभी तक नहीं हो पाई है। लंबे इंतजार के कारण अभ्यर्थी न केवल मानसिक तनाव झेल रहे हैं, बल्कि आर्थिक और सामाजिक रूप से भी परेशानियों का सामना कर रहे हैं।

अभ्यर्थियों के बीच असंतोष का एक बड़ा कारण चयन प्रक्रिया के दौरान बार-बार फॉर्म एडिट का विकल्प खोला जाना भी है। कई अभ्यर्थियों का मानना है कि यह कदम पारदर्शिता पर सवाल खड़े करता है और इससे चयन प्रक्रिया की निष्पक्षता को लेकर संशय की स्थिति बनी हुई है।

18 फरवरी को प्रस्तावित है शांतिपूर्ण आंदोलन

अपनी समस्याओं को शासन-प्रशासन तक पहुंचाने के लिए अभ्यर्थियों ने 18 फरवरी को संबंधित कार्यालय के समक्ष शांतिपूर्ण प्रदर्शन करने का फैसला लिया है। आंदोलनकारियों का उद्देश्य अपनी मांगों को सभ्य तरीके से रखना और परिणाम जल्द से जल्द जारी करने की मांग करना है।

अभ्यर्थियों की प्रमुख मांग है कि परीक्षा परिणाम तत्काल घोषित किया जाए, ताकि वे अपने करियर की अगली योजना बना सकें। साथ ही, फॉर्म में बार-बार संशोधन की अनुमति देने की प्रक्रिया को लेकर स्पष्टीकरण की भी मांग की जा रही है।

हजारों अभ्यर्थियों का भविष्य लटका हुआ

इस चयन परीक्षा में हजारों युवाओं ने अपने करियर की उम्मीद लगाई हुई है। परिणाम में देरी के कारण न केवल उनका भविष्य अनिश्चित बना हुआ है, बल्कि कई अभ्यर्थी आर्थिक तंगी से भी जूझ रहे हैं। कई युवाओं ने परीक्षा की तैयारी के लिए नौकरी छोड़ दी थी या अन्य अवसरों को टाल दिया था, जिससे अब उनके सामने गंभीर चुनौतियां खड़ी हो गई हैं।

अभ्यर्थियों का कहना है कि सामान्य परिस्थितियों में परीक्षा के दो से तीन महीने के भीतर परिणाम घोषित कर दिया जाता है, लेकिन इस बार अत्यधिक विलंब हो रहा है। इससे उनके बीच निराशा और असमंजस का माहौल बना हुआ है।

पारदर्शिता पर उठ रहे सवाल

फॉर्म एडिट की सुविधा को बार-बार सक्रिय किए जाने से अभ्यर्थियों में यह धारणा बनी है कि कहीं न कहीं चयन प्रक्रिया में हस्तक्षेप की गुंजाइश बन रही है। कई अभ्यर्थी इसे अनुचित मानते हैं और इसकी जांच की मांग कर रहे हैं।

अभ्यर्थियों ने मीडिया के माध्यम से अपनी आवाज को व्यापक स्तर तक पहुंचाने की अपील की है, ताकि संबंधित अधिकारी इस मुद्दे पर संज्ञान ले सकें और जल्द से जल्द परिणाम घोषित करने की दिशा में कदम उठाएं। 18 फरवरी को प्रस्तावित आंदोलन के दौरान अभ्यर्थी अपनी मांगों को लेकर दृढ़ संकल्प के साथ उपस्थित होने की योजना बना रहे हैं।

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