मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने ट्वीट करते हुए जानकारी दी कि 27 सितंबर 2024 को सागर में आयोजित होने वाला रीजनल इंडस्ट्रियल कॉन्क्लेव प्रदेश के औद्योगिक विकास के लिए मील का पत्थर साबित होने वाला है। दरअसल मध्य प्रदेश में औद्योगिक निवेश को अधिक बढ़ावा देने के उद्देश्य से पहले उज्जैन, जबलपुर, और ग्वालियर में सफल समिट्स आयोजित किए जा चुके हैं, और वहीं अब सागर क्षेत्र भी इस दिशा में अपना कदम बड़ा रहा है।
दरअसल इस कॉन्क्लेव के माध्यम से विभिन्न क्षेत्रों में निवेश की संभावना जताई जा रही है। जानकारी के अनुसार इसमें एविएशन, टूरिज्म, कृषि उपकरण, लघु उद्योग, नवीकरणीय ऊर्जा, वन्यजीव पर्यटन, खनन, कुटीर उद्योग, मैन्युफैक्चरिंग, खाद्य प्रसंस्करण, आईटी, और पेट्रोकेमिकल उद्योग शामिल हैं। वहीं MP SIDC के प्रबंध निदेशक चंद्रमौली शुक्ला ने बताया कि इस कॉन्क्लेव का मुख्य उद्देश्य राज्य में व्यापक निवेश को आकर्षित करना है। जिससे सभी वर्ग के बेरोजगारों को नए रोजगार के अवसर मिल सकें।
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मुख्यमंत्री करेंगे वन टू वन चर्चा:
वहीं इस कार्यक्रम में मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव 50 से ज्यादा प्रमुख उद्यमियों के साथ व्यक्तिगत संवाद करेंगे। जानकारी के अनुसार इस दौरान स्थानीय कुटीर उद्योगों, विशेष रूप से बीड़ी उद्योग, पर विशेष ध्यान केंद्रित किया जाएगा। जिसके चलते बीड़ी उद्योग के लिए एक अलग सत्र में विस्तृत कार्ययोजना पर चर्चा की जाएगी, ताकि इस क्षेत्र में रोजगार के और अधिक अवसर तेजी से उत्पन्न किए जा सकें।
प्रदेश में निवेश की अब तक की कहानी….
बता दें कि इससे पहले उज्जैन, जबलपुर, और ग्वालियर में सफल समिट्स आयोजित किए जा चुके हैं। जिनमें मध्य प्रदेश को बड़ा निवेश मिला है। दरअसल उज्जैन रीजनल समिट में 1 लाख करोड़ रुपये से अधिक के निवेश का प्रस्ताव रखा गया है, वहीं जबलपुर रीजनल समिट में भी 22 हजार करोड़ रुपये के निवेश की प्रतिबद्धता जताई गई है। इसके साथ ही, ग्वालियर रीजनल समिट में 8 हजार करोड़ रुपये से अधिक के निवेश का वादा किया गया है।
‘एक जिला-एक उत्पाद’ योजना:
जानकारी के अनुसार इसके अतिरिक्त, ‘एक जिला-एक उत्पाद’ योजना के अंतर्गत सागर और उसके आस-पास के जिलों में निर्मित वस्त्र, हस्तशिल्प, और कृषि उत्पादों की गुणवत्ता में सुधार, विपणन और पूर्व-प्रसंस्करण पर भी चर्चा की जानी है। दरअसल इस योजना का मुख्य उद्देश्य स्थानीय कुटीर उद्योगों को व्यवस्थित तरीके से बढ़ावा देना बताया जा रहा है। इससे न केवल क्षेत्रीय अर्थव्यवस्था को मजबूती मिलेगी, बल्कि इन जिलों में रोजगार के अवसर भी बढ़ेंगे।