मध्य प्रदेश कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष जितेंद्र (जीतू) पटवारी ने जल संसाधन विभाग की टेंडर व्यवस्था को सीधे निशाने पर लिया। उन्होंने कहा, मामला सिर्फ कागजी प्रक्रिया का नहीं है, इसका असर उन सिंचाई परियोजनाओं पर पड़ रहा है जिनका इंतजार किसान लंबे समय से कर रहे हैं।
पटवारी का मुख्य आरोप टेंडर पैटर्न को लेकर रहा। उनके मुताबिक विभाग के कई बड़े टेंडरों में बार-बार वही सीमित कंपनियां दिखाई देती हैं, कभी L1, कभी L2, कभी L3 की स्थिति में। उन्होंने इसे सामान्य प्रतिस्पर्धा के बजाय ‘रोटेशन’ जैसा पैटर्न बताया और पूछा कि अगर प्रतिस्पर्धा खुली है तो नाम इतने सीमित क्यों हैं।
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यहीं से उन्होंने पारदर्शिता पर बड़ा सवाल खड़ा किया। उनका कहना था कि जब बोली प्रक्रिया में दावेदारों का दायरा छोटा दिखे और परिणाम बार-बार समान समूहों के इर्द-गिर्द घूमे, तो विभाग को सार्वजनिक रूप से स्पष्ट करना चाहिए कि पात्रता, तकनीकी स्कोर और वित्तीय मूल्यांकन कैसे तय हुआ।
कागज में DI, जमीन पर HDPE: आरोप का सबसे संवेदनशील हिस्सा
पत्रकार वार्ता में पटवारी ने कुछ सिंचाई परियोजनाओं का जिक्र करते हुए दावा किया कि तकनीकी स्तर पर गंभीर अनियमितताओं की शिकायतें सामने आई हैं। आरोप यह है कि साइट पर HDPE पाइप लगाए गए, लेकिन भुगतान DI पाइप के नाम से निकाला गया। अगर यह आरोप सही पाया जाता है तो मामला सिर्फ गुणवत्ता का नहीं, सीधे वित्तीय अनियमितता का बनता है, क्योंकि दोनों सामग्रियों की लागत, टिकाऊपन और उपयोगिता अलग होती है।
उन्होंने कहा कि पाइप जैसी बुनियादी सामग्री में बदलाव का असर बाद में किसानों को भुगतना पड़ता है। योजना कागज पर पूरी दिखती है, भुगतान हो जाता है, लेकिन वितरण क्षमता और पाइपलाइन की उम्र सवालों में आ जाती है। सीधी बात, नुकसान खेत तक जाता है।
डेढ़ साल से बड़े टेंडर नहीं, परियोजनाएं अटकीं; अब e-Bank Guarantee पर दबाव
कांग्रेस अध्यक्ष ने यह भी कहा कि जल संसाधन विभाग में पिछले करीब डेढ़ वर्ष से बड़े टेंडर जारी नहीं किए गए, जबकि कई सिंचाई परियोजनाएं लंबित हैं। उनका तर्क था कि जब परियोजनाएं समय पर आगे नहीं बढ़ेंगी तो नहरों और पाइपलाइन नेटवर्क का विस्तार भी रुकेगा, और इसका सीधा असर पानी के इंतजार में बैठे किसानों पर पड़ेगा।
पटवारी ने बैंक गारंटी वाले मुद्दे को भी जोड़ा और कहा कि जल निगम में फर्जी बैंक गारंटी का मामला सामने आने के बाद 9 दिसंबर 2024 को इलेक्ट्रॉनिक बैंक गारंटी (e-Bank Guarantee) लागू करने का आदेश जारी हुआ था। लेकिन उनके अनुसार जल संसाधन विभाग और NVDA में यह व्यवस्था अब तक लागू नहीं की गई। उन्होंने पूछा कि जब जोखिम सामने आ चुका है तो दोनों विभाग अभी भी पुराने ढांचे पर क्यों चल रहे हैं।
कांग्रेस की मांग तीन बिंदुओं में साफ है: जल संसाधन विभाग में जमा सभी बैंक गारंटियों की जांच हो, e-Bank Guarantee व्यवस्था तत्काल लागू की जाए, और वर्ष 2023-24 में लगाए गए टेंडरों की न्यायिक जांच कराई जाए।