उज्जैन: गुड़ी पड़वा के पावन अवसर पर महाकाल की नगरी उज्जैन का आसमान एक अद्भुत और अविस्मरणीय दृश्य का गवाह बना। विक्रमोत्सव 2026 के हिस्से के रूप में आयोजित एक भव्य कार्यक्रम में 1500 ड्रोन ने एक साथ उड़ान भरकर सनातन संस्कृति, आस्था और इतिहास की गाथा को जीवंत कर दिया। इस आयोजन को देखने के लिए हजारों की संख्या में लोग मौजूद थे, जिन्होंने इस तकनीकी और कलात्मक संगम की जमकर सराहना की।

कॉन्सेप्ट कम्युनिकेशन भोपाल द्वारा आयोजित यह ड्रोन लाइट शो सिर्फ एक मनोरंजन का कार्यक्रम नहीं, बल्कि मध्यप्रदेश की समृद्ध सांस्कृतिक विरासत को आधुनिक तकनीक के माध्यम से वैश्विक मंच पर प्रस्तुत करने का एक संगठित प्रयास था। कॉन्सेप्ट कम्युनिकेशन द्वारा तैयार की गई इस प्रस्तुति ने उज्जैन की पहचान को और भी मजबूत किया।

आस्था और तकनीक का अनोखा संगम

कार्यक्रम की शुरुआत ‘जय श्री महाकाल’ के उद्घोष के साथ हुई, जिसके बाद पूरा आसमान रंग-बिरंगी रोशनियों से जगमगा उठा। ड्रोन ने सटीकता के साथ एक के बाद एक ऐसी आकृतियां बनाईं, जिसने दर्शकों को मंत्रमुग्ध कर दिया। इस मौके पर मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव भी मौजूद थे। उन्होंने इस आयोजन को एक अद्भुत नजारा बताया।

“देवता भी जिस नगरी की शोभा देखने के लिए आकाश मार्ग से हमारे बीच आए हैं, अब ड्रोन के माध्यम से दृश्य रूप में पधारे हैं। यह अद्भुत नजारा है।” — डॉ. मोहन यादव, मुख्यमंत्री, मध्यप्रदेश

मुख्यमंत्री ने आगे कहा कि विक्रम संवत 2982 का यह दृश्य आसमान से देखना अपने आप में एक अलग अनुभव है और ड्रोन तकनीक ने इस पूरे आयोजन को विशेष बना दिया है।

आसमान पर जीवंत हुई महाकाल की गाथा

इस ड्रोन शो में कला, संस्कृति और आध्यात्म का अद्भुत मिश्रण देखने को मिला। ड्रोन के माध्यम से आसमान में कई मनमोहक दृश्य प्रस्तुत किए गए, जिनमें प्रमुख थे:

  • प्रधानमंत्री और मुख्यमंत्री के पोर्ट्रेट
  • भगवान शिव का त्रिशूल और डमरू
  • 12 ज्योतिर्लिंग और 84 कल्पों के महादेव
  • 3D महाकालेश्वर मंदिर की प्रतिकृति
  • शिव-शक्ति का चित्रण
  • सांदीपनि आश्रम में भगवान श्रीकृष्ण की शिक्षा
  • सम्राट विक्रमादित्य की गौरव गाथा
  • आगामी सिंहस्थ 2028 और विक्रम संवत 2083 का प्रदर्शन

हर प्रस्तुति एक कहानी के रूप में सामने आई, जिसने उज्जैन को आस्था और काल की नगरी के रूप में एक बार फिर स्थापित किया। दर्शकों ने इस पूरे आयोजन को उज्जैन की वैश्विक पहचान को मजबूत करने वाला एक महत्वपूर्ण कदम बताया।