एशिया कप 2025 में रविवार को भारत और पाकिस्तान के बीच हुए क्रिकेट मैच पर राजनीतिक विवाद गहराता जा रहा है। शिवसेना (यूबीटी) के सांसद संजय राउत ने आरोप लगाया कि इस मैच से पाकिस्तान क्रिकेट बोर्ड (पीसीबी) को करीब 1 हजार करोड़ रुपये मिले। उनका दावा है कि यह मैच फिक्स था और करीब 1.5 लाख करोड़ रुपये के जुए में से 50 हजार करोड़ रुपये सीधे पाकिस्तान को गए। राउत ने सवाल किया कि जब भारत अंतरराष्ट्रीय मंचों पर पाकिस्तान को आर्थिक मदद न देने की बात करता है, तो फिर खुद क्रिकेट मैच के जरिए उसे फायदा क्यों पहुंचाया जा रहा है।
संजय राउत ने कहा कि केंद्र सरकार ने आईएमएफ और एशियाई विकास बैंक से पाकिस्तान को कर्ज न देने के लिए कहा था क्योंकि वहां की सरकार इस धन का इस्तेमाल आतंकवाद को बढ़ाने में करती है। इसके बावजूद भारत में हुए इस मैच ने पाकिस्तान की तिजोरी भर दी। उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और गृह मंत्री अमित शाह के बेटे जय शाह पर भी गंभीर आरोप लगाते हुए कहा कि उनके फैसले की वजह से पाकिस्तान को सीधा आर्थिक फायदा हुआ। राउत का आरोप है कि सरकार ने सोची-समझी रणनीति के तहत पाकिस्तान को मजबूत किया ताकि बाद में आतंकवादी गतिविधियों का हवाला देकर राजनीतिक लाभ उठाया जा सके।
संजय राउत ने सरकार पर लगाए गंभीर आरोप
राउत ने कहा कि इस मैच का आयोजन ही सरकार की “निर्लज्जता” है। उन्होंने कहा कि चाहे मैच दुबई, अबू धाबी या अमेरिका में आयोजित हो, इससे भारत के शहीदों का बलिदान वापस नहीं आ सकता। उन्होंने सवाल उठाया कि क्या इस मैच से शहीदों की विधवाओं का सिंदूर वापस आ जाएगा? राउत ने पूर्व क्रिकेटर सुनील गावस्कर की सराहना की, जिन्होंने मैच का विरोध करने की बात कही थी, लेकिन भारत सरकार ने इसके बावजूद पाकिस्तान से खेलने की इजाजत दी। राउत का कहना है कि यह साफ है कि यह फैसला सरकार की इच्छा से ही लिया गया।
संजय राउत के इन बयानों ने भारत-पाकिस्तान क्रिकेट मैच को लेकर एक नई राजनीतिक बहस छेड़ दी है। विपक्ष इसे देशहित और शहीदों की शहादत की अनदेखी बता रहा है, वहीं सत्ता पक्ष पर सीधे तौर पर पाकिस्तान को आर्थिक मदद देने के आरोप लगाए जा रहे हैं। यह विवाद अब संसद से लेकर सोशल मीडिया तक गहराने की संभावना जता रहा है।





