इस सप्ताह पश्चिम एशिया में जारी संघर्ष की पृष्ठभूमि में एलपीजी सप्लाई को लेकर सियासत अचानक तेज हो गई है। शिवसेना (उद्धव बालासाहेब ठाकरे) के नेता और राज्यसभा सांसद संजय राउत ने केंद्र सरकार पर सीधा हमला बोलते हुए कहा कि जो भरोसे दिए गए थे, जमीन पर तस्वीर उससे अलग दिख रही है।

राउत का आरोप है कि कमर्शियल और घरेलू गैस, दोनों मोर्चों पर दबाव बढ़ रहा है और इसका असर सीधे आम लोगों की रसोई और छोटे कारोबार पर पड़ रहा है। उनका कहना है कि जब पश्चिम एशिया में तनाव शुरू हुआ था, तब केंद्र की तरफ से यह संदेश दिया गया कि भारत पर कोई असर नहीं पड़ेगा और कीमतें भी नियंत्रण में रहेंगी। राउत ने कहा कि अब उसी दावे की परीक्षा हो रही है।

रेस्टोरेंट से टाइल फैक्ट्री तक, असर का दावा

मुंबई का हवाला देते हुए राउत ने कहा कि गैस की किल्लत के कारण कई रेस्टोरेंट मुश्किल में हैं और कुछ जगह बंद होने की नौबत की खबरें आ रही हैं। उन्होंने यह भी कहा कि मामला केवल होटल कारोबार तक सीमित नहीं है, उद्योगों पर भी दबाव बन रहा है। उनके मुताबिक वाहन क्षेत्र पर भी संकट की आशंका है और गुजरात के मोरबी के टाइल उद्योग पर इसका असर दिखने लगा है।

राउत ने प्रधानमंत्री, वित्त मंत्री और विदेश मंत्री के पुराने आश्वासनों का जिक्र करते हुए कहा कि मौजूदा हालात उन बयानों से मेल नहीं खाते। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि सत्ता पक्ष के नेता इस मुद्दे पर खुलकर बोलने से बच रहे हैं, जबकि बाजार और सप्लाई चैन की चिंता लगातार बढ़ रही है।

पुराने बयान पर तंज, बोले मुंबई में प्लांट खोलिए

हमले को तेज करते हुए राउत ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के उस पुराने बयान का संदर्भ उठाया, जिसमें नाले से गैस बनाने के प्रयोग की बात कही गई थी। राउत ने कहा कि अगर ऐसा मॉडल व्यवहारिक है, तो मुंबई में उसका संयंत्र शुरू कर उद्घाटन किया जाना चाहिए। उनके इस बयान को सरकार की ऊर्जा नीति और मौजूदा सप्लाई संकट पर राजनीतिक तंज के तौर पर देखा जा रहा है।

यह टिप्पणी इसलिए भी अहम मानी जा रही है क्योंकि एलपीजी और ईंधन की उपलब्धता का असर सीधे घरेलू बजट, शहरी सर्विस सेक्टर और छोटे उद्योगों की लागत पर पड़ता है। राउत ने इसी कड़ी में कहा कि सरकार को स्थिति साफ-साफ बतानी चाहिए कि सप्लाई सामान्य है या दबाव में।

मुद्दा गैस से आगे गया, चुनाव आयोग और विदेशी बयान भी आए निशाने पर

राउत ने अपनी प्रतिक्रिया में चुनाव आयोग पर भी सवाल उठाए और आरोप लगाया कि आयोग सरकार के दबाव में काम कर रहा है। उन्होंने मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार को लेकर भी तंज किया। साथ ही अमेरिका के प्रेस सचिव के बयान का जिक्र करते हुए कहा कि भारत को रूस से तेल खरीदने या न खरीदने के फैसले पर बाहरी दबाव की बात करना देश और प्रधानमंत्री, दोनों के लिए अपमानजनक है।

देर शाम तक केंद्र सरकार की ओर से राउत के इन आरोपों पर कोई औपचारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई। एलपीजी सप्लाई और ईंधन कीमतों को लेकर नजर अब अगले कुछ दिनों में उपलब्धता और सरकारी रुख पर टिकी रहेगी।