महाराष्ट्र विधानमंडल में हाल ही में पास हुए स्पेशल पब्लिक सिक्योरिटी बिल 2024 को लेकर राज्य में सियासत गर्मा गई है। विपक्षी दल और सिविल सोसाइटी इस बिल को सरकार की आलोचना को दबाने का औजार बता रहे हैं। इनका कहना है कि सरकार इस कानून का इस्तेमाल विरोधी विचारों और आंदोलनकारी समूहों के खिलाफ कर सकती है। दूसरी ओर, मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने इस आशंका को सिरे से खारिज करते हुए कहा कि यह कानून सिर्फ ‘अर्बन नक्सलिज्म’ और ‘पैसिव मिलिटेंसी’ से निपटने के लिए बनाया गया है, न कि शांतिपूर्ण विरोध करने वालों को दबाने के लिए।
पब्लिक सिक्योरिटी बिल पर फडणवीस का बयान
मुख्यमंत्री फडणवीस ने नागपुर में पत्रकारों से बातचीत में स्पष्ट किया कि अगर कोई अर्बन नक्सल की तरह काम करेगा, तो निश्चित ही उस पर कार्रवाई होगी। लेकिन जो लोग शांतिपूर्ण प्रदर्शन या सरकार की आलोचना कर रहे हैं, उन्हें इस कानून से डरने की जरूरत नहीं है। उन्होंने जोर देते हुए कहा कि “आलोचना लोकतंत्र का हिस्सा है, लेकिन नक्सल एजेंडे को बढ़ावा देना अस्वीकार्य है।”
स्पेशल पब्लिक सिक्योरिटी बिल 2024 में वामपंथी उग्रवादी संगठनों की शहरी गतिविधियों को रोकने के लिए विशेष प्रावधान रखे गए हैं। यह खासतौर पर उन लोगों पर लागू होगा जो शहरों में रहकर छिपे तौर पर नक्सल विचारधारा को बढ़ावा देते हैं। दोषी पाए जाने पर इसमें सात साल तक की जेल और भारी जुर्माने का प्रावधान है। इन्हीं कड़े प्रावधानों को लेकर विपक्षी पार्टियां जैसे कांग्रेस, एनसीपी और कई सामाजिक संगठन इस कानून को नागरिक स्वतंत्रता के खिलाफ बता रहे हैं।
महाराष्ट्र नवनिर्माण सेना (MNS) प्रमुख राज ठाकरे ने फडणवीस को चुनौती देते हुए कहा कि अगर हिम्मत है तो उनके कार्यकर्ताओं को इस कानून के तहत गिरफ्तार करें। इस पर फडणवीस ने कहा कि कानून का उपयोग किसी राजनीतिक दल के खिलाफ नहीं, बल्कि नक्सल गतिविधियों के खिलाफ किया जाएगा। इसके साथ ही उन्होंने हिंदी-भाषा विवाद पर भी बयान दिया और कहा कि मराठी महाराष्ट्र की अनिवार्य भाषा है, लेकिन भारतीय भाषाओं को प्रोत्साहन देना भी जरूरी है। उन्होंने कहा कि अंग्रेजी की जगह भारतीय भाषाओं को प्राथमिकता मिलनी चाहिए।




