मुंबई में गैस सिलेंडर की किल्लत के बीच साइबर ठगों ने पिछले एक महीने में गैस के नाम पर एक करोड़ रुपए से ज्यादा की ठगी की है। दरअसल इन ठगों ने लोगों के बैंक खातों को खाली करने के लिए एक खतरनाक नया तरीका अपनाया है, जिसमें ‘APK’ फाइल का इस्तेमाल किया जा रहा है। जानकारी के अनुसार शहर में इन दिनों सिलेंडर की भारी किल्लत है और गैस आपूर्ति को लेकर लोग अनिश्चितता में हैं।
वहीं ऐसे में साइबर अपराधी तेजी से सक्रिय हो गए हैं, जो लोगों की परेशानी का फायदा उठाकर उन्हें अपना शिकार बना रहे हैं। दरअसल यह स्थिति मुंबई में एक बड़े साइबर धोखाधड़ी रैकेट को जन्म दे चुकी है, जहां करोड़ों रुपए उड़ाए जा रहे हैं। साइबर ठग खुद को महानगर गैस लिमिटेड का अधिकारी बताते हैं और लोगों को फोन या मैसेज करते हैं। वे पीड़ितों को डराते हैं कि उनका गैस बिल बकाया है और अगर भुगतान नहीं किया तो उनका कनेक्शन काट दिया जाएगा। यह पहला कदम लोगों में डर पैदा करता है, जिससे वे ठगों की बातों में आसानी से आ जाते हैं।
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पहले भरोसा जीतते हैं
दरअसल डर पैदा करने के बाद, ठग भरोसा जीतने के लिए दोबारा कॉल करते हैं। वे ‘बिल अपडेट’ या ‘भुगतान समाधान’ के बहाने एक एपीके फाइल भेजने की बात करते हैं। वहीं यह फाइल एक फर्जी ऐप होती है जिसे लोगों को अपने फोन में डाउनलोड और इंस्टॉल करने के लिए कहा जाता है। ठग इस प्रक्रिया को इतना आसान दिखाते हैं कि पीड़ित को शक नहीं होता। जैसे ही कोई व्यक्ति इस भेजी गई एपीके फाइल को अपने फोन में डाउनलोड करके इंस्टॉल करता है, उसके मोबाइल में मालवेयर सक्रिय हो जाता है। यह मालवेयर फोन के ऑपरेटिंग सिस्टम पर पूरा नियंत्रण हासिल कर लेता है। यह ऐप गोपनीय बैंकिंग जानकारी, ओटीपी और फोन के पूरे डेटा तक ठगों को पहुंच प्रदान कर देता है।
कैसे करते हैं फ्रॉड?
दरअसल मालवेयर की मदद से ठग आसानी से पीड़ितों के बैंक खाते से पैसे निकाल लेते हैं। उन्हें ओटीपी की भी जरूरत नहीं पड़ती, क्योंकि मालवेयर खुद ही उसे पढ़ लेता है और ठगों तक पहुंचा देता है। इस तरह, कुछ ही मिनटों में लाखों रुपए खातों से साफ कर दिए जाते हैं, और पीड़ित को इसकी भनक भी नहीं लगती। यह पूरी प्रक्रिया इतनी तेजी से होती है कि संभलने का मौका नहीं मिलता। मुलुंड पश्चिम के 20 वर्षीय व्यापारी मितुल दोषी भी इसी गिरोह के शिकार बने हैं। उन्हें गैस कनेक्शन बंद करने का एक मैसेज मिला था, जिसके बाद उन्होंने डरकर 1150 रुपए का भुगतान कर दिया था। बाद में एक कॉल के जरिए उन्हें एक एपीके फाइल भेजी गई।
दरअसल मितुल दोषी ने जैसे ही वह एपीके फाइल डाउनलोड कर इंस्टॉल की, कुछ ही देर में उनके बैंक खाते से 11.82 लाख रुपए निकाल लिए गए। उन्हें पता भी नहीं चला कि उनके साथ यह बड़ी धोखाधड़ी कैसे हुई। यह घटना दिखाती है कि कैसे कम उम्र के और जागरूक दिखने वाले लोग भी इस तकनीकी जाल में फंस सकते हैं।