मुंबई पुलिस ने झारखंड के जामताड़ा में एक बड़ी कार्रवाई करते हुए 25 वर्षीय मजहर आलम उर्फ इजरायल मियां को गिरफ्तार किया है। दरअसल मजहर ने महज आठवीं पास होने के बावजूद दो साल के भीतर ही साइबर ठगी का एक करोड़ों रुपये का साम्राज्य खड़ा कर लिया था। पुलिस ने आरोपी को पकड़कर देश के 10 राज्यों में फैले उसके मजबूत नेटवर्क का खुलासा किया है। मजहर की गिरफ्तारी ने एक बार फिर डिजिटल सुरक्षा में बड़े पैमाने पर मौजूद खामियों को उजागर किया है।
दरअसल झारखंड का जामताड़ा एक बार फिर साइबर अपराधों के केंद्र के रूप में सुर्खियों में आया है। जानकारी के अनुसार मजहर आलम, फुकबांदी गांव का रहने वाला है। उसने शुरुआत में छोटे-मोटे फ्रॉड किए हैं। उसने ठगी के दांव-पेंच अपने एक रिश्तेदार से सीखे थे, जो पहले ही मकोका (MCOCA) कानून के तहत जेल जा चुका है। जमानत पर बाहर आने के बाद, मजहर ने अपना खुद का एक संगठित सिंडिकेट बनाया। यह सिंडिकेट इतना प्रभावी था कि उसने कम समय में ही देश के 10 अलग-अलग राज्यों में अपना जाल फैला दिया।
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कैसे करता था यह काम?
दरअसल मजहर का काम करने का तरीका किसी पेशेवर सॉफ्टवेयर इंजीनियर से कम नहीं था। वह बेहद शातिर तरीके से लोगों को अपने जाल में फंसाता था। उसकी सबसे पहली चाल हनीट्रैप पर आधारित थी, जिसमें वह सर्च इंजन ऑप्टिमाइजेशन (SEO) का इस्तेमाल करता था। गूगल पर विभिन्न बैंकों के फर्जी ‘क्रेडिट कार्ड हेल्पलाइन’ नंबर डाले जाते थे। जब कोई जरूरतमंद व्यक्ति इंटरनेट पर मदद के लिए इन नंबर्स को खोजता, तो मजहर के फर्जी नंबर ही सामने आते थे।
खुद को बैंक अधिकारी बताता था
हेल्पलाइन नंबर पर संपर्क करने वाले पीड़ितों को वह खुद को बैंक अधिकारी बताता था। बातचीत के दौरान, वह पीड़ित को व्हाट्सएप पर एक ‘Credit Card APK’ नाम की फाइल भेजता था। वह पीड़ितों को यह फाइल डाउनलोड करने के लिए उकसाता था। जैसे ही कोई पीड़ित इस APK फाइल को अपने फोन में डाउनलोड करता था, उसके फोन का पूरा एक्सेस यानी कंट्रोल मजहर के पास चला जाता था। यह एक खतरनाक मालवेयर था, जो फोन को पूरी तरह से हैक कर लेता था।
OTP को सीधे मजहर को भेज देता था
यह मालवेयर सिर्फ डेटा चुराकर नहीं रुकता था, बल्कि यह एक और शातिर काम करता था। यह कॉल फॉरवर्डिंग के जरिए पीड़ित के फोन पर आने वाले वन टाइम पासवर्ड (OTP) को सीधे मजहर को भेज देता था। इस वजह से पीड़ित को अपने बैंक खाते से हो रहे अवैध लेनदेन की भनक तक नहीं लगती थी। ओटीपी मिलने के बाद मजहर आसानी से पीड़ितों के खातों से पैसे निकाल लेता था या उनका इस्तेमाल ऑनलाइन खरीदारी के लिए करता था।
ठगी किए गए पैसों को ठिकाने लगाने के लिए मजहर ने एक और तरीका इजाद किया था, जिसे मनी लॉन्ड्रिंग कहा जाता है। वह चोरी किए गए डेटा से अमेजॉन और फ्लिपकार्ट जैसे ई-कॉमर्स प्लेटफॉर्म पर महंगे उत्पाद खरीदता था। इसके बाद वह इन उत्पादों को फर्जी मर्चेंट अकाउंट्स के जरिए बेचकर पैसों को ‘क्लीन’ करता था। इस तरह वह अवैध कमाई को वैध दिखाने की कोशिश करता था।
साइबर ठगी से कमाए गए करोड़ों रुपयों से मजहर ने जामताड़ा में एक आलीशान बंगला बनवाया। उसने करीब 30 लाख रुपये का एक फ्रेंचाइजी शोरूम भी खोला। इसके अलावा, वह महंगी गाड़ियां खरीदकर लग्जरी लाइफस्टाइल जीता था। उसकी जीवनशैली किसी बड़े बिजनेसमैन जैसी हो गई थी और आसपास के लोग उसकी तेजी से बढ़ती संपत्ति पर हैरान थे।
मजहर का यह डिजिटल लूट का खेल तब बेनकाब हुआ जब मुंबई के कफ परेड पुलिस स्टेशन में एक शिकायत दर्ज की गई। असिस्टेंट पुलिस इंस्पेक्टर (API) अमित देवकर और उनकी टीम ने इस शिकायत पर गहन तकनीकी जांच शुरू की। पुलिस टीम ने 10 दिनों तक झारखंड में डेरा डाले रखा और आखिरकार कड़ी मशक्कत के बाद मजहर को दबोच लिया।
गिरफ्तारी से बचने के लिए मजहर बेहद सतर्क रहता था। जांच में पता चला है कि उसने अब तक 94 अलग-अलग सिम कार्ड्स का इस्तेमाल किया था। पुलिस को उसके पास से कई मोबाइल फोन, एडमिन पैनल का एक्सेस और क्रेडिट कार्ड डेटा की भारी-भरकम शीट मिली हैं। इन सबूतों से पता चलता है कि उसका नेटवर्क कितना बड़ा और व्यवस्थित था।
मुंबई पुलिस की जांच में अब तक देश के 10 राज्यों से जुड़ी 36 से ज्यादा शिकायतें सीधे तौर पर मजहर आलम से जुड़ी पाई गई हैं। पुलिस ने नागरिकों को आगाह किया है कि वे किसी भी अनजान व्यक्ति द्वारा भेजी गई APK फाइल को अपने फोन में इंस्टॉल न करें। इसके साथ ही, गूगल पर मिलने वाले हेल्पलाइन नंबरों की आधिकारिक वेबसाइट या बैंक से सीधे संपर्क करके पुष्टि जरूर करें, ताकि साइबर ठगी से बचा जा सके।