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1 या 2 अप्रैल? चैत्र पूर्णिमा की सही डेट जानिए, नहीं तो चूक जाएंगे शुभ समय

Written by:Bhawna Choubey
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हिंदू नववर्ष की पहली पूर्णिमा यानी चैत्र पूर्णिमा को लेकर इस बार लोगों में भ्रम है 1 या 2 अप्रैल? जानिए सही तारीख, पूजा का शुभ समय, हनुमान जन्मोत्सव का महत्व और कैसे मिलेगा व्रत-पूजा का पूरा फल।
1 या 2 अप्रैल? चैत्र पूर्णिमा की सही डेट जानिए, नहीं तो चूक जाएंगे शुभ समय

हिंदू नववर्ष की शुरुआत के बाद आने वाली पहली पूर्णिमा यानी चैत्र पूर्णिमा का विशेष धार्मिक महत्व होता है। इस दिन को लेकर हर साल श्रद्धालुओं में उत्साह रहता है, लेकिन इस बार तिथि को लेकर थोड़ा भ्रम पैदा हो गया है। 1 अप्रैल और 2 अप्रैल दोनों दिन पूर्णिमा पड़ने से लोग समझ नहीं पा रहे कि व्रत और पूजा किस दिन करें।

यही वजह है कि सही जानकारी होना बहुत जरूरी है। क्योंकि पूजा और व्रत का फल तभी मिलता है जब वह सही तिथि और मुहूर्त में किया जाए। खास बात यह भी है कि इसी दिन हनुमान जन्मोत्सव मनाया जाता है, जिससे इसका महत्व और बढ़ जाता है।

चैत्र पूर्णिमा 2026 की सही तिथि क्या है

दृक पंचांग के अनुसार चैत्र पूर्णिमा तिथि की शुरुआत 1 अप्रैल 2026 को सुबह 7 बजकर 6 मिनट पर हो रही है और इसका समापन 2 अप्रैल 2026 को सुबह 7 बजकर 41 मिनट पर होगा। हिंदू धर्म में किसी भी व्रत या त्योहार को मनाने के लिए उदयातिथि को आधार माना जाता है। यानी जिस दिन सूर्योदय के समय पूर्णिमा तिथि होती है, वही दिन मान्य होता है। इस नियम के अनुसार चैत्र पूर्णिमा 2 अप्रैल 2026, गुरुवार को मनाई जाएगी। इसलिए अगर आप व्रत रख रहे हैं या पूजा करना चाहते हैं, तो 2 अप्रैल का दिन सबसे सही और शुभ माना जाएगा।

चैत्र पूर्णिमा 2026 के शुभ मुहूर्त

इस दिन पूजा के लिए अलग-अलग मुहूर्त बताए गए हैं, जिनमें पूजा करने से अधिक फल मिलता है। ब्रह्म मुहूर्त सुबह 4 बजकर 38 मिनट से 5 बजकर 24 मिनट तक रहेगा। यह समय ध्यान और पूजा के लिए सबसे अच्छा माना जाता है। विजय मुहूर्त दोपहर 2 बजकर 30 मिनट से 3 बजकर 20 मिनट तक रहेगा, जो किसी भी शुभ कार्य के लिए अनुकूल माना जाता है। गोधूलि मुहूर्त शाम 6 बजकर 38 मिनट से 7 बजकर 1 मिनट तक रहेगा, जो संध्या पूजा के लिए उत्तम है। निशिता मुहूर्त रात 12 बजकर 1 मिनट से 12 बजकर 47 मिनट तक रहेगा, जो विशेष साधना के लिए महत्वपूर्ण होता है। इन मुहूर्तों में पूजा करने से विशेष पुण्य प्राप्त होता है और मनोकामनाएं पूरी होने की मान्यता है।

चैत्र पूर्णिमा का धार्मिक महत्व

चैत्र पूर्णिमा को भक्ति, दान और साधना का दिन माना जाता है। इस दिन भगवान विष्णु और माता लक्ष्मी की पूजा करने से घर में सुख-समृद्धि आती है और जीवन में सकारात्मक ऊर्जा बढ़ती है।

इस दिन का एक और खास महत्व है हनुमान जन्मोत्सव। मान्यता है कि हनुमान जी का जन्म इसी दिन हुआ था। इसलिए इस दिन हनुमान जी की पूजा करने से भय, संकट और नकारात्मक शक्तियों से रक्षा होती है।

चैत्र पूर्णिमा 2026 पर अगर सच्चे मन से पूजा की जाए, तो जीवन में शांति और सफलता मिलती है। यही कारण है कि इस दिन स्नान-दान और पूजा-पाठ की परंपरा सदियों से चली आ रही है।

चैत्र पूर्णिमा पर क्या करें

इस दिन सुबह जल्दी उठकर स्नान करना चाहिए और सूर्य देव को अर्घ्य देना चाहिए। इसके बाद घर या मंदिर को साफ करके पूजा की तैयारी करनी चाहिए।
एक चौकी पर लाल कपड़ा बिछाकर भगवान विष्णु और माता लक्ष्मी की प्रतिमा स्थापित करें। धूप, दीप, फूल और नैवेद्य अर्पित करें। घी का दीपक जलाकर मंत्रों का जाप करें। पंचामृत, फल और पंजीरी का भोग लगाकर कथा का पाठ करें। अंत में प्रसाद बांटें और जरूरतमंद लोगों को दान दें। इससे पुण्य की प्राप्ति होती है।

Disclaimer- यहां दी गई सूचना सामान्य जानकारी के आधार पर बताई गई है। इनके सत्य और सटीक होने का दावा MP Breaking News न्यूज़ नहीं करता।

Bhawna Choubey
लेखक के बारे में
मुझे लगता है कि कलम में बहुत ताकत होती है और खबरें हमेशा सच सामने लाती हैं। इसी सच्चाई को सीखने और समझने के लिए मैं रोज़ाना पत्रकारिता के नए पहलुओं को सीखती हूँ। View all posts by Bhawna Choubey
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