मंदसौर जिले के लदुना स्थित शासकीय सांदीपनि विद्यालय में सोमवार को छात्रों ने ऐसा हंगामा किया कि लदुना-सीतामऊ मार्ग करीब दो घंटे तक थम गया। दरअसल, विद्यालय के प्रभारी प्राचार्य अजीत त्रिपाठी के स्थानांतरण के विरोध में स्कूल के छात्र-छात्राएं सड़क पर उतर आए और बैठकर प्रदर्शन करने लगे। छात्रों का कहना है कि अजीत त्रिपाठी सर के आने के बाद स्कूल में पढ़ाई और अनुशासन दोनों बेहतर हुए हैं। इसी वजह से वे उनके तबादले का विरोध कर रहे हैं।
विद्यालय के छात्रों को जैसे ही यह जानकारी मिली कि उनके प्रिय प्रभारी प्राचार्य अजीत त्रिपाठी को सांदीपनि विद्यालय से हटाया जा रहा है, वे आक्रोशित हो उठे। आक्रोशित छात्रों ने बिना किसी देरी के एकजुट होकर विरोध का बिगुल फूंक दिया। उन्होंने सीधे विद्यालय के बाहर लदुना-सीतामऊ मुख्य मार्ग पर मोर्चा संभाल लिया। देखते ही देखते सड़क पर वाहनों की लंबी कतारें लग गईं, क्योंकि छात्रों ने पूरी सड़क पर चक्काजाम कर दिया था। इस दौरान छात्र प्रशासन के खिलाफ जमकर नारेबाजी करते रहे, जिससे पूरा इलाका गूंज उठा। उनकी मांग सिर्फ एक थी– अजीत त्रिपाठी का तबादला रोका जाए और उन्हें सांदीपनि विद्यालय में ही बनाए रखा जाए।
छात्रों ने गिनाईं अजीत त्रिपाठी की उपलब्धियां
छात्रों का तर्क था कि अजीत त्रिपाठी के प्रभारी प्राचार्य बनने के बाद से विद्यालय की पूरी तस्वीर बदल गई थी। उनके नेतृत्व में शैक्षणिक व्यवस्था में अभूतपूर्व सुधार आया था। पहले जहां कक्षाओं में अव्यवस्था का माहौल रहता था, वहीं अब अनुशासन स्थापित हो चुका था। पढ़ाई का माहौल भी बेहद सकारात्मक बन गया था, जिससे छात्रों को बेहतर शिक्षा मिल पा रही थी। छात्रों ने जोर देकर कहा कि ऐसे कर्मठ और समर्पित प्राचार्य का तबादला विद्यालय के भविष्य के साथ खिलवाड़ होगा। वे किसी भी कीमत पर यह तबादला स्वीकार करने को तैयार नहीं थे। छात्रों ने यह भी बताया कि अजीत त्रिपाठी ने सिर्फ पढ़ाई ही नहीं, बल्कि विद्यालय के अन्य गतिविधियों में भी सुधार किया था, जिससे छात्रों का सर्वांगीण विकास हो रहा था।
छात्रों के हगामे सूचना मिलते ही पहुंचे प्रशासनिक अधिकारी
सड़क जाम और हंगामे की सूचना मिलते ही स्थानीय प्रशासन में हड़कंप मच गया। सीतामऊ थाना प्रभारी अपनी टीम के साथ तत्काल मौके पर पहुंचे। उनके साथ तहसीलदार मोहित सिनम और अन्य प्रशासनिक अधिकारी भी आनन-फानन में घटनास्थल पर पहुंच गए। अधिकारियों ने सबसे पहले छात्रों को समझाने-बुझाने का प्रयास किया। उन्होंने छात्रों से सड़क से जाम हटाने और शांति बनाए रखने की अपील की। काफी मान-मनौवल के बाद छात्रों ने मुख्य मार्ग से जाम हटा लिया, जिससे आवागमन बहाल हो सका। हालांकि, छात्रों का गुस्सा शांत नहीं हुआ था। वे सड़क से हटकर विद्यालय परिसर के बाहर ही अपनी नारेबाजी और विरोध प्रदर्शन जारी रखे हुए थे।






