भारतीय जनता पार्टी की पश्चिम बंगाल इकाई 2026 के विधानसभा चुनावों से पहले अपने संगठनात्मक नेटवर्क को मजबूत करने के लिए डिजिटल ऑडिट का दूसरा चरण शुरू करने जा रही है। इस अभियान का मुख्य उद्देश्य फर्जी कार्यकर्ताओं को हटाना, बढ़ा-चढ़ाकर बताए गए आंकड़ों पर अंकुश लगाना और बूथ स्तर पर प्रभावी नियंत्रण स्थापित करना है। पार्टी सूत्रों के अनुसार, लगभग 1.5 लाख पदाधिकारियों ने अपने फोटोयुक्त मतदाता पहचान पत्र एक केंद्रीकृत डिजिटल प्लेटफॉर्म पर अपलोड किए हैं, जिनका सत्यापन चल रहा है।
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पहला चरण, जो बूथ और मंडल स्तर के पदाधिकारियों की आवासीय और मतदाता सूची संबंधी प्रामाणिकता की जांच पर केंद्रित था, पहले ही पूरा हो चुका है। इस प्रक्रिया में एक केंद्रीय लिंक के माध्यम से प्रत्येक पदाधिकारी से उनके मतदाता पहचान पत्र की तस्वीर अपलोड करने को कहा गया था। सत्यापन के दौरान कई क्षेत्रों, खासकर जहां भाजपा की उपस्थिति कमजोर रही है, वहां फर्जी सूचियों और विसंगतियों का पता चला है।
मोबाइल ऐप की शुरुआत
दूसरा चरण पांच अगस्त को एक प्रशिक्षण शिविर में मोबाइल ऐप की शुरुआत के साथ शुरू होगा। इस ऐप के जरिए केंद्रीय पर्यवेक्षक और राज्य के नेता बूथ और मंडल स्तर के पदाधिकारियों का वास्तविक समय में सत्यापन करेंगे। एक वरिष्ठ नेता ने बताया कि यह अभियान संगठन में दशकों से चली आ रही संख्या बढ़ाने और गुटबाजी की प्रथा को समाप्त करने के लिए महत्वपूर्ण है।
मजबूत संगठनात्मक ढांचा तैयार
प्रदेश भाजपा अध्यक्ष समिक भट्टाचार्य ने कहा, “हम जमीनी स्तर से आने वाले आंकड़ों की पुष्टि के लिए भौतिक और डिजिटल दोनों तरह से सत्यापन कर रहे हैं।” यह कदम पार्टी को 2026 के चुनावों में ममता बनर्जी के नेतृत्व वाली तृणमूल कांग्रेस के खिलाफ मजबूत संगठनात्मक ढांचा तैयार करने में मदद करेगा।