केरल की राजनीति में एक बड़ा विवाद खड़ा हो गया है, जिसके केंद्र में केंद्रीय मंत्री और तिरुवनंतपुरम की नेमम सीट से भाजपा उम्मीदवार राजीव चंद्रशेखर हैं। कांग्रेस पार्टी ने उन पर अपने चुनावी हलफनामे में एक बेहद महंगी संपत्ति की जानकारी छिपाने का गंभीर आरोप लगाया है और इस मामले को लेकर चुनाव आयोग का दरवाजा खटखटाया है।
कांग्रेस का दावा है कि चंद्रशेखर ने बेंगलुरु के पॉश इलाके कोरमंगला में स्थित अपनी एक विशाल संपत्ति का खुलासा नहीं किया है। यह संपत्ति 1.07 एकड़ भूमि पर बने लगभग 49,000 वर्ग फीट के बंगले की है। पार्टी के अनुसार, सिर्फ जमीन की अनुमानित कीमत ही करीब 200 करोड़ रुपये हो सकती है।
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नामांकन से ठीक पहले टैक्स भुगतान पर उठे सवाल
कांग्रेस ने अपने आरोपों को पुख्ता करने के लिए कुछ तथ्य भी सामने रखे हैं। पार्टी ने दावा किया कि इस संपत्ति का प्रॉपर्टी टैक्स 17 मार्च को चुकाया गया, जो कि नामांकन दाखिल करने की तारीख से ठीक पहले था। यह भी आरोप लगाया गया है कि चंद्रशेखर ने 2024 के अपने हलफनामे में इसी पते को अपना निवास स्थान बताया था, लेकिन इस बार संपत्ति के तौर पर इसका कोई जिक्र नहीं किया।
इन आरोपों के बाद कांग्रेस ने चुनाव आयोग से तत्काल हस्तक्षेप की मांग की है। पार्टी का कहना है कि यह जनप्रतिनिधित्व कानून का सीधा उल्लंघन है। उन्होंने मांग की है कि अगर कोई उम्मीदवार जानबूझकर अपनी संपत्ति का ब्योरा छिपाता है, तो उसके खिलाफ सख्त कार्रवाई होनी चाहिए और जरूरत पड़ने पर उसे चुनाव लड़ने के लिए अयोग्य घोषित किया जाना चाहिए।
चंद्रशेखर ने घोषित की है 93 करोड़ की संपत्ति
यह विवाद ऐसे समय में सामने आया है जब राजीव चंद्रशेखर नेमम सीट पर एक कड़े मुकाबले में हैं, जहां उनका सामना सीपीएम के वी शिवनकुट्टी और कांग्रेस के केएस सबरीनाधन से है।
अगर उनके द्वारा दाखिल किए गए हलफनामे पर नजर डालें तो, राजीव चंद्रशेखर ने अपनी कुल संपत्ति 93 करोड़ रुपये से अधिक बताई है। इसमें उनके पास 78.81 करोड़ रुपये की चल संपत्ति और 15.07 करोड़ रुपये की अचल संपत्ति है। उनकी पत्नी के पास भी 18.10 करोड़ रुपये की संपत्ति है। हालांकि, उन पर 107 करोड़ रुपये से ज्यादा का कर्ज भी है। उनकी घोषित वार्षिक आय लगभग 92.91 लाख रुपये है। उनके पास 3.58 करोड़ रुपये के गहने और 1942 मॉडल की एक विंटेज मोटरसाइकिल भी है।
फिलहाल, इन गंभीर आरोपों पर राजीव चंद्रशेखर या भारतीय जनता पार्टी की ओर से कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया नहीं आई है। अब सभी की निगाहें चुनाव आयोग पर टिकी हैं कि वह इस शिकायत पर क्या कदम उठाता है।