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CBSE तीन भाषा नीति पर कांग्रेस का विरोध, दिग्विजय सिंह ने की रोक लगाने की मांग, PM नरेंद्र मोदी को लिखा पत्र 

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1 जुलाई से कक्षा 9वीं में सीबीएसई 3 भाषा नीति लागू होने जा रहा है। जिसे लेकर वरिष्ठ कांग्रेस नेता दिग्विजय सिंह ने चिंता जताई है। पीएम नरेंद्र मोदी को पत्र लिखा है। इस पॉलिसी पर रोक लगाने की मांग की है। 

सीबीएसई की तीन भाषा नीति (CBSE 3 Language Policy) को लेकर लगातार विरोध जारी है। कांग्रेस ने भी इस पॉलिसी के अनिवार्य कार्यान्वयन पर सवाल उठाए है। पार्टी के वरिष्ठ नेता और शिक्षा पर संसदीय स्थाई समिति के अध्यक्ष दिग्विजय सिंह (Digvijay Singh) ने इस मामले को लेकर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को पत्र लिखा है। जिसमें उन्होंने केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड द्वारा सत्र के बीच कक्षा 9वी में अनिवार्य रूप से इस नीति को लागू करने पर चिंता जताई है। साथ ही इसे रोकने का आग्रह भी किया है।

दिग्विजय सिंह ने बताया कि उन्होंने छात्रों के अभिभावकों से मुलाकात की और इस मामले पर चर्चा की है। अभिभावकों द्वारा साइन किए गए रिप्रेजेंटेशन को भी उन्होंने पत्र के साथ अटैच किया है। उन्होंने पत्र में लिखा कि, “सीबीएसई की गवर्निंग बॉडी ने दिसंबर 2025 में अपनी एक बैठक में स्कूल एनसीईआरटी द्वारा भाषाओं की टेक्स्टबुक जारी होने तक मौजूदा पढ़ाई की स्कीम को जारी रखने की सिफारिश को मंजूर किया था। लेकिन गवर्निंग बॉडी के फैसले के बावजूद से भी इसी ने 15 मई 2026 को एक सर्कुलर जारी करते हुए 1 जुलाई 2026 से कक्षा 9 में तीसरी भाषा की पढ़ाई लागू करने का निर्देश दिया।”

आगे वरिष्ठ कांग्रेस नेता ने कहा कि, “एनसीईआरटी ने अभी तक भाषा की ग्रेड टेक्सबुक भी जारी नहीं की है। इसीलिए सीबीएसई ने एनसीईआरटी की ग्रेड  6 की टेक्सबुक इस्तेमाल करने की सिफारिश की है। यह स्पष्ट नहीं किया है कि बोर्ड ने फैसले को कैसे और क्यों पलट दिया। इससे से देश के हजारों स्कूलों की अकादेमिक प्लानिंग को खतरा है।”

OSM जैसी समस्या पैदा हो सकती है- दिग्विजय सिंह 

दिग्विजय सिंह ने पॉलिसी को अचानक लागू करने को लेकर चिंता जताई है। ऑन स्क्रीन मार्किंग सिस्टम का उदाहरण भी दिया है। उन्होंने कहा  कि, “बिना टीचर, टेक्स्टबुक और ट्रांजिशन टाइम के कई गंभीर समस्याएं उत्पन्न हो सकती है। OSM को जल्दी बाजी में लागू करने से काफी अफरा-तफरी मची। लाखों छात्रों पर बुरा असर पड़ा।”

दक्षिण और उत्तर-पूर्वी छात्रों को हो सकती है परेशानी 

दिग्विजय सिंह का कहना है कि दक्षिण और उत्तर पूर्वी राज्यों के छात्रों के लिए यह नीति सबसे अधिक मुश्किल हो सकती है। यहाँ हिंदी बोली नहीं जाती और स्थानीय आदिवासी भाषाएं सीबीएसई की मान्यता प्राप्त भाषाओं की लिस्ट में शामिल नहीं हो सकती। कई स्कूलों में संस्कृत पसंदीदा तीसरी भाषा के तौर पर उभर रही है। लेकिन सही संस्कृत टीचरों और सही किताबों की कमी के कारण इस भाषा को बढ़ावा देने का मकसद भी खत्म हो सकता है।

15 जुलाई को आ सकता है सुप्रीम कोर्ट का फैसला 

सीबीएसई 3 भाषा पॉलिसी का मामला अभी भी सुप्रीम कोर्ट में है। 15 जुलाई को कोर्ट अपना फैसला सुना सकता है। लेकिन बोर्ड 1 जुलाई से इस पॉलिसी को लागू करने जा रहा है। जिसे लेकर दिग्विजय सिंह ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से तुरंत और हमदर्दी के साथ विचार करने का अनुरोध किया है।

Manisha Kumari Pandey
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