डिंडौरी जिले में राष्ट्रीय बाल स्वास्थ्य कार्यक्रम (आरबीएसके) के तहत एक बार फिर नौ नन्हीं जिंदगियों को बेहतर कल की उम्मीद मिली है। गंभीर बीमारियों से जूझ रहे इन नौ बच्चों को अब विशेषज्ञ चिकित्सा सुविधा उपलब्ध कराने के उद्देश्य से जबलपुर के विभिन्न प्रतिष्ठित अस्पतालों में भेजा गया है। यह समूचा उपचार पूर्णतः निःशुल्क होगा, जिसका समस्त खर्च शासन द्वारा वहन किया जाएगा, जिससे आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों को बड़ी राहत मिली है।
मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी (सीएमएचओ) डॉ. मनोज पांडेय ने इस महत्वपूर्ण पहल के विषय में विस्तार से जानकारी देते हुए बताया कि इन बच्चों की पहचान जिले भर में संचालित आंगनबाड़ी केंद्रों और स्कूलों में नियमित रूप से आयोजित किए जाने वाले स्वास्थ्य परीक्षण शिविरों के दौरान की गई थी। स्वास्थ्य विभाग की समर्पित टीमों द्वारा इन शिविरों में बच्चों का गहन स्वास्थ्य परीक्षण किया जाता है, जिसके परिणामस्वरूप विभिन्न बीमारियों के प्रारंभिक लक्षण सामने आते हैं। इन नौ बच्चों में बीमारियों की गंभीरता को देखते हुए, उन्हें तत्काल विशेषज्ञ चिकित्सा सुविधा उपलब्ध कराने के लिए जबलपुर के उच्च स्तरीय चिकित्सा संस्थानों में रेफर करने का निर्णय लिया गया, ताकि उन्हें समय पर और समुचित उपचार मिल सके।
गंभीर बीमारियों से जूझ रहे नौ बच्चों का जबलपुर में होगा विशेषज्ञ उपचार
डॉ. पांडेय के अनुसार, जबलपुर रेफर किए गए कुल नौ बच्चों में से तीन बच्चे जन्मजात हृदय रोग जैसी गंभीर एवं जटिल समस्या से ग्रसित हैं। जन्मजात हृदय रोग एक ऐसी स्थिति है जिसमें हृदय की संरचना में जन्म से ही असामान्यताएं होती हैं, जिसके लिए विशेषीकृत उपचार की आवश्यकता पड़ती है। इसी प्रकार, तीन अन्य बच्चे मानसिक एवं विकास संबंधी विभिन्न प्रकार की समस्याओं से पीड़ित हैं, जिनके समुचित विकास और बेहतर भविष्य के लिए विशेष देखभाल और चिकित्सा हस्तक्षेप की आवश्यकता है। शेष तीन बच्चों को कटे-फटे होंठ एवं तालु (क्लेफ्ट लिप/पैलेट) की समस्या है, जो न केवल उनके शारीरिक स्वास्थ्य बल्कि सामाजिक और भावनात्मक विकास को भी प्रभावित करती है, और जिसे शल्य चिकित्सा के माध्यम से ठीक किया जा सकता है। ये सभी नौ बच्चे डिंडौरी जिले के विभिन्न ग्रामीण एवं शहरी क्षेत्रों के निवासी हैं, जो अपनी-अपनी बीमारियों से जूझ रहे थे।
विशेषज्ञ डॉक्टरों की निगरानी में होगा बच्चों का उपचार
सीएमएचओ डॉ. मनोज पांडेय ने आश्वस्त किया कि जबलपुर में इन बच्चों को उनकी विशिष्ट बीमारियों के अनुरूप विशेषज्ञ चिकित्सकों की देखरेख में संबंधित अस्पतालों में भर्ती कराया जाएगा। यहाँ उनकी आवश्यक जाँचें, जटिल ऑपरेशन और संपूर्ण उपचार प्रक्रिया पूरी तरह से निःशुल्क संपन्न होगी। जिला स्वास्थ्य विभाग इस पूरी उपचार प्रक्रिया की लगातार और बारीकी से निगरानी करेगा, ताकि बच्चों को सर्वोत्तम संभव चिकित्सा मिल सके। साथ ही, विभाग बच्चों के परिजनों को हरसंभव सहायता और सहयोग उपलब्ध कराएगा, ताकि उन्हें किसी भी प्रकार की असुविधा या परेशानी का सामना न करना पड़े और वे अपने बच्चों के उपचार पर पूरी तरह ध्यान केंद्रित कर सकें।

राष्ट्रीय बाल स्वास्थ्य कार्यक्रम का उद्देश्य
डॉ. मनोज पांडेय ने राष्ट्रीय बाल स्वास्थ्य कार्यक्रम (RBSK) के व्यापक उद्देश्यों पर प्रकाश डालते हुए बताया कि इस कार्यक्रम का मुख्य ध्येय जन्म से लेकर अठारह वर्ष तक की आयु के बच्चों में होने वाले जन्मजात विकारों, विभिन्न प्रकार की बीमारियों, पोषण संबंधी कमियों और विकास संबंधी समस्याओं की समय रहते पहचान करना और उनका निःशुल्क एवं प्रभावी उपचार सुनिश्चित करना है। यह कार्यक्रम विशेष रूप से आर्थिक रूप से कमजोर और वंचित परिवारों के लिए एक वरदान साबित हो रहा है, क्योंकि इसके माध्यम से उन्हें अपने बच्चों के महंगे उपचार की चिंता से मुक्ति मिल रही है और बच्चों को समय पर उत्कृष्ट स्वास्थ्य सेवाएँ उपलब्ध हो रही हैं, जिससे उनके जीवन की गुणवत्ता में उल्लेखनीय सुधार आ रहा है और वे एक स्वस्थ जीवन जीने की दिशा में अग्रसर हो रहे हैं।
स्वास्थ्य विभाग ने जिले के समस्त अभिभावकों से यह भावुक अपील की है कि वे अपने बच्चों का नियमित स्वास्थ्य परीक्षण अवश्य कराएं। ऐसा करने से किसी भी संभावित गंभीर बीमारी की पहचान प्रारंभिक अवस्था में ही की जा सकेगी और उसका समय रहते प्रभावी इलाज सुनिश्चित किया जा सकेगा, जिससे बच्चों का भविष्य सुरक्षित और स्वस्थ बना रहेगा। यह एक सामूहिक जिम्मेदारी है, जिसमें अभिभावकों की सक्रिय भागीदारी बच्चों के स्वास्थ्य और कल्याण के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण है।
डिंडौरी से प्रकाश मिश्रा की रिपोर्ट






