17, 18 और 19 सितंबर को उज्जैन में युवाओं का हुजूम उमड़ने वाला है। गुरुवार, शुक्रवार और शनिवार को यहां देवास रोड के गीता भवन में युवा धर्म संसद रखी गई है। इस धर्म संसद का हिस्सा देश भर के युवा बनेंगे।अलग-अलग राज्यों से युवा बाबा महाकाल की उज्जैन का रुख करने वाले हैं।
इस सांस्कृतिक कार्यक्रम के दौरान 1700 स्टूडेंट्स के उज्जैन पहुंचने का अंदाजा लगाया गया है। कुछ बड़े चेहरे भी यहां नजर आएंगे। इनमें संघ प्रमुख मोहन भागवत और सीएम मोहन यादव का नाम शामिल है। शोधकर्ता, शिक्षक और धर्माचार्य भी पहुंचेंगे।
युवा संसद में उमड़ेंगे स्टूडेंट्स
उज्जैन में हो रहा ये आयोजन युवा धर्म संसद का छठा साल है। इसके पहले अयोध्या, काशी, मथुरा, हरिद्वार और कांचीपुरम में युवाओं को एकत्रित कर अलग अलग विषयों पर चर्चा की जा चुकी है। इसका आयोजन के मार्गदर्शक आचार्य मिथिलेशनंदिनीशरण महाराज हैं। वो सिद्धपीठ हनुमत निवास अयोध्या के पीठाधीश्वर और संरक्षक हैं और युवा धर्म संसद के लिए सेवाज्ञ संस्थान के साथ काम कर रहे हैं।
पहले दिन चित्रकला प्रदर्शनी
आज इस धर्म संसद का पहला दिन है। देशभर के युवा आज गीता भवन में अपनी उपस्थिति दर्ज करवाते हुए चित्रकला प्रदर्शनी में अपनी अपनी पेंटिंग्स भी लगाएंगे। यहां पुस्तक मेला भी लगेगा। इस मेले में देश भर से 50 पब्लिकेशन ग्रुप शामिल होने वाले हैं। अलग अलग प्रांत के प्रतिनिधि चर्चा करेंगे। आज होने वाले कार्यक्रम में पद्मश्री मूर्तिका अद्वैत चरण गणनायक, उज्जैन सांसद अनिल फिरोजिया सहित अन्य अतिथि शामिल होने वाले हैं। कार्यक्रम की संयोजक अंकिता जायसवाल हैं।
18 और 19 सितंबर के आयोजन
18 सितंबर को उद्घाटन सत्र के बाद धर्म और चारित्रिक उत्तरदायित्व पर व्याख्यान रखा गया है। वहीं संवाद सत्र भी होगा। इसके अलावा अलग-अलग सांस्कृतिक कार्यक्रमों का आयोजन भी किया जाने वाला है। संघ प्रमुख मोहन भागवत इसका हिस्सा बनेंगे।
19 सितंबर को होने वाले समापन सत्र के कार्यक्रम में मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री डॉ मोहन यादव शामिल होने वाले हैं। इस दिन ऋषि कृषि संस्कृति पर चर्चा होगी। इसी के साथ एक सत्र आस्था एवं धर्म स्थलों की भूमिका पर आयोजित किया जाने वाला है।
क्या है उद्येश्य
इसी बात धर्म सभा के उद्देश्य की बात करें तो इसका मूल मंत्र ‘यतो धर्मस्ततो जय:’ रखा गया है। ताकि युवा सनातन संस्कृति से जुड़ सकें। सनातन धर्म को किस तरह से सैद्धांतिक और व्यावहारिक रूप में व्यक्ति के जीवन में उठाता जा सकता है। इस पर विचार करना। युवाओं को संवाद के लिए एक सशक्त मंच प्रदान करना इस कार्यक्रम का मुख्य उद्देश्य है ताकि वो भारतीय संस्कृति और संस्कारों को करीब से जान सकें।






