मध्यप्रदेश में राज्यपाल के पद को लेकर दायर जनहित याचिका पर मंगलवार को हाईकोर्ट में सुनवाई हुई। दरअसल याचिका जवाहरलाल नेहरू कृषि विश्वविद्यालय जबलपुर से सेवानिवृत्त डॉ. एमए खान की ओर से दायर की गई है। वहीं इसमें कहा गया है कि मंगुभाई पटेल का कार्यकाल 8 जुलाई 2026 को पूरा हो चुका है लेकिन नए राज्यपाल की नियुक्ति अब तक नहीं हुई है।
वहीं याचिका पर न्यायमूर्ति आनंद पाठक और न्यायमूर्ति बीपी शर्मा की युगलपीठ ने सुनवाई की। याचिकाकर्ता की ओर से अधिवक्ता अजय रायजादा ने पक्ष रखा। सुनवाई पूरी होने के बाद कोर्ट ने मामले में फैसला सुरक्षित रख लिया है।
जानिए क्या है पूरा मामला?
दरअसल याचिका में बताया गया है कि मंगुभाई पटेल ने 8 जुलाई 2021 को मध्यप्रदेश के राज्यपाल के रूप में पद संभाला था। उनका पांच साल का कार्यकाल 8 जुलाई 2026 को पूरा हो गया। इसके बाद नए राज्यपाल की नियुक्ति को लेकर देरी का मुद्दा हाईकोर्ट में उठाया गया है। साथ ही याचिकाकर्ता की ओर से दलील दी गई कि राज्य में राज्यपाल के पद को लेकर संवैधानिक स्थिति स्पष्ट होनी चाहिए। इसी आधार पर मांग की गई कि जब तक नए राज्यपाल की नियुक्ति नहीं होती तब तक मध्यप्रदेश हाईकोर्ट के मुख्य न्यायाधीश को राज्यपाल का प्रभार सौंपा जाए।
केंद्र सरकार ने अनुच्छेद 156 का दिया हवाला
वहीं मामले में केंद्र सरकार की ओर से एडिशनल सॉलिसिटर जनरल और डिप्टी सॉलिसिटर जनरल भी कोर्ट में पेश हुए। केंद्र की ओर से संविधान के अनुच्छेद 156 का हवाला देते हुए याचिका में की गई मांग का जवाब दिया गया। मामले में केंद्र सरकार की ओर से कहा गया कि नए राज्यपाल की नियुक्ति होने तक पूर्व राज्यपाल पद पर बने रह सकते हैं। सुनवाई के दौरान केंद्र सरकार की ओर से संविधान के अनुच्छेद 156 के प्रावधानों का उल्लेख किया गया। केंद्र की ओर से कोर्ट को बताया गया कि राज्यपाल का कार्यकाल पांच साल का होता है लेकिन इसका मतलब यह नहीं है कि पांच साल पूरे होते ही पद अपने आप खाली हो जाता है। नए राज्यपाल के पद संभालने तक पूर्व राज्यपाल पद पर बने रह सकते हैं।
वंदना झां, जबलपुर






