जबलपुर के निपुण सिंह के लिए मैनहंट इंटरनेशनल 2026 का सफर सिर्फ एक मॉडलिंग प्रतियोगिता नहीं था। श्रीलंका के कोलंबो में फिनाले से एक रात पहले वे झील के किनारे अकेले बैठे थे। मन में कई सवाल थे और आंखों में आंसू।
स्विमवियर राउंड के बाद उन्हें लगा कि यूरोप और अफ्रीका से आए प्रतिभागियों के बीच शायद वे पीछे रह गए हैं। उस समय निपुण ने हेडफोन लगाया और भारत का राष्ट्रगान सुना। कुछ मिनट बाद उनका मन बदला और अगले दिन मंच पर वे पूरे आत्मविश्वास के साथ उतरे।
मैनहंट इंटरनेशनल 2026 में हर राउंड के साथ बढ़ता गया दबाव
फिनाले में निपुण का सफर आसान नहीं था। टॉप-20 में जगह बनाने वाले प्रतिभागियों के नाम घोषित हुए तो उनका नाम 16वें नंबर पर आया। इसके बाद टॉप-10 की घोषणा हुई और निपुण 8वें स्थान पर रहे। यहां से मुकाबला और कठिन हो गया, क्योंकि हर राउंड में प्रतिभागियों को खुद को साबित करना था।
आखिरी दौर तक पहुंचते-पहुंचते मंच पर भारत और फ्रांस के प्रतिनिधि ही बचे थे। दोनों के हाथ जज ने पकड़ रखे थे और विजेता के नाम की घोषणा का इंतजार हो रहा था। कुछ पल बाद फ्रांस के डायलन पालमरीनी का हाथ ऊपर उठा दिया गया। निपुण के लिए यह पल भावुक करने वाला था, लेकिन उन्होंने फर्स्ट रनर-अप की उपलब्धि को मुस्कुराकर स्वीकार किया।
झील किनारे टूट गया था आत्मविश्वास
निपुण के सफर का सबसे भावुक हिस्सा फिनाले से एक रात पहले का रहा। स्विमवियर राउंड के बाद उन्हें अपने प्रदर्शन को लेकर संदेह होने लगा था। दुनिया के अलग-अलग देशों से आए प्रतिभागियों के बीच खड़े होकर खुद की तुलना करना आसान नहीं था। इसी दौरान वे अकेले झील किनारे जाकर बैठ गए।
निपुण के मुताबिक उस समय उन्होंने हेडफोन लगाया और भारत का राष्ट्रगान सुना। इससे उनका ध्यान प्रतियोगिता के दबाव से हटकर अपने देश पर गया। उन्होंने खुद को याद दिलाया कि वे यहां सिर्फ अपने लिए नहीं, बल्कि भारत का प्रतिनिधित्व करने आए हैं।
अलग देशों के प्रतिभागियों के साथ बनी दोस्ती
मैनहंट इंटरनेशनल 2026 में निपुण को सिर्फ प्रतियोगिता का अनुभव नहीं मिला, बल्कि दुनिया के कई देशों के युवाओं से दोस्ती भी हुई। अलग-अलग भाषा और संस्कृति के बीच भी प्रतिभागियों ने एक-दूसरे की मदद की। कई लोगों को अंग्रेजी ठीक से नहीं आती थी इसलिए वे मोबाइल के ट्रांसलेटर की मदद से बातचीत करते थे।






