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MP High Court: प्रमोशन में आरक्षण की 50% सीमा का करना होगा पालन, मुख्य सचिव को व्यक्तिगत रूप से सुनिश्चित करने के निर्देश

मध्य प्रदेश हाईकोर्ट ने प्रमोशन में आरक्षण से जुड़े मामले में कहा कि कर्मचारियों को प्रमोशन के लिए विचार किया जा सकता है, लेकिन आरक्षण की निर्धारित 50 प्रतिशत सीमा का उल्लंघन नहीं होना चाहिए। मुख्य सचिव को इसका पालन सुनिश्चित करने के निर्देश दिए गए हैं।
MP High Court Jabalpur

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मध्य प्रदेश में कर्मचारियों के प्रमोशन में आरक्षण को लेकर हाई कोर्ट ने महत्वपूर्ण निर्देश दिए हैं। कोर्ट ने स्पष्ट किया है कि कर्मचारियों को प्रमोशन देने पर रोक नहीं है, लेकिन इस प्रक्रिया में आरक्षण की निर्धारित 50 प्रतिशत सीमा का सख्ती से पालन करना होगा। हाई कोर्ट ने प्रदेश के मुख्य सचिव को व्यक्तिगत रूप से यह सुनिश्चित करने के निर्देश दिए हैं कि लंबित मामलों में अंतिम फैसला आने तक प्रमोशन में आरक्षण 50 प्रतिशत की सीमा से बाहर न जाए।

जस्टिस विवेक अग्रवाल और जस्टिस विनय सराफ की डिवीजन बेंच ने प्रमोशन में आरक्षण से जुड़ी याचिकाओं पर सुनवाई की।  याचिकाकर्ताओं की ओर से भोपाल की वेटरनरी सर्जन डॉ. स्वाति तिवारी सहित अन्य की तरफ से वरिष्ठ अधिवक्ता मनोज शर्मा ने पक्ष रखा।

प्रमोशन पर रोक नहीं, लेकिन आरक्षण की सीमा का पालन जरूरी

सुनवाई के दौरान राज्य सरकार की ओर से कहा गया कि कर्मचारियों को लगातार प्रमोशन दिए जा रहे हैं। इस पर याचिकाकर्ताओं की तरफ से तर्क दिया गया कि एक बार प्रमोशन हो जाने के बाद संबंधित कर्मचारियों को बाद में पदावनत यानी रिवर्ट करना व्यावहारिक रूप से मुश्किल हो सकता है।

याचिकाकर्ताओं की ओर से आरबी राय मामले का हवाला देते हुए यह भी कहा गया कि कानूनी स्थिति स्पष्ट होने के बावजूद अब तक प्रभावित कर्मचारियों को रिवर्ट नहीं किया गया है।

कोर्ट ने कहा कि कर्मचारियों को प्रमोशन के लिए विचार किए जाने का अधिकार है, लेकिन आरक्षण की निर्धारित सीमा का पालन भी जरूरी है। इसे प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष तरीके से पार नहीं किया जा सकता।

इंद्रा साहनी फैसले का दिया हवाला

डिवीजन बेंच ने सुप्रीम कोर्ट के ऐतिहासिक इंद्रा साहनी बनाम भारत संघ मामले में निर्धारित आरक्षण की 50 प्रतिशत सीमा का उल्लेख किया। कोर्ट ने मुख्य सचिव को निर्देश दिया कि लंबित मामलों में अंतिम निर्णय आने तक प्रमोशन प्रक्रिया में 50 प्रतिशत आरक्षण सीमा का सख्ती से पालन सुनिश्चित किया जाए।

मामले में राज्य सरकार की ओर से महाधिवक्ता प्रशांत सिंह और अतिरिक्त महाधिवक्ता जान्हवी पंडित ने पक्ष रखा। मामले की अगली सुनवाई 1 दिसंबर को होगी।

Atul Saxena
लेखक के बारे में
पत्रकारिता मेरे लिए एक मिशन है, हालाँकि आज की पत्रकारिता ना ब्रह्माण्ड के पहले पत्रकार देवर्षि नारद वाली है और ना ही गणेश शंकर विद्यार्थी वाली, फिर भी मेरा ऐसा मानना है कि यदि खबर को सिर्फ खबर ही रहने दिया जाये तो ये ही सही अर्थों में पत्रकारिता है और मैं इसी मिशन पर पिछले तीन दशकों से ज्यादा समय से लगा हुआ हूँ.... पत्रकारिता के इस भौतिकवादी युग में मेरे जीवन में कई उतार चढ़ाव आये, बहुत सी चुनौतियों का सामना करना पड़ा लेकिन इसके बाद भी ना मैं डरा और ना ही अपने रास्ते से हटा ....पत्रकारिता मेरे जीवन का वो हिस्सा है जिसमें सच्ची और सही ख़बरें मेरी पहचान हैं .... View all posts by Atul Saxena
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