केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान सीबीएसई की ऑन-स्क्रीन मार्किंग (ओएसएम) प्रणाली को लेकर कांग्रेस के निशाने पर आ गए हैं। विपक्षी दल ने उन पर महंगी ओएसएम प्रणाली लागू करने और इस प्रक्रिया में लागत बढ़ने को लेकर गंभीर सवाल उठाए हैं। कांग्रेस का स्पष्ट आरोप है कि बोर्ड पर यह महंगी व्यवस्था थोपी गई है और इस संबंध में उठे सवालों का जवाब केवल शिक्षा मंत्री ही दे सकते हैं।
कांग्रेस महासचिव जयराम रमेश ने इस पूरे प्रकरण पर अपनी बात रखते हुए बताया कि दिसंबर 2024 में हुई सीबीएसई गवर्निंग बॉडी की बैठक में ऑन-स्क्रीन मार्किंग प्रणाली को लागू करने से पड़ने वाले वित्तीय बोझ पर चिंता व्यक्त की गई थी। इसके बावजूद, इस व्यवस्था को आगे बढ़ाया गया, जिससे कई सवाल खड़े हो गए हैं।
जयराम रमेश ने लगाया टेंडर लागत बढ़ने का आरोप
जयराम रमेश ने एक मीडिया रिपोर्ट का हवाला देते हुए दावा किया कि ओएसएम सिस्टम से जुड़े टेंडर की अनुमानित लागत में लगभग 10 करोड़ रुपये की बढ़ोतरी हुई है। उनके अनुसार, सीबीएसई द्वारा शुरुआती चरण में जारी किए गए दो टेंडरों में इस कार्य का मूल्य 28 करोड़ रुपये निर्धारित किया गया था, लेकिन अंतिम वर्क ऑर्डर में यह राशि बढ़कर 38.46 करोड़ रुपये हो गई। कांग्रेस का यह भी आरोप है कि वास्तविक रूप से स्कैन की गई उत्तर पुस्तिकाओं के आधार पर इस कार्य की लागत लगभग 25.39 करोड़ रुपये होनी चाहिए थी, जो जारी किए गए वर्क ऑर्डर की राशि से काफी कम है। यह अंतर वित्तीय अनियमितता की ओर इशारा करता है।
कांग्रेस नेता ने आगे कहा कि शिक्षा संबंधी संसदीय स्थायी समिति की बैठक में 18 वर्षीय व्हिसलब्लोअर सार्थक सिद्धांत की बात सुनने के बाद समिति ने सीबीएसई से खरीद प्रक्रिया से जुड़े कई महत्वपूर्ण सवाल पूछे थे। हालांकि, बोर्ड इन सवालों का कोई संतोषजनक जवाब नहीं दे पाया, जिससे पारदर्शिता पर और भी प्रश्नचिह्न लग गए। रमेश ने सीधे तौर पर आरोप लगाया कि इस पूरे मामले में शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान को जवाब देना चाहिए कि आखिर सीबीएसई को इतनी महंगी ओएसएम प्रणाली अपनाने के लिए क्यों कहा गया।
कांग्रेस ने शिक्षा मंत्री के इस्तीफे की मांग की
कांग्रेस ने इस मामले की निष्पक्ष और स्वतंत्र जांच सुनिश्चित करने के लिए केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान से अपने पद से इस्तीफा देने की मांग की है। जयराम रमेश ने चेतावनी दी कि यदि प्रधान इस्तीफा नहीं देते हैं, तो केंद्र सरकार द्वारा गठित एक सदस्यीय जांच समिति केवल औपचारिकता बनकर रह जाएगी और मामले की सच्चाई सामने नहीं आ पाएगी।
राहुल गांधी ने मामले में सरकार को घेरा
कांग्रेस सांसद राहुल गांधी ने भी इस मुद्दे पर केंद्र सरकार को घेरा है। उन्होंने ओएसएम विवाद के बाद सीबीएसई के शीर्ष अधिकारियों को उनके पदों से हटाए जाने को ‘लीपापोती’ और ‘सच्चाई छिपाने की कोशिश’ करार दिया है। राहुल गांधी ने शिक्षा मंत्री को तत्काल पद से हटाने और पूरे मामले की स्वतंत्र न्यायिक जांच कराने की जोरदार मांग की है।
क्या है ओएसएम विवाद?
हाल के दिनों में सीबीएसई की ऑन-स्क्रीन मार्किंग प्रणाली कई विवादों से घिरी रही है। कुछ कक्षा 12 के छात्रों ने यह दावा किया था कि बोर्ड द्वारा उन्हें उपलब्ध कराई गई उनकी स्कैन की गई उत्तर पुस्तिकाओं की लिखावट उनकी वास्तविक लिखावट से मेल नहीं खा रही थी। इन गंभीर आरोपों के बाद ओएसएम प्रणाली में संभावित गड़बड़ियों और उत्तर पुस्तिकाओं के मिलान को लेकर कई तरह के सवाल खड़े हो गए थे, जिससे छात्रों और अभिभावकों में चिंता का माहौल पैदा हो गया था।
जांच के लिए बनी समिति
मामले को लेकर बढ़ते विवाद और राजनीतिक दबाव के बीच, केंद्र सरकार के कैबिनेट सचिवालय ने 3 जून को ओएसएम प्रणाली की खरीद प्रक्रिया की जांच के लिए एक सदस्यीय समिति के गठन की घोषणा की थी। यह समिति सीबीएसई द्वारा ओएसएम सेवाओं की खरीद, उससे जुड़ी पूरी प्रक्रिया और लगाए गए सभी आरोपों की गहराई से जांच करेगी। समिति की रिपोर्ट आने के बाद ही इस पूरे मामले की वास्तविक स्थिति और अधिक स्पष्ट हो सकेगी, और तभी पता चल पाएगा कि इन आरोपों में कितनी सच्चाई है।






