केंद्र सरकार ने 2027 में प्रस्तावित अगली जनगणना की औपचारिक प्रक्रिया का आगाज कर दिया है। गृह मंत्रालय ने पहले चरण के लिए मकानसूचीकरण और मकानों की गणना (Houselisting and Housing Census) से संबंधित प्रश्नावली को लेकर गजट अधिसूचना जारी की है। 22 जनवरी 2026 को प्रकाशित इस अधिसूचना के साथ ही देश की सबसे बड़ी सांख्यिकीय कवायद की नींव रख दी गई है।
यह पूरी प्रक्रिया जनगणना अधिनियम, 1948 के प्रावधानों के तहत संपन्न होगी। पहले चरण का मुख्य उद्देश्य जनसंख्या गणना से पहले देश भर के सभी भवनों और घरों का एक विस्तृत डेटाबेस तैयार करना है। इसी डेटा के आधार पर जनगणना का अगला चरण संचालित किया जाएगा।
किन-किन जानकारियों का होगा संग्रह?
जारी प्रश्नावली के अनुसार, इस चरण में हर घर और भवन से जुड़ी बुनियादी जानकारी इकट्ठा की जाएगी। इसमें यह देखा जाएगा कि भवन पक्का है या कच्चा, उसका इस्तेमाल आवासीय हो रहा है या व्यावसायिक। साथ ही, मकान की मौजूदा हालत, उसमें बने कमरों की संख्या और स्वामित्व की स्थिति (किराए का या अपना) भी दर्ज की जाएगी।

इसके अलावा, हर परिवार के लिए उपलब्ध मूलभूत सुविधाओं का आकलन किया जाएगा। इसमें पेयजल का मुख्य स्रोत, बिजली की उपलब्धता, शौचालय की सुविधा और उसका प्रकार, रसोईघर की मौजूदगी और खाना पकाने के लिए इस्तेमाल होने वाले ईंधन जैसी महत्वपूर्ण जानकारियां शामिल हैं। गंदे पानी की निकासी की व्यवस्था का विवरण भी लिया जाएगा।
पारिवारिक और निजी संपत्ति का ब्योरा
प्रश्नावली में परिवार के सामाजिक-आर्थिक स्तर को समझने के लिए भी कई सवाल शामिल किए गए हैं। इसमें परिवार के मुखिया का नाम, लिंग, और सामाजिक वर्ग (अनुसूचित जाति/जनजाति या अन्य) की जानकारी ली जाएगी। साथ ही, परिवार के कुल सदस्यों की संख्या और उसमें रहने वाले विवाहित दंपतियों का भी रिकॉर्ड रखा जाएगा।
इस दौरान घरों में मौजूद संपत्ति और संसाधनों का भी डेटा जुटाया जाएगा। इसमें पूछा जाएगा कि परिवार के पास रेडियो, टेलीविजन, इंटरनेट कनेक्शन, मोबाइल, स्मार्टफोन, लैपटॉप या कंप्यूटर जैसी सुविधाएं हैं या नहीं। वाहनों के बारे में भी जानकारी ली जाएगी, जैसे साइकिल, स्कूटर, मोटरसाइकिल या कार।
मोबाइल नंबर क्यों लिया जाएगा?
सरकार ने स्पष्ट किया है कि प्रश्नावली में मोबाइल नंबर का कॉलम भी होगा, लेकिन इसका इस्तेमाल केवल जनगणना से जुड़े कार्यों के लिए संपर्क साधने या जानकारी देने के लिए किया जाएगा। इस नंबर को किसी अन्य प्रशासनिक या व्यावसायिक उद्देश्य के लिए उपयोग नहीं किया जाएगा। मकानसूचीकरण की प्रक्रिया को जनगणना की रीढ़ माना जाता है, क्योंकि इसी के आधार पर देश के लिए भविष्य की नीतियां और विकास योजनाएं तैयार की जाती हैं।





