कर्मचारी पेंशन योजना (EPS-95) के तहत न्यूनतम पेंशन को 1,000 रुपए से बढ़ाकर 7,500 रुपए करने की चर्चा के बीच केंद्र सरकार ने संसद में अपनी मंशा स्पष्ट कर दी है। सरकार ने साफ कहा है कि फिलहाल पेंशन राशि बढ़ाने का कोई प्रस्ताव नहीं है।
दरअल, संसद के मानसून सत्र में दक्षिण दिल्ली से बीजेपी सांसद रामवीर सिंह बिधूड़ी ने सवाल पूछा था कि क्या सरकार न्यूनतम पेंशन बढ़ाने की कोई योजना बना रही है। गुरुवार (13 अगस्त 2026) को लोकसभा में श्रम और रोजगार मंत्रालय ने इस पर लिखित जवाब दिया है। केंद्रीय श्रम और रोजगार राज्य मंत्री ने कहा कि EPS फंड की स्थिरता और भविष्य की देनदारियों को देखते हुए मौजूदा व्यवस्था जारी रहेगी। न्यूनतम पेंशन को फिलहाल 7,500 रुपये करने का कोई फैसला नहीं है।
बता दें कि लंबे समय से EPS-95 राष्ट्रीय संघर्ष समिति (NAC) 7,500 प्रति माह न्यूनतम पेंशन, महंगाई भत्ता (DA) और मुफ्त चिकित्सा सुविधाओं की मांग कर रही है। इसको लेकर कई बार ज्ञापन दिए गए, शांतिपूर्ण प्रदर्शन किए गए, लेकिन बावजूद इसके न्यूनतम पेंशन बढ़ाने पर कोई ठोस फैसला नहीं हुआ है। पेंशनर्स और विभिन्न श्रमिक संगठन का तर्क है कि बढ़ती महंगाई में 1,000 रुपए की राशि सम्मानजनक जीवन जीने के लिए पर्याप्त नहीं है।
इससे पहले फरवरी 2026 में राज्यसभा में महाराष्ट्र से भाजपा सांसद डॉ. मेधा विष्णु कुलकर्णी ने न्यूनतम पेंशन का मुद्दा उठाया था जिस पर लिखित जवाब में श्रम एवं रोजगार राज्य मंत्री शोभा करंदलाजे ने साफ कहा था कि फिलहाल न्यूनतम EPS पेंशन बढ़ाने का कोई अलग प्रस्ताव या समयसीमा तय नहीं की गई है।
EPS-95 क्या है?
- कर्मचारी पेंशन योजना 1995 (EPS-95) एक सामाजिक सुरक्षा योजना है। यह रिटायरमेंट के बाद कर्मचारियों को तय पेंशन देती है।
- इस योजना में नियोक्ता कर्मचारी की सैलरी का 8.33% फंड में जमा करता है, जबकि केंद्र सरकार 1.16% का योगदान देती है। यह योगदान ₹15,000 की अधिकतम सैलरी पर कैप किया गया है।
- यह व्यवस्था 1 सितंबर 2014 से लागू है। 31 मार्च 2026 तक जारी आंकड़ों के अनुसार, देश में EPS के तहत 85,84,604 लाख पेंशनर्स हैं। इस योजना के तहत वित्त वर्ष 2026 तक 15,819.28 करोड़ रुपये की पेंशन दी गई है।






