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सीएम का तोहफा, मानदेय-पेंशन में की वृद्धि, इन कर्मचारियों-पेंशनधारकों को मिलेग लाभ

Written by:Pooja Khodani
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नीतिश कुमार सरकार ने बुजुर्ग, विधवा और दिव्यांगों के पेंशन में भी वृद्धि की है। अब इन पेंशनधारकों को 400 की जगह 1100 रुपए हर महीने मिलेंगे।
सीएम का तोहफा, मानदेय-पेंशन में की वृद्धि, इन कर्मचारियों-पेंशनधारकों को मिलेग लाभ

बिहार विधानसभा चुनाव से पहले नीतीश कुमार सरकार द्वारा अलग अलग वर्गों को सौगातें देने का सिलसिला जारी है।सरकारी कर्मचारियों और पंचायती राज संस्थाओं के प्रतिनिधियों के बाद अब नीतिश कुमार सरकार ने जीविका योजना से जुड़ी महिलाओं और कर्मियों को बड़ा तोहफा दिया है।

राज्य सरकार ने इन कर्मियों का मानदेय दोगुना कर दिया गया है।इन कर्मचारियों के मानदेय वृद्धि की अतिरिक्त राशि राज्य सरकार वहन करेगी।इसके अलावा जीविका दीदियों को अब सस्ती दर पर लोन भी मिलेगा। जीविका स्वयं सहायता समूहों को 3 लाख रुपए से ज्यादा के लोन पर 10 की जगह 7 प्रतिशत की ब्याज देना होगा।वर्तमान में सहायता समूहों में विभिन्न प्रकार के प्रशासनिक, प्रशिक्षण और अन्य कार्यों के लिए 1.40 लाख कर्मचारी कार्यरत हैं।

पेंशन में भी बढ़ोतरी

  • नीतिश कुमार सरकार ने बुजुर्ग, विधवा और दिव्यांगों के पेंशन में भी वृद्धि की है। अब इन पेंशनधारकों को 400 की जगह 1100 रुपए हर महीने मिलेंगे।लाभार्थियों को पेंशन की बढ़ी हुई राशि जुलाई महीने से मिलनी शुरू हो जाएगी।सभी लाभार्थियों के खाते में यह राशि महीने की 10 तारीख को भेजना सुनिश्चित किया जाएगा।
  • इससे 1 करोड़ 9 लाख 69 हजार 255 लाभार्थियों को लाभ मिलेगा।बता दे कि बिहार सरकार द्वारा बुर्जुगों के लिए वृद्धजन पेंशन योजना ,दिव्यांगो के लिए दिव्यांगजन पेंशन योजना और महिलाओं के लिए लक्ष्मीबाई सामाजिक सुरक्षा पेंशन योजना चलाई जा रही है।

बीते दिनों ही बढ़ी थी पंचायती राज संस्थाओं के प्रतिनिधियों की सैलरी

बीते दिनों बिहार सरकार ने मुखिया, उप मुखिया, वार्ड सदस्यों तथा सरपंच, उप सरपंच एवं पंचों के मानदेय में डेढ़ गुना वृद्धि की गई थी। इसके बाद मुखिया को अब हर महीने 5000 की जगह 12,500 रुपये , सरपंच को 5000 की जगह 7500, उप मुखिया और उप सरपंच को 2500 की जगह 3,750 रुपये मिलेंगे।इसी तरह अन्य के मानदेय में वृद्धि की गई।

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खबर वह होती है जिसे कोई दबाना चाहता है। बाकी सब विज्ञापन है। मकसद तय करना दम की बात है। मायने यह रखता है कि हम क्या छापते हैं और क्या नहीं छापते। (पत्रकारिता में 9 वर्षों से सक्रिय, इलेक्ट्रानिक से लेकर डिजिटल मीडिया तक का अनुभव, सीखने की लालसा के साथ हर खबर पर पैनी नजर) View all posts by Pooja Khodani
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