सुप्रीम कोर्ट ने आज मध्यप्रदेश के मंत्री कुंवर विजय शाह के खिलाफ कर्नल सोफिया कुरैशी पर की गई आपत्तिजनक टिप्पणी मामले में सख्त रुख अपनाया है। अदालत ने प्रदेश सरकार को दो सप्ताह के भीतर निर्णय लेने का निर्देश दिया है कि मंत्री के खिलाफ आपत्तिजनक टिप्पणी मामले में मुकदमा चलाने की मंजूरी दी जाए या नहीं।
सुप्रीम कोर्ट की बेंच ने एसआईटी की सीलबंद रिपोर्ट को खोलकर पढ़ा और टिप्पणी की कि निचली अदालत में लंबित इस मामले में राज्य सरकार ने आवश्यक अनुमति अभी तक नहीं दी है, जबकि प्रक्रिया पूरी हो जानी चाहिए थी। अदालत ने कहा, “राज्य सरकार दो हफ्तों में सैंक्शन देने पर विचार करे। अब तक देरी क्यों हुई, इसका जवाब चाहिए।” यदि सरकार सैंक्शन देने से इनकार करती है, तो उसे कारण बताने होंगे।
सुप्रीम कोर्ट ने मध्यप्रदेश सरकार को दिया दो हफ्ते का समय
सुप्रीम कोर्ट ने कर्नल सोफिया कुरैशी पर आपत्तिजनक टिप्पणी करने के आरोप में मंत्री कुंवर विजय शाह के खिलाफ मुकदमा चलाने की मंजूरी देने के मुद्दे पर मध्यप्रदेश सरकार को दो सप्ताह का समय प्रदान किया है। अदालत ने कहा कि अब तक संक्शन न देने से गंभीर सवाल उठते हैं और सरकार को देरी का औचित्य स्पष्ट करना होगा। इस मामले पर अगली सुनवाई दो सप्ताह बाद होगी, जहां राज्य सरकार का फैसला और स्टेटस रिपोर्ट देखी जाएगी।
अदालत ने मंत्री विजय शाह का माफीनामा ठुकराया
सर्वोच्च न्यायालय ने सुनवाई के दौरान मंत्री विजय शाह द्वारा पेश किए गए माफीनामे को भी ठुकरा दिया और कहा है कि अब माफी देने का कोई अर्थ नहीं रहा क्योंकि इसके लिए बहुत देर हो चुकी है। अदालत ने स्पष्ट किया कि ऑनलाइन माफी स्वीकार्य नहीं थी और इससे मामले का गंभीरता से निपटारा नहीं होता।
ये है पूरा मामला
यह विवाद पिछले साल मई में शुरू हुआ था जब मंत्री विजय शाह ने एक सार्वजनिक सभा में ‘ऑपरेशन सिंदूर’ का जिक्र करते हुए कर्नल सोफिया कुरैशी को “आतंकवादियों की बहन” जैसी विवादित टिप्पणी की थी। कर्नल कुरैशी ने ऑपरेशन के दौरान मीडिया ब्रीफिंग दी थी, जिससे वे राष्ट्रीय स्तर पर चर्चित हुई थीं। विजय शाह के उस बयान को साम्प्रदायिक और अपमानजनक माना गया, जिसकी देशभर में प्रतिक्रिया देखी गई। इसके बाद जबलपुर हाईकोर्ट ने स्वत: संज्ञान लेते हुए शाह की भाषा को अमर्यादित बताते हुए एफआईआर दर्ज करने का आदेश दिया था। सुप्रीम कोर्ट ने मई 2025 में शाह की गिरफ्तारी पर अंतरिम रोक लगाई, एसआईटी गठित करने का निर्देश दिया और कहा था कि “पूरे राष्ट्र को शर्मसार किया गया है”। एसआईटी ने अपनी रिपोर्ट सुप्रीम कोर्ट में सीलबंद लिफाफे में जमा की थी।





