कम्युनिस्ट पार्टी ऑफ इंडिया (मार्क्सवादी) ने अमेरिका की ओर से H-1B वीजा शुल्क में भारी वृद्धि के फैसले की कड़े शब्दों में निंदा की है। पार्टी ने इसे अमेरिका की ओर से अपनी व्यापारिक हितों को बढ़ावा देने के लिए जबरदस्ती की रणनीति करार दिया, जो अन्य देशों के हितों की कीमत पर किया जा रहा है। सीपीआई(एम) ने केंद्र सरकार से इस अनुचित और जबरन कदम के खिलाफ दृढ़ रुख अपनाने और अमेरिकी दबाव के आगे न झुकने की मांग की है।

पार्टी के पोलित ब्यूरो ने बयान जारी कर कहा कि अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने H-1B वीजा के लिए 100,000 डॉलर (लगभग 88 लाख रुपये) का वार्षिक शुल्क लागू करने की घोषणा की है, जो 21 सितंबर से प्रभावी होगी। यह कदम भारतीय पेशेवरों पर प्रतिकूल प्रभाव डालेगा। सीपीआई(एम) ने इसे एकतरफा और प्रतिशोधी कदम बताया, जो भारत और अमेरिका के बीच चल रही व्यापार वार्ताओं के समय भारत पर दबाव बनाने के लिए उठाया गया है।

सरकार के रवैये पर भी सवाल

सीपीआई(एम) ने सरकार के रवैये पर भी सवाल उठाए। पार्टी ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने इस मुद्दे पर ठोस जवाब देने के बजाय आत्मनिर्भरता पर अस्पष्ट बयान दिए, जो देश के लिए निराशाजनक और अपमानजनक है। पार्टी ने ईरान के चाबहार बंदरगाह पर अमेरिका द्वारा पुनः प्रतिबंध लगाने को भी भारत पर दबाव की रणनीति का हिस्सा बताया, जो भारत द्वारा संचालित इस परियोजना को प्रभावित करेगा

अमेरिका का दबावपूर्ण रवैया 

सीपीआई(एम) ने मांग की है कि भारतीय सरकार अमेरिका के इस दबावपूर्ण रवैये का डटकर मुकाबला करे और भारतीय पेशेवरों के हितों की रक्षा के लिए निर्णायक कदम उठाएयह कदम हजारों कुशल भारतीय पेशेवरों की आजीविका और उनके परिवारों पर गंभीर प्रभाव डालेगापार्टी ने केंद्र सरकार से अपील की है कि वह भारतीय नागरिकों के अधिकारों और हितों की रक्षा के लिए दृढ़ता से खड़ी हो