शुक्रवार को कांग्रेस कार्य समिति (CWC) की एक महत्वपूर्ण बैठक दिल्ली स्थित पार्टी मुख्यालय ‘इंदिरा भवन’ में होने जा रही है। दोपहर 3 बजे होने वाली इस बैठक की अध्यक्षता कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन करेंगे। इसका मुख्य एजेंडा केंद्र सरकार द्वारा महिला आरक्षण कानून में प्रस्तावित संशोधनों और लोकसभा सीटों के नए परिसीमन की नई प्रक्रिया पर चर्चा करना है।
इसके अलावा पश्चिम एशिया (ईरान-इजरायल-अमेरिका) के मुद्दे पर चर्चा होने की संभावना है। राजनीतिक स्थिति और एलपीजी संकट जैसे कई मुद्दों पर भी चर्चा संभव है। इस बैठक में कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे के अलावा लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी और केसी वेणुगोपाल, जयराम रमेश सहित अन्य बड़े कांग्रेस के नेता हिस्सा लेंगे। 5 राज्यों के विधानसभा चुनाव के बीच और संसद की तीन दिवसीय बैठक से ठीक पहले इस बैठक को बेहद महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
दरअसल, 16 अप्रैल 2026 से शुरू हो रहे संसद के तीन दिवसीय विशेष सत्र को लेकर कांग्रेस अपनी रणनीति तैयार कर रही है। नारी शक्ति वंदन अधिनियम में संशोधन और नए परिसीमन विधेयक का सदन में किस तरह से विरोध या समर्थन किया जाए, बैठक में इस पर भी फोकस रहेगा। संसद के भीतर और बाहर इस मुद्दे को किस तरह उठाया जाए, इस पर भी विचार-विमर्श होगा, ताकि पार्टी अपनी राजनीतिक स्थिति को मजबूत कर सके। पार्टी का तर्क है कि बिना ओबीसी कोटा के महिला आरक्षण अधूरा है और इसे तुरंत लागू करने के बजाय जनगणना के साथ जोड़ना केवल चुनावी और राजनीतिक लाभ लेने की कोशिश है।
विशेष सत्र में पेश होगा बिल
- संसद की तीन दिवसीय बैठक 16,17 और 18 अप्रैल को होगी। संसद में ‘नारी शक्ति वंदन अधिनियम’ में संशोधन का विधेयक और एक अलग परिसीमन विधेयक पेश किया जाएगा। दोनों को संवैधानिक संशोधन के रूप में पारित करना जरूरी होगा। बिल लोकसभा और राज्य विधानसभाओं में महिलाओं को 33 प्रतिशत कोटा देता है। बता दें कि नारी शक्ति वंदन अधिनियम (संविधान 106वां संशोधन एक्ट) के नाम से जाना जाने वाला महिला रिजर्वेशन बिल 2023 में पास हुआ था और इसे 2029 तक लागू किया जाना था. इसके बाद जनगणना और लोकसभा सीटों का डिलिमिटेशन होना था लेकिन कुछ कारणों से अटक गया।
- केंद्र सरकार 2011 की जनगणना के आधार पर परिसीमन करके लोकसभा सीटों की संख्या 543 से बढ़ाकर 816 करने की तैयारी में है। 2011 की जनगणना को आधार बनाकर परिसीमन आयोग बनाया जाना है। इसके तहत लोकसभा सीटों की संख्या 543 से बढ़कर 816 तक हो सकती हैं।






