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दिल्ली की राउज एवेन्यू कोर्ट ने सोनिया गांधी को भेजा नोटिस, 1980 वोटर लिस्ट में बिना नागरिकता नाम जुड़ने पर मांगा जवाब, जानिए पूरा मामला

Written by:Shruty Kushwaha
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उनपर आरोप है कि 1980 की वोटर लिस्ट में उनका नाम उस समय शामिल किया गया था जब वे भारतीय नागरिक नहीं थीं। याचिकाकर्ता का कहना है कि यह जालसाजी हो सकती है और मामले की जांच होनी चाहिए। मजिस्ट्रेट कोर्ट ने पहले इस शिकायत को खारिज कर दिया था, लेकिन रिवीजन पिटीशन पर अब कोर्ट ने सोनिया गांधी और दिल्ली पुलिस से जवाब मांगा है।
दिल्ली की राउज एवेन्यू कोर्ट ने सोनिया गांधी को भेजा नोटिस, 1980 वोटर लिस्ट में बिना नागरिकता नाम जुड़ने पर मांगा जवाब, जानिए पूरा मामला

फाइल फोटो

दिल्ली की राउज एवेन्यू कोर्ट ने कांग्रेस की पूर्व अध्यक्ष सोनिया गांधी को नोटिस जारी किया है। यह मामला 1980 की मतदाता सूची में उनके नाम के कथित अनधिकृत रूप से जुड़ा होने को लेकर है। याचिकाकर्ता ने आरोप लगाया है कि यह र्जी दस्तावेजों के इस्तेमाल और जालसाजी का मामला हो सकता है। अदालत 6 जनवरी 2026 को मामले पर अगली सुनावाई करेगी।

यह विवाद 1980 के मतदाता पंजीकरण से जुड़ा है। शिकायतकर्ता का कहना है कि सोनिया गांधी का नाम 1980 में नई दिल्ली निर्वाचन क्षेत्र की वोटर लिस्ट में दर्ज किया गया था, जबकि उन्होंने भारतीय नागरिकता अप्रैल 1983 में प्राप्त की थी। उनका यह भी कहना है कि 1982 में उनका नाम हटाया गया और 1983 में नागरिकता के बाद फिर जोड़ा गया, जोकि संदिग्ध है।

कोर्ट ने सोनिया गांधी को भेजा नोटिस

यह विवाद दशकों पुराना है लेकिन हाल ही में फिर से सुर्खियों में आया है। याचिकाकर्ता विकास त्रिपाठी ने सितंबर 2025 में मजिस्ट्रेट कोर्ट में शिकायत दर्ज की थी, जिसमें सोनिया गांधी के खिलाफ एफआईआर दर्ज करने और जांच की मांग की गई थी। मजिस्ट्रेट वैभव चौरसिया ने 11 सितंबर को इस शिकायत को खारिज कर दिया था। लेकिन इसके बाद विकास त्रिपाठी ने रिवीजन पिटीशन दाखिल की। इसपर दिल्ली की राउज एवेन्यू कोर्ट ने सुनवाई करते हुए सोनिया गांधी और दिल्ली पुलिस को नोटिस जारी कर जवाब मांगा है। मामले की अगली सुनवाई जनवरी में होगी।

ये है मामला

याचिकाकर्ता विकास त्रिपाठी के अनुसार, सोनिया गांधी का नाम नई दिल्ली लोकसभा क्षेत्र की 1980 की मतदाता सूची में शामिल किया गया था। लेकिन उन्होंने 30 अप्रैल 1983 को भारतीय नागरिकता प्राप्त की थी। इस याचिका में सवाल किया गया है कि जब नागरिकता तीन साल बाद मिली तो 1980 में उनका नाम वोटर लिस्ट में कैसे शामिल हुआ। याचिकाकर्ता विकास त्रिपाठी का कहना है कि किसी गैर-नागरिक का नाम वोटर लिस्ट में शामिल करना अपराध है और इस मामले की जांच की जाए कि क्या इसके लिए फर्जी दस्तावेजों का सहारा लिया गया था। इस मामले में उन्होंने जालसाजी की आशंका भी जताई है।

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Shruty Kushwaha
लेखक के बारे में
2001 में माखनलाल चतुर्वेदी राष्ट्रीय पत्रकारिता विश्वविद्यालय भोपाल से पत्रकारिता में स्नातकोत्तर (M.J, Masters of Journalism)। 2001 से 2013 तक ईटीवी हैदराबाद, सहारा न्यूज दिल्ली-भोपाल, लाइव इंडिया मुंबई में कार्य अनुभव। साहित्य पठन-पाठन में विशेष रूचि। View all posts by Shruty Kushwaha
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