चुनाव आयोग ने कांग्रेस नेता राहुल गांधी के वोट चोरी के आरोपों को संविधान का अपमान बताते हुए कड़ी निंदा की है। मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार ने कहा कि आयोग को राजनीतिक उद्देश्यों के लिए मतदाताओं को निशाना बनाने का मंच बनाया जा रहा है। उन्होंने स्पष्ट किया कि आयोग सत्तारूढ़ और विपक्षी दलों के साथ समान व्यवहार करता है और मतदाताओं के साथ मजबूती से खड़ा है।

मुख्य चुनाव आयुक्त ने कहा कि विशेष गहन संशोधन (SIR) मतदाता सूची में त्रुटियों को ठीक करने के लिए शुरू किया गया है, जिसमें आपत्तियां दर्ज करने के लिए एक महीने का समय दिया गया है। उन्होंने सभी दलों से गलतियों को उजागर करने की अपील की और कहा कि आयोग के दरवाजे सभी के लिए खुले हैं। कुमार ने यह भी बताया कि सुप्रीम कोर्ट ने 2019 में मशीन-रीडेबल मतदाता सूची को गोपनीयता भंग करने वाला माना था।

चुनावी अनियमितताओं का आरोप

राहुल गांधी ने बिहार में वोटर अधिकार यात्रा शुरू कर आयोग पर बीजेपी के साथ मिलकर चुनावी अनियमितताओं का आरोप लगाया। उन्होंने दावा किया कि एसआईआर के जरिए बिहार में मतदाताओं को हटाकर या जोड़कर चुनाव चुराने की साजिश हो रही है। इसके जवाब में, कर्नाटक चुनाव आयोग ने राहुल से शपथ पत्र देकर अनियमितताओं के सबूत देने या माफी मांगने को कहा है।

किस निर्वाचन क्षेत्र का मतदाता

मुख्य चुनाव आयुक्त ने कहा कि अगर कोई व्यक्ति उस निर्वाचन क्षेत्र का मतदाता नहीं है, तो उसे शिकायत दर्ज करने के लिए शपथ लेनी होगी। उन्होंने चेतावनी दी कि सात दिनों के भीतर शपथ पत्र न मिलने पर आरोप निराधार माने जाएंगे। कांग्रेस नेता पवन खेड़ा ने जवाब में कहा कि मुख्य चुनाव आयुक्त ने विपक्ष के सवालों का जवाब नहीं दिया।