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लखनऊ पहुंचे शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद, आज करेंगे गौ रक्षा सभा, काशी के अस्सी घाट पर शंखनाद

Written by:Rishabh Namdev
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ज्योतिष पीठ के शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद गौ रक्षा अभियान के तहत लखनऊ पहुंच गए हैं और आज 11 मार्च को यहां सभा करेंगे। वाराणसी में उनके समर्थन में अस्सी घाट पर दोपहर 2 बजे शंखनाद और जयघोष की तैयारी है। यह यात्रा 7 मार्च को काशी से शुरू हुई थी और जौनपुर, सुल्तानपुर, सीतापुर होते हुए लखनऊ तक पहुंची।
लखनऊ पहुंचे शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद, आज करेंगे गौ रक्षा सभा, काशी के अस्सी घाट पर शंखनाद

इस सप्ताह उत्तर प्रदेश की धार्मिक और सामाजिक हलचल का केंद्र लखनऊ और वाराणसी दोनों बन गए हैं। ज्योतिष पीठ के शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद गौ माता की रक्षा के संकल्प के साथ लखनऊ पहुंच चुके हैं, जहां आज 11 मार्च को गौ रक्षा को लेकर सभा प्रस्तावित है।

मामला सिर्फ एक शहर की सभा का नहीं है। काशी में उनके समर्थक उसी अभियान को सार्वजनिक ताकत देने के लिए अस्सी घाट पर सामूहिक शंखनाद की तैयारी में हैं, ताकि संदेश साफ जाए कि यह यात्रा वाराणसी से शुरू होकर अब राज्यव्यापी समर्थन जुटाने की दिशा में बढ़ रही है।

वाराणसी से चली पदयात्रा, लखनऊ में राजनीतिक-सामाजिक पड़ाव

शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद ने इस अभियान की शुरुआत 7 मार्च को वाराणसी से की थी। काशी से निकलने से पहले उन्होंने चिंतामणि गणेश जी और श्री संकट मोचन मंदिर में दर्शन किए, फिर जौनपुर, सुल्तानपुर और सीतापुर होते हुए लखनऊ पहुंचे। यात्रा का रास्ता भी संदेश देता है कि इसे सीधे तौर पर जनसमर्थन से जोड़कर आगे बढ़ाया जा रहा है।

लखनऊ में 11 मार्च की सभा अब इस पूरे अभियान का पहला बड़ा सार्वजनिक परीक्षण मानी जा रही है, क्योंकि यहीं से आगे की रणनीति, अपील और संगठनात्मक दिशा स्पष्ट होने की उम्मीद है।

अभियान अब सड़क से मंच पर आ गया है।

काशी में दोपहर 2 बजे शंखनाद, गंगा तट पर होगा जयघोष

काशी स्थित विद्या मठ के मीडिया प्रभारी संजय पांडे ने बताया कि शंकराचार्य के संकल्प को देशभर के धर्माचार्यों, गौ भक्तों और सनातन प्रेमियों का समर्थन मिल रहा है। उनके मुताबिक, वाराणसी के अस्सी घाट पर दोपहर 2 बजे शंखनाद किया जाएगा और मां गंगा से संकल्प की सफलता के लिए प्रार्थना की जाएगी। इसी दौरान गंगा तट पर जयघोष भी होगा।

यह घोषणा बताती है कि लखनऊ की सभा और काशी का कार्यक्रम अलग-अलग आयोजन नहीं हैं, बल्कि एक ही अभियान के दो सार्वजनिक बिंदु हैं। एक तरफ राजधानी में सभा, दूसरी तरफ काशी में प्रतीकात्मक धार्मिक समर्थन।

अभी अगला तय पड़ाव 11 मार्च का लखनऊ कार्यक्रम है। उसी दिन काशी में अस्सी घाट पर होने वाला शंखनाद यह संकेत देगा कि अभियान को मैदान में कितना संगठित और सक्रिय समर्थन मिल रहा है।

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Rishabh Namdev
लेखक के बारे में
मैं ऋषभ नामदेव खेल से लेकर राजनीति तक हर तरह की खबर लिखने में सक्षम हूं। मैं जर्नलिज्म की फील्ड में पिछले 4 साल से काम कर रहा हूं। View all posts by Rishabh Namdev
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