भारत में वर्षों बाद चीतों की वापसी को लेकर शुरू किया गया चीता प्रोजेक्ट अब एक नई सफलता की कहानी लिख रहा है। जब 17 सितंबर 2022 को अफ्रीकी देशों से चीतों को भारत लाया गया था, तब बहुत से लोग यह देखने के लिए उत्सुक थे कि क्या ये वन्यजीव भारतीय जंगलों में खुद को ढाल पाएंगे। अब तीन साल के भीतर ही तस्वीर पूरी तरह बदल चुकी है।
मध्य प्रदेश के श्योपुर जिले में स्थित कूनो नेशनल पार्क में चीतों की संख्या तेजी से बढ़कर लगभग 50 तक पहुंच गई है। शुरुआत में केवल 20 चीतों को यहां बसाया गया था, लेकिन अब शावकों के जन्म और नए चीतों के आने से इनकी संख्या बढ़ती जा रही है। इसी कारण अब सरकार ने चीतों के लिए तीसरा घर तैयार करने की योजना बनाई है, जहां वे सुरक्षित और प्राकृतिक वातावरण में रह सकें।
कूनो नेशनल पार्क में तेजी से बढ़ी चीतों की संख्या
चीता प्रोजेक्ट की शुरुआत में कूनो नेशनल पार्क को मुख्य आवास के रूप में चुना गया था। लगभग 750 वर्ग किलोमीटर में फैले इस पार्क को चीतों के लिए उपयुक्त माना गया था।
वन्यजीव विशेषज्ञों के अनुसार कूनो नेशनल पार्क में लगभग 30 चीतों को आराम से बसाया जा सकता है। यहां पर्याप्त वन क्षेत्र और शिकार के लिए कई प्रकार के जंगली जानवर मौजूद हैं।
लेकिन पिछले कुछ महीनों में यहां चीतों की संख्या तेजी से बढ़ी है। अफ्रीका से लाए गए चीतों के अलावा यहां जन्मे शावकों ने इस संख्या को और बढ़ा दिया है। हाल ही में केवल 30 दिनों के भीतर ही 13 नए शावकों का जन्म हुआ है।
इसी वजह से अब कूनो में चीतों की संख्या बढ़कर लगभग 50 तक पहुंच गई है। इस बढ़ती संख्या को देखते हुए वन विभाग और सरकार अब नए आवास की तैयारी कर रहे हैं।
नौरादेही अभयारण्य बनेगा चीतों का तीसरा घर
कूनो और गांधीसागर के बाद अब मध्य प्रदेश का रानी दुर्गावती अभयारण्य यानी नौरादेही चीतों का तीसरा घर बनने जा रहा है। मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने राज्य कैबिनेट की बैठक से पहले मंत्रियों को इस योजना की जानकारी दी। उन्होंने बताया कि मई-जून के महीने में नौरादेही अभयारण्य में चीतों को छोड़ा जाएगा।
नौरादेही अभयारण्य लगभग 1197 वर्ग किलोमीटर क्षेत्र में फैला हुआ है। इतना बड़ा क्षेत्र चीतों के लिए काफी अनुकूल माना जा रहा है। वन्यजीव विशेषज्ञों का मानना है कि हर चीते को लगभग 50 से 100 वर्ग किलोमीटर क्षेत्र की जरूरत होती है। इसलिए नौरादेही जैसे बड़े अभयारण्य में चीतों के लिए बेहतर प्राकृतिक माहौल मिल सकता है।
चीता प्रोजेक्ट की सफलता का संकेत
भारत में चीता प्रोजेक्ट को वन्यजीव संरक्षण की एक ऐतिहासिक पहल माना जा रहा है। यह प्रोजेक्ट केवल चीतों को बसाने का प्रयास नहीं है बल्कि देश के जंगलों में पारिस्थितिकी संतुलन को मजबूत करने की दिशा में भी एक बड़ा कदम है।
कूनो में चीतों का प्राकृतिक वातावरण में ढलना इस परियोजना की सबसे बड़ी सफलता माना जा रहा है। कई चीते अब पार्क की सीमाओं से बाहर निकलकर आसपास के इलाकों में भी घूमते हुए देखे गए हैं।
कुछ चीते मुरैना और ग्वालियर तक पहुंच गए, जबकि कुछ श्योपुर से लगे राजस्थान के क्षेत्रों तक भी देखे गए हैं। इससे यह संकेत मिलता है कि चीते यहां के प्राकृतिक वातावरण के साथ तालमेल बैठा रहे हैं।
चीतों का परिवार तेजी से बढ़ रहा
कूनो नेशनल पार्क में मौजूद सभी छह मादा चीते अब मां बन चुकी हैं। इन मादा चीतों ने कुल मिलाकर 33 शावकों को जन्म दिया है। इनमें से कई शावक अब बड़े होकर वयस्क भी हो चुके हैं। दिलचस्प बात यह है कि ज्वाला नाम की मादा चीता तीन बार शावकों को जन्म दे चुकी है। उसके कुल नौ शावकों में से एक मादा शावक मुखी अब खुद भी मां बन चुकी है और उसने पांच शावकों को जन्म दिया है।
इस तरह केवल ज्वाला के परिवार में ही अब 15 चीते हो चुके हैं। यह आंकड़ा दिखाता है कि कूनो का वातावरण चीतों के लिए अनुकूल साबित हो रहा है। हाल ही में सात फरवरी को आशा नाम की मादा चीता ने पांच शावकों को जन्म दिया। इसके बाद 18 फरवरी को गामिनी ने तीन शावकों को जन्म दिया। वहीं नौ मार्च को ज्वाला ने भी पांच शावकों को जन्म दिया।
चीतों के लिए बढ़ाया गया क्षेत्र
चीतों की बढ़ती संख्या को देखते हुए कूनो नेशनल पार्क के आसपास के क्षेत्रों को भी इस प्रोजेक्ट से जोड़ा जा रहा है। श्योपुर और शिवपुरी वन मंडलों के कुछ हिस्सों को कूनो के साथ जोड़ा गया है। इसके अलावा राजस्थान और उत्तर प्रदेश के कुछ इलाकों को जोड़कर एक बड़ा कॉरिडोर बनाने की योजना भी बनाई जा रही है। इस कॉरिडोर का उद्देश्य यह है कि चीते आसानी से एक जंगल से दूसरे जंगल तक जा सकें और उन्हें पर्याप्त क्षेत्र मिल सके। वन्यजीव विशेषज्ञों का मानना है कि अगर चीतों को बड़ा क्षेत्र मिलेगा तो उनका व्यवहार अधिक प्राकृतिक रहेगा और उनकी संख्या भी स्वस्थ तरीके से बढ़ेगी।
वन्यजीव पर्यटन को मिलेगा बढ़ावा
चीता प्रोजेक्ट की सफलता का असर वन्यजीव पर्यटन पर भी देखने को मिल रहा है। कूनो नेशनल पार्क में चीतों को देखने के लिए देश और विदेश से पर्यटक आ रहे हैं। पर्यटकों की बढ़ती संख्या से स्थानीय लोगों को भी रोजगार के नए अवसर मिल रहे हैं। अगर नौरादेही अभयारण्य में भी चीतों को बसाया जाता है तो वहां भी पर्यटन को बढ़ावा मिलेगा और आसपास के गांवों की अर्थव्यवस्था को फायदा होगा।






