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कूनो नेशनल पार्क में चीता गामिनी ने 3 शावकों को दिया जन्म, मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने जताई खुशी, जानिए क्या कहा?

Written by:Rishabh Namdev
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कूनो नेशनल पार्क से एक और खुशखबरी आई है। दरअसल दक्षिण अफ्रीका से लाई गई मादा चीता गामिनी ने तीन स्वस्थ शावकों को जन्म दिया है। ‘प्रोजेक्ट चीता’ के तीन साल पूरे होने के दिन सामने आई इस खबर ने वन्यजीव संरक्षण को नई मजबूती दी है।
कूनो नेशनल पार्क में चीता गामिनी ने 3 शावकों को दिया जन्म, मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने जताई खुशी, जानिए क्या कहा?

मध्य प्रदेश के कूनो नेशनल पार्क से एक बड़ी खुशखबरी सामने आई है। जहां चीता गामिनी दूसरी बार मां बनी है। 18 फरवरी को जन्मे तीनों शावक पूरी तरह स्वस्थ बताए जा रहे हैं। केंद्रीय मंत्री भूपेंद्र यादव ने सोशल मीडिया पर इसकी जानकारी देते हुए इसे संरक्षण अभियान की बड़ी सफलता बताया। खास बात यह है कि जिस दिन दक्षिण अफ्रीकी चीतों के भारत आने के तीन साल पूरे हुए, उसी दिन यह खुशखबरी सामने आई।

दरअसल गामिनी के इन शावकों के साथ भारत में जन्मे जीवित शावकों की संख्या 27 तक पहुंच गई है। यह भारत की धरती पर चीतों का नौवां सफल कुनबा है। इससे पहले 7 फरवरी को चीता आशा ने भी पांच शावकों को जन्म दिया था। लगातार हो रहे ये जन्म इस बात का संकेत हैं कि कूनो का माहौल चीतों के लिए अनुकूल साबित हो रहा है।

मध्यप्रदेश बना चीता संरक्षण का केंद्र: मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव

वहीं मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने भी इस उपलब्धि पर खुशी जताई है। दरअसल उन्होंने सोशल मीडिया पोस्ट में कहा कि मध्यप्रदेश अब चीतों के पुनर्स्थापन का मजबूत केंद्र बन चुका है। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा कि “प्रोजेक्ट चीता के अंतर्गत दक्षिण अफ्रीका से आई मादा चीता ‘गामिनी’ ने 3 शावकों को जन्म दिया है। श्योपुर जिले में स्थित कूनो नेशनल पार्क में आए चीतों के तीन वर्ष पूर्ण होने के साथ यह 9वां सफल प्रसव है। भारत में चीतों की कुल संख्या बढ़कर अब 38 हो गई है। यह पूरे देश के लिए वन्यजीव संरक्षण, जैव विविधता और पर्यावरण संतुलन की दिशा में ऐतिहासिक उपलब्धि है।”

प्रोजेक्ट चीता क्या है?

दरअसल ‘प्रोजेक्ट चीता’ भारत सरकार की एक बड़ी वन्यजीव योजना है, जिसके तहत नामीबिया और दक्षिण अफ्रीका से चीतों को लाकर मध्य प्रदेश के श्योपुर जिले स्थित कूनो नेशनल पार्क में बसाया गया। भारत में चीता 1952 में विलुप्त घोषित हो चुका था। करीब सात दशक बाद 2022 में पहली खेप के रूप में चीतों को लाया गया। तब से लेकर अब तक कई चुनौतियां भी सामने आईं, जिनमें कुछ चीतों की मौत भी शामिल रही।

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