भोपाल। मध्यप्रदेश की इकॉनमी लगातार आगे बढ़ रही है। विधानसभा में पेश आर्थिक सर्वेक्षण 2025-26 (Economic Survey 2025-26) के मुताबिक राज्य का GSDP 16 लाख 69 हजार 750 करोड़ रुपये रहने का अनुमान है, जो पिछले साल से करीब 11.14 फीसदी ज्यादा है। सर्वे में यह भी सामने आया कि प्रति व्यक्ति औसत आय बढ़कर 1 लाख 69 हजार रुपये हो गई है।
मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने दस्तावेज पेश करते हुए कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में प्रदेश की आर्थिक हालत मजबूत हुई है। उन्होंने बेहतर प्रशासन और फाइनेंशियल डिसिप्लिन को इसकी बड़ी वजह बताया।
औद्योगिक विकास और रोजगार सृजन
सर्वे रिपोर्ट के मुताबिक खेती, उद्योग और सर्विस सेक्टर तीनों में ग्रोथ देखने को मिली है। खेती का योगदान सबसे ज्यादा रहा, जबकि व्यापार, होटल और दूसरी सेवाओं में सबसे तेज बढ़त दर्ज की गई।
अनाज उत्पादन में 2024-25 के दौरान करीब 15 फीसदी की बढ़ोतरी बताई गई है। दूध उत्पादन भी 225 लाख टन से ऊपर पहुंच गया है, जिससे गांवों की इकॉनमी को मजबूती मिली है।
इंडस्ट्रियल सेक्टर की बात करें तो रिपोर्ट में बताया गया है कि राज्य में 1,028 इंडस्ट्रियल यूनिट्स को जमीन दी गई है। इन निवेशों से करीब 1.7 लाख लोगों को रोजगार मिलने की संभावना जताई गई है।
स्वास्थ्य और शिक्षा पर बढ़ा निवेश
ग्रामीण इलाकों में हजारों किलोमीटर सड़कें बनी हैं और लाखों मकान पूरे किए गए हैं। हेल्थ सेक्टर में अब तक 4 करोड़ से ज्यादा आयुष्मान कार्ड जारी हो चुके हैं। वहीं स्वास्थ्य और शिक्षा दोनों पर सरकारी खर्च बढ़ाया गया है, ताकि अस्पतालों, स्कूलों और दूसरी बुनियादी सुविधाओं को मजबूत किया जा सके।
इन तमाम आंकड़ों के साथ आर्थिक सर्वेक्षण में यह संकेत भी दिया गया है कि आने वाले समय में सरकार की प्राथमिकता रोजगार बढ़ाने, गांवों की इकॉनमी को मजबूत करने और स्वास्थ्य-शिक्षा जैसे जरूरी सेक्टर पर फोकस बनाए रखने की रहेगी। सर्वे में सामने आए आंकड़े बताते हैं कि सरकार बुनियादी ढांचे के साथ सामाजिक क्षेत्रों पर भी बराबर ध्यान देने की बात कर रही है।





