पश्चिम बंगाल में विधानसभा चुनाव की आहट के साथ ही राज्य में मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) को लेकर राजनीतिक तूफान खड़ा हो गया है। मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने मंगलवार 17 फरवरी को नबन्ना में आयोजित प्रेस कॉन्फ्रेंस में चुनाव आयोग पर जमकर हमला बोला और साफ शब्दों में चेतावनी दी।
ममता ने कहा कि अगर राज्य के अधिकारियों के खिलाफ कोई कार्रवाई की गई तो वह निश्चित रूप से उनकी रक्षा करेंगी। उन्होंने सवाल उठाया कि चुनाव आयोग को सुप्रीम कोर्ट के नियम का उल्लंघन करने की हिम्मत कैसे हुई।
निलंबित अधिकारियों को मिलेगा प्रमोशन
मुख्यमंत्री ने बड़ा ऐलान करते हुए कहा कि चुनाव आयोग द्वारा जिन अधिकारियों को डिमोट किया गया है, उन्हें पश्चिम बंगाल सरकार विभिन्न क्षेत्रों में प्रमोट करेगी। उन्होंने बताया कि मंत्रिमंडल में ऐतिहासिक फैसले लिए गए हैं। दो साल के प्रोबेशन पीरियड और तीन साल तक बीडीओ के रूप में काम करने के बाद इन अधिकारियों को एसडीओ के पद पर पदोन्नत किया जाएगा।
सातों निलंबित अधिकारियों के बारे में ममता ने स्पष्ट किया कि वे चुनाव से इतर अन्य कामकाज संभालेंगे और जिलों में अच्छा काम करेंगे। उन्हें बर्खास्त नहीं किया जा रहा है, बल्कि उनके खिलाफ जांच जारी है और बाद में फैसला लिया जाएगा।
‘तुगलकी आयोग’ पर कटाक्ष
ममता बनर्जी ने चुनाव आयोग को ‘तुगलकी आयोग’ कहकर तीखा कटाक्ष किया। उनका आरोप था कि ईसीआई एक राजनीतिक दल द्वारा संचालित आयोग बन गया है जो आम लोगों को आतंकवादियों की तरह देख रहा है। उन्होंने दावा किया कि बीजेपी के निर्देश पर चुनाव आयोग एसआईआर के दौरान बंगाल के मतदाताओं के नाम हटा रहा है।
“ईआरओ को निलंबित करने का कारण क्या है? उनका अपराध क्या है, उनकी गलती क्या है?”- ममता बनर्जी
सीएम ने भारत के सर्वोच्च न्यायालय द्वारा जारी निर्देशों की अवहेलना का आरोप लगाया। उनका कहना था कि मतदाता सूची तैयार करने की प्रक्रिया लक्षित तरीके से की जा रही है, जिससे लोकतांत्रिक प्रक्रिया कमजोर हो रही है। राज्य के लिए महत्वपूर्ण समय में चुनावी प्रणाली की निष्पक्षता से समझौता किया जा रहा है।
प्रक्रियात्मक त्रुटि बताया निलंबन
अधिकारियों के निलंबन की तुलना ममता ने तृणमूल के किसी सदस्य द्वारा की गई गलती से की और इसे महज ‘प्रक्रियात्मक त्रुटि’ बताया। उन्होंने कहा कि यदि कोई गंभीर गलती नहीं होती तो पहले कारण बताओ नोटिस जारी किया जाता है, फिर मामला अनुशासनात्मक समिति के पास जाता है और उसकी सिफारिशों के आधार पर निलंबन होता है।
मुख्यमंत्री ने दावा किया कि आयोग के दबाव में सरकार को कार्रवाई करनी पड़ी। उन्होंने आश्वासन दिया कि निलंबित सातों अधिकारी चुनाव कार्य के अलावा अन्य जिम्मेदारियां निभाते रहेंगे।
चुनाव आयोग ने क्यों लिया एक्शन
दरअसल जिन सात अधिकारियों को निलंबित किया गया है, वे सभी राज्य में मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) में एईआरओ के रूप में तैनात थे। चुनाव आयोग ने उन पर एसआईआर कार्य में कदाचार, कर्तव्य में लापरवाही और शक्ति के दुरुपयोग का आरोप लगाया है।
आयोग ने रविवार को मुख्य सचिव नंदिनी चक्रवर्ती को पत्र लिखकर सातों अधिकारियों को निलंबित करने का आदेश दिया था। लेकिन राज्य सरकार द्वारा कोई कार्रवाई होने से पहले ही चुनाव आयोग ने स्वयं अधिकारियों को निलंबित कर दिया और उन्हें एईआरओ के कर्तव्यों से भी हटा दिया गया।





