मुख्यमंत्री डॉ मोहन यादव ने कूनो नेशनल पार्क स्थित कूनो नदी में 53 घड़ियाल और 25 कछुए नदी में रिलीज किये। गेवेलियस गेंगेटिक्स नाम के छोड़े गये 53 घड़ियाल में से 28 नर एवं 25 मादा शामिल हैं। इसी प्रकार 25 कछुए थ्री स्ट्रिप्ड रूफ टर्टल प्रजाति के हैं, जिनका वैज्ञानिक नाम वाटागुरु डोगोका है। जिन कछुओं को नदी में छोड़ा गया है वे मुरैना के कछुआ केन्द्र बरहई से लाए गए हैं वहीं कछुए देवरी घड़ियाल केन्द्र मुरैना से लाये गए है।
इस वर्ष बढ़ी मध्यप्रदेशआने वाले सैलानियों की संख्या
मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा कि प्रदेश में घड़ियाल और कछुओं का संरक्षण एवं संवर्धन किया जा रहा है। विलुप्त होते जीवों के संरक्षण के संकल्प के साथ मध्यप्रदेश सरकार कार्य कर रही है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि मध्यप्रदेश में पर्यटन के क्षेत्र में निरंतर प्रगति हो रही है। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की पहल पर शुरू हुआ चीता प्रोजेक्ट निरंतर सफलता की ओर आगे बढ़ रहा है। इससे प्रदेश में चीतों की संख्या बढ़कर 48 हो गयी है। मुख्यमंत्री मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि इस वर्ष मध्यप्रदेश आने वाले सैलानियों की संख्या में भी वृद्धि हुई है।
जलचरों को बढ़ावा देने की योजना का हिस्सा
मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि आज कूनो नदी में दुर्लभ प्रजाति के कछुए और घड़ियाल छोड़े गए हैं। यह राज्य सरकार की जलचरों को बढ़ावा देने की योजना का हिस्सा है। वन्य-प्राणियों के संरक्षण से बढ़ती जैव विविधता से प्रदेश में पर्यटन के अवसर निर्मित हो रहे हैं, जिससे रोजगार के नए मौके भी लोगों को मिल रहे हैं। राज्य सरकार का प्रयास है कि इन गतिविधियों का लाभ सभी को मिले।
मुरैना केन्द्रों से लाये गए कछुए और घड़ियाल
उल्लेखनीय है कि जिन कछुओं को नदी में छोड़ा गया है वे मुरैना के कछुआ केन्द्र बरहई से लाए गए हैं। तेंतीस में से 25 कछुए तीन पट्टीदार छत वाले और 8 भारतीय फ्लेप शेल कछुआ हैं। देवरी घड़ियाल केन्द्र से लाकर 53 घड़ियालों को कूनो नदी में छोड़ा गया है, ये कछुए ढोंगोंका और घड़ियाल, गंगा एवं ब्रह्मपुत्र नदी क्षेत्रों में पाई जाने वाली दुर्लभ जलीय प्रजातियां हैं जो जैव विविधता की अनमोल धरोहर हैं और नदियों के प्राकृतिक संतुलन को बनाए रखने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती हैं। इन प्रजातियों को अंतरराष्ट्रीय संस्था इंटरनेशनल यूनियन फॉर कंजनर्वेशन ऑफ नेचर की रेड लिस्ट में संकटग्रस्त श्रेणी में रखा गया है। राज्य सरकार इनके संरक्षण के लिए सार्थक प्रयास कर रही है।






