मध्य प्रदेश की राजधानी भोपाल में 10 मार्च 2026 को मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव की अध्यक्षता में अहम कैबिनेट बैठक हुई जिसमें राज्य सरकार ने सात प्रमुख विभागों की योजनाओं को आगामी पांच वर्षों तक जारी रखने के लिए 33,240 रुपए करोड़ के बजट को मंजूरी देने के साथ-साथ कई जनकल्याणकारी निर्णय लिए हैं।
इसके अलावा मुख्यमंत्री यंग इंटर्न्स फॉर गुड-गवर्नेस प्रोग्राम, 7 जिलों के लिए “एक जिला-एक उत्पाद” परियोजना का अनुमोदन, सिंगरौली में कनिष्ठ व्यवहार न्यायाधीश सहित 7 पदों की स्वीकृति और मैहर, कैमोर और निमरानी में 3 नए औषधालयों को मंजूरी दी गई। सरकारी अधिकारियों, कर्मचारियों और पेंशनभोगियों का 3 प्रतिशत महंगाई भत्ता दिए जाने के फैसले का भी औपचारिक अनुसमर्थन किया गया।
प्रमुख योजनाओं के लिए बड़ा बजट आवंटित
कैबिनेट ने विभिन्न विभागों की कल्याणकारी योजनाओं की निरंतरता (2026-27 से 2030-31 तक) सुनिश्चित करने के लिए कुल 33,240 करोड़ रुपये की राशि स्वीकृत की है। विभागवार प्रमुख आवंटन इस प्रकार हैं:
- पंचायत एवं ग्रामीण विकास विभाग: योजनाओं के सुचारू संचालन के लिए ₹7,127.38 करोड़ रुपये।
- महिला एवं बाल विकास विभाग: विभिन्न योजनाओं के लिए 3,773 करोड़ रुपये।
- MSME विभाग: स्टार्टअप नीति और निवेश प्रोत्साहन योजनाओं के लिए 11,361 करोड़ रुपये।
- जनजातीय कार्य विभाग: अनुसूचित जनजाति क्षेत्रों के विकास और पोस्ट-मैट्रिक छात्रवृत्ति के लिए 1,645 करोड़ रुपये।
- खनिज साधन विभाग: ‘खनिज अधिभार का आरक्षित निधि में हस्तांतरण’ योजना के लिए 6,090.12 करोड़ रुपये।
- योजना, आर्थिक एवं सांख्यिकी विभाग: 10 प्रमुख योजनाओं के लिए 2,064.62 करोड़ रुपये।
यहां विस्तार से पढ़िए मोहन कैबिनेट बैठक के दस बड़े फैसले
यंग इंटनर्स फॉर गुड-गवर्नेंस :
मुख्यमंत्री यंग इंटनर्स फॉर गुड-गवर्नेंस प्रोगाम को मंजूरी दी है। मंत्रि-परिषद द्वारा “मुख्यमंत्री यंग इंटर्नस फॉर गुड-गवर्नेस प्रोग्राम” को 3 वर्ष के लिए क्रियान्वयन के लिए लगभग 190 करोड़ रुपये की स्वीकृति प्रदान की गई है। लोक सेवा प्रबंधन विभाग को अग्रिम कार्यवाही तथा प्रक्रिया निर्धारण कर नियमों एवं निर्देशों को जारी कर क्रियान्वयन के लिए अधिकृत किया गया है।
सिंगरौली में 7 पदों की स्वीकृति:
सिंगरौली के चितरंगी में कनिष्ठ व्यवहार न्यायाधीश सहित कुल 7 नवीन पदों के सृजन की भी मंत्रि-परिषद द्वारा स्वीकृति दी है। मंत्रि-परिषद ने चितरंगी जिला सिंगरौली में व्यवहार न्यायालय की स्थापना के लिए व्यवहार न्यायाधीश कनिष्ठ खण्ड का एक नवीन पद और उनके कार्यालयीन अमले के लिए तृतीय एवं चतुर्थ श्रेणी के 6 नवीन पद सहित कुल 7 नवीन पदों का सृजन किये जाने की स्वीकृत प्रदान की है।
3 नए औषधालयों को मंजूरी:
- मंत्रि-परिषद ने भारत सरकार के कर्मचारी राज्य बीमा निगम (इएसआईसी) द्वारा मैहर (जिला-मैहर), कैमोर (जिला कटनी), तथा निमरानी (जिला खरगौन) में 3 नये औषधालयों को खोलने एवं चिकित्सक और पैरामेडिकल स्टॉफ के 51 पदों का सृजन की स्वीकृति प्रदान की गयी है।
- मैहर, कैमोर तथा निमरानी में नये कर्मचारी राज्य बीमा औषधालय खोलने एवं नये पद सृजित करने की स्वीकृति प्रदान की गयी है। इससे रजिस्टर्ड 15,686 श्रमिकों एवं उन पर आश्रित लगभग 62,744 परिजनों को बेहतर स्वास्थ्य सुविधाएं प्राप्त होंगी।
7 जिलों के लिए “एक जिला-एक उत्पाद” परियोजना:
- मंत्रि-परिषद द्वारा “एक जिला-एक उत्पाद” परियोजना अंतर्गत चयनित 07 जिलों में पारंपरिक व विशिष्ट उत्पाद के सरंक्षण, विकास और विपणन हेतु आर्थिक सहायता उपलब्ध कराने के लिए आगामी 5 वर्षों में 37.50 करोड़ रुपये की स्वीकृति प्रदान की गई है।
- इस परियोजना में चयनित 07 जिलों में सीधी जिले में दरी एवं कारपेट, दतिया में गुड़, अशोकनगर में चंदेरी, हाथकरघा वस्त्र, भोपाल मे जरी-जरदोजी एवं जूट उत्पाद (जैसे पर्स आदि), धार में बाग प्रिंट, सीहोर में लकड़ी के खिलौने तथा उज्जैन में बटिक प्रिंट में आगामी 5 वर्षों के लिए 37.50 करोड़ रुपये की डी.पी.आर, तैयार की गयी है।
- इस परियोजना से स्थानीय शिल्पकारों, बुनकरों और कारीगरों को प्रशिक्षण, डिजिटलीकरण, ब्रांडिंग, विपणन तथा बाजार उपलब्धता जैसी सुविधायें प्रदान की जाएगी। यह परियोजना प्रदेश में स्थानीय उद्यमिता को बढावा, रोजगार सृजन एवं ग्रामीण अर्थव्यवस्था के सशक्तिकरण की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम हैं।
निःशक्त जन को वृत्तिकर से छूट:
मंत्रि-परिषद द्वारा मध्यप्रदेश वृत्तिकर अधिनियम, 1995 के अंतर्गत निःशक्त जन को वृत्तिकर से छूट को 31 मार्च, 2030 तक निरंतर किये जाने की स्वीकृति दी गई है।
रिवेम्प्ड डिस्ट्रीब्यूशन सेक्टर स्कीम:
- मंत्रि-परिषद् द्वारा निर्णय लिया गया कि रिवेम्प्ड डिस्ट्रीब्यूशन सेक्टर स्कीम के अंतर्गत वितरण अधोसंरचना के उन्नयन, यथा वितरण हानियों में कमीं तथा वितरण प्रणाली सुदृढ़ीकरण एवं आधुनिकीकरण से संबंधित बुनियादी अधोसंरचना के निर्माण और विकास कार्यों के लिए प्राप्त केन्द्रांश पर देय एसजीएसटी की राशि राज्य की वितरण कंपनियों को राज्य शासन द्वारा अनुदान के स्थान पर अंशपूंजी के रूप में उपलब्ध कराई जायेगी।
- स्कीम के अंतर्गत माह नवम्बर 2024 तक ऋण के रूप में प्रदत्त राशि 887 करोड़ 91 लाख रुपये को राज्य शासन द्वारा वितरण कंपनियों को अंशपूंजी के रूप में प्रदान किए जाने का अनुमोदन किया गया।
- विद्युत मंत्रालय, भारत सरकार द्वारा उपभोक्ताओं को गुणवत्तापूर्ण व विश्वसनीय विद्युत आपूर्ति के उद्देश्य से वित्तीय रूप से साध्य व परिचालन में दक्ष वितरण क्षेत्र विकसित करने के लिए रिवेम्प्ड डिस्ट्रीब्यूशन सेक्टर स्कीम (आरडीएसएस) लागू की गई है।
- योजना अन्तर्गत विद्युत अधोसंरचनात्मक कार्यों के लिए केन्द्र शासन द्वारा 60 प्रतिशत अनुदान दिया जा रहा है एवं शेष 40 प्रतिशत राशि राज्य शासन द्वारा वितरण कंपनियों को अंशपूंजी के रूप में प्रदान की जा रही है।
लोक वित्त पोषित कार्यक्रमों और योजनाओं की निरंतरता के लिए 63 करोड़
मंत्रि-परिषद् द्वारावित्त विभाग की लोक वित्त पोषित कार्यक्रमों, योजनाओं एवं परियोजनाओं के परीक्षण तथा प्रशासकीय अनुमोदन की प्रक्रिया के अन्तर्गत 16 वें केन्द्रीय वित्त आयोग की अवधि (01 अप्रैल 2026 से 31 मार्च 2031 तक) के लिए निरंतरता के लिए कुल 63 करोड़ 76 लाख रुपये की स्वीकृति प्रदान की गयी है।
ग्रामीण, पिछड़े और खनिज क्षेत्रों में के लिए 6090 करोड़
- मंत्रि-परिषद द्वारा खनिज साधन विभाग के अंतर्गत “खनिज अधिभार का रक्षित निधि में अतंरण” योजना को वर्ष 2026-27 से 2030-31 तक निरंतर रखे जाने के लिए 6090 करोड़ 12 लाख रुपये की स्वीकृति प्रदान की गयी है।
- यह योजना खनिज साधन विभाग के अंतर्गत पूर्व से संचालित योजना पूर्णतः राज्य वित्त पोषित एवं भारित व्यय से संबंधित योजना है। इस राशि का उपयोग ग्रामीण क्षेत्रों, पिछड़े क्षेत्रों, खनि क्षेत्रों में ग्रामीण अवसंरचना, पेयजल आपूर्ति योजना तथा सड़क विकास कार्यक्रम के क्रियान्वयन के लिये किया जायेगा।
पंचायत एवं ग्रामीण विकास की योजनाओं के लिए 7,127 करोड़
- मंत्रि परिषद द्वारा पंचायत एवं ग्रामीण विकास विभाग अंतर्गत विभिन्न योजनाओं और कार्यक्रमों की 31 मार्च 2031 तक निरंरता एवं सुचारू संचालन के लिये 7,127 करोड़ 38 लाख रुपये की स्वीकृति दी गयी है। स्वीकृति अनुसार विभागीय परिसंपत्तियों का संधारण के लिए 16 करोड़ 78 लाख रुपये , महात्मा गांधी राज्य ग्रामीण विकास एवं पंचायतराज संस्थान मध्य प्रदेश जबलपुर में विभिन्न योजनाओं और कार्यक्रमों के सुचारू संचालन के लिये 12 करोड़ 50 लाख रुपये की स्वीकृति दी गई है।
- इसके साथ ही प्रधानमंत्री पोषण शक्ति निर्माण योजना अंतर्गत शासकीय प्राथमिक, माध्यमिक शालाओं एवं बाल वाटिका तथा अनुदान प्राप्त शालाओं के कक्षा 01 से 08 तक दर्ज एवं उपस्थित बच्चों को पका हुआ भोजन उपलब्ध कराने से संबंधित विभिन्न योजनाओं/ कार्यक्रमों के सुचारू संचालन के लिए 7098 करोड़ रुपये की स्वीकृति प्रदान की गई है।
योजना आर्थिक एवं सांख्यिकी विभाग की 10 योजनाओं के लिए 2,064 करोड़
- मंत्रि-परिषद् द्वारा योजना आर्थिक एवं सांख्यिकी संचालनालय अंतर्गत संचालित 10 योजनाओं की 31 मार्च, 2031 तक निरंतरता के लिए 2,064 करोड़ 62 लाख रुपये की स्वीकृति प्रदान की गयी है।
- इसके अंतर्गत राज्य नीति आयोग के कार्य, प्रदेश में क्रियान्वित योजनाओं एवं परियोजनाओं की मॉनिटरिंग, सलाहकार सेवाएं, नवाचार, अनश्रवण एवं मूल्यांकन, सांसद स्वेच्छानुदान निधि से आर्थिक सहायता, विधायक स्वेच्च्छानुदान निधि से आर्थिक सहायता, बुन्देलखण्ड क्षेत्र विकास प्राधिकरण, महाकौशल विकास प्राधिकरण, विन्ध्य विकास प्राधिकरण, जनभागीदारी से क्रियान्वित जिला योजनाओं में शासन का अंशदान, जनअभियान परिषद् का गठन, राज्य सेम्पल सर्वेक्षणआदि से संबंधित व्ययो की स्वीकृति प्रदान की गयी है।
अनुसूचित जनजाति क्षेत्र के विकास और पोस्ट मैट्रिक छात्रवृत्ति के लिए 1,645 करोड़
- मंत्रि-परिषद द्वारा जनजातीय कार्य विभाग अंतर्गत अनुसूचित जनजाति क्षेत्र के विकास और पोस्ट मैट्रिक छात्रवृत्ति सहित अन्य कार्यों से संबंधित योजनाओं की वित्तीय वर्ष 2026-27 से 2030-31 तक निरंतरता के लिए कुल राशि 1,645 करोड़ रुपये की स्वीकृति दी गई है।
- इसके अंतर्गत कक्षा 11 वीं, 12 वीं एवं महाविद्यालय में अध्ययनरत विद्यार्थियों (राशि रुपये 2.50 लाख से अधिक आय वर्ग हेतु) को पोस्ट मैट्रिक छात्रवृत्ति प्रदाय करने के लिए 610 करोड़ 51 लाख रुपये, अनुसूचित जनजाति अन्वेषण संस्था के संचालन के लिए 86 करोड़ और अनुसूचित जनजाति क्षेत्र में आवागमन की सुविधा, सिंचाई सुविधा, शैक्षणिक सुविधा, स्वच्छ पेयजल, प्रकाश, जीविकोपार्जन एवं स्वरोजगार इत्यादि सुविधाएं उपलब्ध कराने के लिए 948 करोड 23 लाख रुपये की स्वीकृति प्रदान की गयी है।
महिला एवं बाल विकास विभाग की योजनाओं के लिए 3,773 करोड़
मंत्रि-परिषद द्वारा महिला एवं बाल विकास विभाग की विभिन्न योजनाओं की वर्ष 2026-27 से 2030-31 तक निरंतरता के लिए 3,773 करोड़ रूपये की स्वीकृति दी गयी है।इसके अंतर्गत राज्य महिला आयोग, बाल अधिकार संरक्षण आयोग, महिला एवं बाल कल्याण संचालनालय और मध्यप्रदेश महिला वित्त विकास निगम के विभिन्न कार्यों के संचालन की स्वीकृति दी गयी है।
स्टार्ट-अप नीति के क्रियान्वयन और निवेश संवर्धन के लिए 11,361 करोड़
- मंत्रि-परिषद द्वारा एमएसएमई विभाग के अंतर्गत प्रोत्साहन व्यवसाय निवेश सवंर्धन/सुविधा प्रदाय योजना और स्टार्ट-अप पॉलिसी का क्रियान्वयन योजना सहित अन्य कार्यों की आगामी 5 वर्षों तक निरंतरता के लिए 11,361 करोड़ रूपये की स्वीकृति प्रदान की गई है।
- एमएसएमई प्रोत्साहन व्यवसाय निवेश सवंर्धन/सुविधा प्रदाय योजना अंतर्गत उद्योग विकास अनुदान, गुणवत्ता प्रमाणन के लिए सहायता, ऊर्जा लेखा परीक्षा के लिए सहायता, निर्यात के लिए सहायता, बीमार इकाईयों के पुनर्जीवन के लिए सहायता, सेक्टर विशेष के लिए विशेष पैकेज और चिन्हित सेवा क्षेत्र सहायता के लिए 10,041 करोड़ रुपये की स्वीकृति दी गई है।
- इसके साथ ही मध्यप्रदेश स्टार्ट-अप नीति एवं कार्यान्वयन योजना 2022 के द्वारा प्रदेश के स्टार्ट-अप को निवेश और ऋण प्राप्त करने पर सहायता, लीज रेन्ट सहायता, पेटेंट प्राप्त करने पर सहायता, आयोजन में सहभागिता पर सहायता के लिए 589 करोड़ रुपये की स्वीकृति के साथ उद्योग संचालनालय और जिला उद्योग केंद्र की स्थापना संबंधी कार्यों के लिए 742 करोड़ रुपये की स्वीकृति दी गई है।
रानी दुर्गावती अभयारण्य (नौरादेही) बनेगा चीतों का तीसरा घर
मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा है कि नौरादेही का रानी दुर्गावती अभयारण्य चीतों का तीसरा घर बनने जा रहा है। जल्द ही वहाँ भी चीते छोड़े जाएंगे। राज्य सरकार करीब 2 महीने बाद रानी दुर्गावती अभयारण्य (नौरादेही) में भी चीते छोड़ने जा रही है। इससे मध्यप्रदेश में चीतों के 3 घर तैयार हो जाएंगे। हम मगर/घड़ियाल और कछुए भी विभिन्न जल क्षेत्रों में मुक्त करेंगे, ताकि हमारी जैव सम्पदा और भी समृद्ध हो सके।
गेहूं उपार्जन पर 40 रुपए प्रति क्विंटल बोनस
मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने बताया कि मध्यप्रदेश सरकार ने न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) पर गेहूं उपार्जन पर 40 रुपए प्रति क्विंटल बोनस देने जा रही है। साथ ही दलहन उत्पादन को प्रोत्साहन के लिए उड़द की खरीद पर भी 600 रुपए प्रति क्विंटल बोनस देने जा रही है। उड़द की खरीद पर बोनस देने के मामले में मध्यप्रदेश देश का ऐसा पहला राज्य बन गया है, जिसने यह कदम उठाया है। उन्होंने बताया कि गेहूं उपार्जन के लिए पंजीयन की अवधि 10 मार्च 2026 रखी गई थी। किसानों को समय पर भुगतान की व्यवस्था सुनिश्चित करने के भी निर्देश दिए।
पचमढ़ी को बनाएंगे बेस्ट इन्वायरमेंटल मॉडल
मुख्यमंत्री ने बताया कि पचमढ़ी को जर्मनी की एक अंतर्राष्ट्रीय पर्यावरण संस्था द्वारा ग्रीन डेस्टिनेशन के रूप में प्रमाणित किया गया है। यह मध्यप्रदेश में पर्यटन क्षेत्र के विकास के लिए हो रहे प्रयासों का प्रतिफल है। पचमढ़ी देश का ऐसा पहला स्थल है, जिसे इस तरह का प्रमाणन मिला है। हम पचमढ़ी को देश के अनुकरणीय और बेस्ट इन्वायरमेंटल मॉडल के रूप में विकसित करेंगे।






