बुधवार, 11 मार्च की सुबह दलाल स्ट्रीट पर शुरुआत कमजोर रही। सेंसेक्स 100 अंकों से ज्यादा गिरकर 78,050 के आसपास कारोबार करता दिखा, जबकि निफ्टी भी करीब 50 अंक फिसलकर 24,250 पर आ गया। शुरुआती घंटों में बैंकिंग, ऑटो और FMCG सेक्टर में दबाव सबसे ज्यादा नजर आया।
यानी सोमवार की जोरदार तेजी के बाद बाजार ने फिर करवट ली है। ट्रेडिंग रूम में इस वक्त सबसे बड़ा फोकस यही है कि क्या यह सिर्फ मुनाफावसूली है या विदेशी फंड की लगातार बिकवाली से इंडेक्स पर नीचे का दबाव कुछ और दिन बना रह सकता है।
एशिया हरा, भारत लाल: यह फर्क क्यों दिख रहा है
ग्लोबल संकेत पूरी तरह खराब नहीं हैं। ब्रेंट क्रूड करीब 0.25% गिरकर 88 डॉलर प्रति बैरल पर आ गया है और अमेरिकी WTI भी 83 डॉलर प्रति बैरल के पास है। आम तौर पर कच्चे तेल में नरमी भारत जैसे आयातक देश के लिए राहत मानी जाती है, क्योंकि इससे महंगाई और आयात बिल पर दबाव कम होता है।
इसके बावजूद भारतीय बाजार में गिरावट बताती है कि फिलहाल सेक्टर-आधारित बिकवाली और फंड फ्लो का असर ज्यादा भारी पड़ रहा है। एशियाई बाजारों में तस्वीर अलग रही: दक्षिण कोरिया का कोस्पी 3.50% चढ़कर 5,724 पर, जापान का निक्केई 1,351 अंक यानी 2.50% उछलकर 55,599 पर, हांगकांग का हैंगसेंग 5 अंक बढ़कर 25,963 पर और चीन का शंघाई कंपोजिट 2 अंक ऊपर 4,125 पर कारोबार करता दिखा।
विदेशी निवेशक बेच रहे, घरेलू फंड संभाल रहे
10 मार्च के आंकड़े बाजार की चाल समझने के लिए अहम हैं। विदेशी संस्थागत निवेशकों (FII) ने कैश सेगमेंट में ₹4,672 करोड़ के शेयर बेचे। दूसरी तरफ घरेलू संस्थागत निवेशकों (DII) ने ₹6,333 करोड़ की नेट खरीदारी की। यानी घरेलू संस्थानों ने गिरावट को थामने की कोशिश की, लेकिन विदेशी बिकवाली का दबाव खत्म नहीं हुआ।
महीने के आंकड़े और ज्यादा स्पष्ट तस्वीर देते हैं। मार्च में अब तक FII कुल ₹32,849 करोड़ की बिकवाली कर चुके हैं, जबकि DIIs ने ₹48,134 करोड़ की नेट खरीदारी की है। फरवरी में भी यही रुझान दिखा था, जब विदेशी निवेशकों ने ₹6,640 करोड़ के शेयर बेचे थे और घरेलू निवेशकों ने ₹38,423 करोड़ की खरीदारी की थी।
अमेरिका से मिला मिला-जुला संकेत, सोमवार की तेजी भी टिक नहीं पाई
अमेरिकी बाजार के सोमवार, 10 मार्च के बंद स्तर भी बहुत मजबूत संकेत नहीं दे पाए। डाउ जोन्स 34 अंक यानी 0.07% गिरकर 47,706 पर बंद हुआ। S&P 500 इंडेक्स 14 अंक यानी 0.21% नीचे 6,781 पर बंद हुआ। नैस्डैक कंपोजिट में हल्की 0.005% बढ़त रही और यह 22,697 पर बंद हुआ।
घरेलू बाजार के लिए संदर्भ यह भी है कि सोमवार को भारतीय इंडेक्स में दमदार रिकवरी आई थी। 10 मार्च को सेंसेक्स 640 अंक यानी 0.82% चढ़कर 78,205 पर बंद हुआ था, जबकि निफ्टी 233 अंक यानी 0.97% की बढ़त के साथ 24,262 पर बंद हुआ। मंगलवार की कमजोरी ने बता दिया कि ऊपर के स्तरों पर खरीदारी अभी भी चुनिंदा है और हर उछाल पर मुनाफावसूली तुरंत लौट रही है।
अब नजर इस बात पर रहेगी कि दिन के दूसरे हिस्से में बैंकिंग और ऑटो शेयरों में दबाव कम होता है या नहीं, क्योंकि यही दो सेक्टर इंडेक्स की दिशा जल्दी बदलते हैं। अगर FII की बिकवाली का रुख नरम नहीं पड़ा, तो बाजार में उतार-चढ़ाव ऊंचा रह सकता है और निफ्टी के 24,250 के आसपास का दायरा ट्रेडर्स के लिए अहम ट्रिगर लेवल बना रहेगा।






