बजट 2026-27 के बाद केंद्रीय कर्मचारियों और पेंशनभोगियों को एक अच्छी खबर मिल सकती है। इस बार जनवरी 2026 से महंगाई भत्ते और महंगाई राहत में 2% से 3% की वृद्धि की जा सकती है। यह अनुमान श्रम और रोजगार मंत्रालय द्वारा नवंबर 2025 तक के औद्योगिक श्रमिकों के लिए जारी अखिल भारतीय उपभोक्ता मूल्य सूचकांक (AICPI-IW) के आंकड़ों से लगाया गया है। वर्तमान में केंद्रीय कर्मचारियों और पेंशनभोगियों को 58% की दर से महंगाई भत्ता मिल रहा है, जिसके 60% से 61% तक पहुंचने की संभावना है।हालांकि अभी आधिकारिक पुष्टि होना बाकी है।
श्रम मंत्रालय द्वारा जारी अबतक के AICPI-IW आंकड़ों पर एक नजर
जनवरी 2026 से केंद्रीय कर्मचारियों का महंगाई भत्ता कितना बढ़ेगा, यह अखिल भारतीय उपभोक्ता मूल्य सूचकांक (AICPI) के जुलाई से दिसंबर 2025 तक के आंकड़ों पर निर्भर करेगा। श्रम मंत्रालय द्वारा जारी नवंबर 2025 तक के आंकड़ों के पर नजर डाले तो जुलाई 2025 से सूचकांक में लगातार वृद्धि देखी गई है। नवंबर 2025 में यह 148.2 अंक पर पहुंच गया है, जो 59.93 फीसदी महंगाई भत्ते की ओर इशारा कर रहा है। हालांकि अभी दिसंबर 2025 के अंक आना बाकी है, जो 30-31 जनवरी को जारी किए जाएंगे।
जुलाई से नवंबर 2025 तक के AICPI-IW
जुलाई: 146.5 (+1.5)
अगस्त: 147.1 (+0.6)
सितंबर: 147.3 (+0.2)
अक्टूबर: 147.7 (+0.4)
नवंबर: 148.2 (+0.5)
दिसंबर: 30-31 जनवरी 2026 को संभावित
क्या 58 % से बढ़कर 60% पहुंचेगा महंगाई भत्ता?
- वर्तमान में केंद्रीय कर्मचारियों और पेंशनभोगियों को 58% की दर से महंगाई भत्ता मिल रहा है। अबतक के आंकड़ों (AICPI-IW) के अनुसार, जनवरी 2026 से महंगाई भत्ता 58% से बढ़कर 60% (2% वृद्धि होने पर) या 61% (3% वृद्धि होने पर) तक पहुंच सकता है। हालांकि अभी दिसंबर के अंक आना बाकी हैं, जिसके बाद ही स्पष्ट हो पाएगा कि महंगाई भत्ते में 2% या 3% वृद्धि की जाएगी।
- श्रम मंत्रालय द्वारा दिसंबर 2025 के आंकडे जारी करने के बाद वित्त मंत्रालय को भेजे जाएंगे। इसके बाद मंत्रालय प्रस्ताव बनाकर केंद्रीय कैबिनेट को मंजूरी के लिए भेजेगा। अबतक के पैटर्न के अनुसार, जनवरी से जारी होने वाले महंगाई भत्ते की नई दरों का ऐलान मार्च से अप्रैल के बीच किया जाता है, ऐसे में कयास लगाए जा रहे हैं कि होली 2026 के बाद केंद्र सरकार नई दरों का ऐलान कर सकती है। अंतिम निर्णय केंद्र सरकार द्वारा आधिकारिक फैसले या अधिसूचना के बाद ही मान्य होगा। कर्मचारियों को जनवरी से लेकर घोषणा होने तक का अंतर एरियर के तौर पर दिया जाएगा।
साल में 2 बार बढ़ाया जाता है महंगाई भत्ता
केंद्र सरकार द्वारा साल में दो बार केंद्रीय कर्मचारियों और पेंशनभोगियों के महंगाई भत्ते व महंगाई राहत की दरों में संशोधन किया जाता है। नई दरें जनवरी और जुलाई से लागू की जाती हैं। यह दरें अखिल भारतीय उपभोक्ता मूल्य सूचकांक इंडेक्स के छमाही आंकड़ों पर निर्भर करती हैं। यह आंकड़े हर साल जनवरी से जून और जुलाई से दिसंबर के बीच जारी किए जाते हैं। अबतक के पैटर्न के अनुसार, नई दरों का ऐलान मार्च से अप्रैल और अक्टूबर से नवंबर के बीच किया जाता है।
आईए जानते है कैसे होती है महंगाई भत्ते की गणना
- महंगाई भत्ता एक भुगतान है जो केन्द्र और राज्य सरकार अपने कर्मचारियों और पेंशनभोगियों को मुद्रास्फीति के प्रभाव को संतुलित करने के लिए देती हैं। यह वेतन का एक अतिरिक्त हिस्सा होता है, जिसे समय-समय पर महंगाई दर के आधार पर संशोधित किया जाता है। इसे उपभोक्ता मूल्य सूचकांक (CPI) के अनुसार तय करती है।
- केंद्र सरकार के कर्मचारियों और पेंशनभोगियों के महंगाई भत्ते की गणना करने का एक फॉर्मूला है। फॉर्मूला है: 7वां सीपीसी डीए% = [{पिछले 12 महीनों के लिए एआईसीपीआई-आईडब्ल्यू (आधार वर्ष 2001=100) का 12 महीने का औसत – 261.42}/261.42×100]
नोट: यह वृद्धि 7वें वेतन आयोग के तहत ही की जाएगी, क्योंकि अभी तक 8वां वेतन आयोग लागू नहीं हुआ है। हालांकि 7वें वेतन आय़ोग का कार्यकाल 31 दिसंबर 2025 को समाप्त हो चुका है। जनवरी 2026 से 8वां वेतन आयोग लागू किया जाना प्रस्तावित है।





