श्रीनगर के सर्किट हाउस में उस समय हंगामा मच गया, जब पुलिस ने जम्मू-कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री फारूक अब्दुल्ला को AAP के राज्यसभा सांसद संजय सिंह से मिलने से रोक दिया। पुलिस ने सर्किट हाउस के गेट बंद कर दिए थे, क्योंकि संजय सिंह दोदा से विधायक मेहराज मलिक की गिरफ्तारी और उन पर पीएसए (जन सुरक्षा अधिनियम) लगाए जाने के खिलाफ विरोध प्रदर्शन की योजना बना रहे थे।

तीन बार मुख्यमंत्री रह चुके फारूक अब्दुल्ला को पुलिस ने सर्किट हाउस के अंदर प्रवेश करने की अनुमति नहीं दी। अब्दुल्ला ने इस घटना की निंदा करते हुए कहा कि यह स्थिति दर्शाती है कि जम्मू-कश्मीर में चुनी हुई सरकार के बावजूद उपराज्यपाल का दबदबा है। उन्होंने कहा, “देश को इस स्थिति के बारे में पता होना चाहिए। संजय सिंह पत्थरबाजी या गोलीबारी करने नहीं आए, वह संविधान के दायरे में बात करना चाहते हैं लेकिन उन्हें रोकना गलत है।”

फारूक अब्दुल्ला से मिलने से क्यों रोका

संजय सिंह ने पुलिस से सवाल किया कि आखिर उन्हें फारूक अब्दुल्ला से मिलने से क्यों रोका जा रहा है। उन्होंने गेट पर चढ़कर पुलिस कर्मियों से पूछा, “वह पूर्व सांसद और कई बार मुख्यमंत्री रहे हैं, मैं भी सांसद हूं। हमारा अपराध क्या है? हमें मिलने से क्यों रोका जा रहा है?” इस दौरान उन्होंने पुलिस के इस कदम पर सवाल उठाए और इसे लोकतांत्रिक अधिकारों का हनन बताया।

उपराज्यपाल के कार्यों की आलोचना

नेशनल कॉन्फ्रेंस के अध्यक्ष फारूक अब्दुल्ला ने उपराज्यपाल के कार्यों की आलोचना करते हुए कहा कि यह घटना लोकतंत्र पर सवाल उठाती है। उन्होंने कहा कि संजय सिंह उनके संसदीय मित्र हैं और उनसे मुलाकात तक की अनुमति न देना न केवल गलत है, बल्कि यह उपराज्यपाल के दिशा-निर्देशों का परिणाम है। यह घटना जम्मू-कश्मीर में प्रशासनिक कार्यप्रणाली पर सवाल उठाती है।