नेशनल कॉन्फ्रेंस के नेता फारूक अब्दुल्ला ने जम्मू-कश्मीर के सेब उद्योग में आए परिवहन संकट के लिए ‘अल्लाह का प्रकोप’ को जिम्मेदार ठहराया है। उन्होंने कहा, “यह इसलिए हो रहा है क्योंकि हम नमाज नहीं पढ़ते। ऐसी मुश्किलें हमें जगाने और अल्लाह की ओर मोड़ने के लिए हैं।” श्रीनगर-जम्मू राजमार्ग पर उदयपुर में 60 मीटर की सड़क धंसने से पिछले तीन हफ्तों से हजारों सेब से लदे ट्रक फंसे हुए हैं। इस संकट को उन्होंने प्राकृतिक आपदा बताया और इसे ‘तोड़फोड़’ की अफवाहों को खारिज किया।
पिछले कई दिनों से कश्मीर, जो अपने लाल सेबों के लिए प्रसिद्ध है, से हजारों ट्रक सेब लेकर नहीं निकल पाए हैं। भारत के कुल सेब उत्पादन का लगभग 80 प्रतिशत कश्मीर से आता है। सड़क की मरम्मत में देरी के कारण कई ट्रकों में सेब सड़ने लगे हैं, जिससे किसानों को भारी नुकसान हो रहा है। किसानों ने सरकार से सड़कों की गुहार लगाई है, लेकिन प्रगति धीमी रही है।
गडकरी से हस्तक्षेप की मांग
मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला ने केंद्रीय सड़क परिवहन मंत्री नितिन गडकरी से हस्तक्षेप की मांग की है, जिन्होंने 24 घंटे में ‘ठोस कदम’ उठाने का वादा किया है। बॉर्डर रोड्स ऑर्गनाइजेशन धंसी सड़क को ठीक करने या वैकल्पिक मार्ग बनाने की कोशिश कर रहा है। फिलहाल, सेब को रेलवे के जरिए निकाला जा रहा है, जिसमें 2,000 टन सेब (लगभग 1.26 लाख बक्से) दिल्ली भेजे जा चुके हैं।
घाटी में दैनिक जीवन भी प्रभावित
इस संकट का असर न केवल सेब उद्योग पर पड़ा है, बल्कि घाटी में दैनिक जीवन भी प्रभावित हुआ है। पेट्रोल पंपों पर ईंधन की कमी हो गई है, एलपीजी की आपूर्ति बाधित है और मुर्गी उत्पादों व सब्जियों की कीमतें आसमान छू रही हैं। इस संकट से करोड़ों रुपये का नुकसान होने का अनुमान है।






