केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने गांधीनगर में पांचवें अखिल भारतीय राजभाषा सम्मेलन को संबोधित करते हुए कहा कि हिंदी को अन्य भारतीय भाषाओं के साथ प्रतिद्वंद्विता में नहीं, बल्कि उनके मित्र के रूप में देखा जाना चाहिए। उन्होंने जोर देकर कहा कि सभी भारतीय भाषाएं राष्ट्र निर्माण में साझेदार हैं। गुजरात का उदाहरण देते हुए शाह ने कहा कि वहां गुजराती के साथ-साथ हिंदी को भी अपनाया गया, जिससे दोनों भाषाओं का समान रूप से विकास हुआ।

अमित शाह ने कहा कि भारत हमेशा से एक भाषा-प्रधान देश रहा है, जहां विभिन्न भाषाओं ने संस्कृति और इतिहास को समृद्ध किया है। उन्होंने असम के बिहू, बिहार के विद्यापति, बंगाल के बाउल गीतों और पूर्वोत्तर के भूपेन हजारिका के गीतों का जिक्र करते हुए भारतीय भाषाओं की समावेशी और जीवंत प्रकृति को रेखांकित किया। उन्होंने यह भी बताया कि औपनिवेशिक काल में वंदे मातरम और जय हिंद जैसे नारों ने भाषाई चेतना को राष्ट्रीय गौरव का प्रतीक बनाया।

भाषाओं और संस्कृति का पुनरुद्धार

शाह ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में भारतीय भाषाओं और संस्कृति के पुनरुद्धार का स्वर्णिम युग चल रहा है। उन्होंने 2024 में भारतीय भाषा प्रभाग के गठन का उल्लेख किया, जिसका उद्देश्य प्रमुख भाषाओं में सहज अनुवाद सुनिश्चित करना है। उन्होंने कहा कि हिंदी और अन्य भारतीय भाषाओं को प्रौद्योगिकी, विज्ञान, न्याय, शिक्षा और प्रशासन का आधार बनाया जा रहा है, ताकि डिजिटल इंडिया, ई-गवर्नेंस और कृत्रिम बुद्धिमत्ता के युग में भारत वैश्विक प्रतिस्पर्धा में अग्रणी रहे।

आधिकारिक भाषा के रूप में अपनाया

हर साल 14 सितंबर को मनाया जाने वाला हिंदी दिवस 1949 में संविधान सभा द्वारा हिंदी को भारत की आधिकारिक भाषा के रूप में अपनाए जाने की याद दिलाता है। शाह ने कवि विद्यापति के शब्दों देशिल बयना सब जन मिठ्ठा का हवाला देते हुए नागरिकों से हिंदी और सभी भारतीय भाषाओं का सम्मान करने और एकता, आत्मनिर्भरता और आत्मविश्वास के साथ आगे बढ़ने का आह्वान किया।