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उज्जैन चिंतामन गणेश मंदिर में दूसरी जत्रा, भगवान को पंचामृत पूजन के बाद अर्पित किया 56 भोग

Written by:Rishabh Namdev
Published:
बुधवार तड़के 4 बजे पट खुलते ही उज्जैन के श्री चिंतामन गणेश मंदिर में चैत्र मास की दूसरी जत्रा शुरू हुई और भगवान गणेश का पंचामृत अभिषेक किया गया। पंडित गणेश गुरु के अनुसार इस अवसर पर किसानों ने नया धान अर्पित किया, जिसे वे प्रसाद स्वरूप घर भी ले गए। मंदिर प्रशासन का अनुमान है कि शयन आरती तक हजारों श्रद्धालु दर्शन के लिए पहुंचे।
उज्जैन चिंतामन गणेश मंदिर में दूसरी जत्रा, भगवान को पंचामृत पूजन के बाद अर्पित किया 56 भोग

बुधवार तड़के 4 बजे जैसे ही श्री चिंतामन गणेश मंदिर के पट खुले, दूसरी जत्रा का क्रम शुरू हो गया। अंधेरा पूरी तरह छंटा भी नहीं था और मंदिर परिसर में दर्शन के लिए कतारें लगनी शुरू हो चुकी थीं।

चैत्र मास की पारंपरिक जत्राओं में यह दूसरी जत्रा रही, जिसमें भगवान श्री गणेश का पंचामृत अभिषेक, विशेष श्रृंगार और 56 भोग अर्पण की व्यवस्था की गई। सुबह के पहले पहर से ही परिवार, बुजुर्ग, महिलाएं और ग्रामीण श्रद्धालु लगातार मंदिर पहुंचते रहे।

मंदिर से जुड़े पुरोहितों के मुताबिक, इस बार भी वही दृश्य दिखा जो हर साल आस्था के मौसम में दिखता है, हाथों में नारियल, थालियों में पुष्प, और कई किसानों के पास नया धान। भीड़ का दबाव बढ़ने के साथ दर्शन व्यवस्था को चरणबद्ध तरीके से चलाया गया ताकि गर्भगृह के पास अनावश्यक धक्का-मुक्की न हो।

किसान नए धान की मुट्ठी लेकर क्यों पहुंचे

पंडित गणेश गुरु ने बताया कि चैत्र माह की दूसरी जत्रा पर किसान अपनी नई उपज का धान लेकर भगवान गणपति को अर्पित करने पहुंचे। यह सिर्फ रस्म नहीं मानी जाती, किसान मंदिर में अर्पित किया हुआ धान वापस घर ले जाकर रखते हैं और इसे शुभ संकेत के रूप में देखते हैं।

स्थानीय मान्यता में इसका संबंध खेती के पूरे चक्र से है। जब गेहूं और चने की फसल पककर तैयार होने लगती है, तब नई उपज को बाजार में ले जाने से पहले भगवान को समर्पित करना शुभ माना जाता है।

यही वजह रही कि सुबह के समय ग्रामीण इलाकों से आए श्रद्धालुओं की संख्या अलग से नजर आई। कई परिवारों ने पहले पूजन कराया, फिर प्रसाद लिया और उसके बाद ही घर लौटे।

दरबार में मनोकामना लेकर पहुंचे श्रद्धालु, शाम तक बढ़ता रहा दबाव

मंदिर के पुजारी जयंत शर्मा के अनुसार चैत्र मास की शाही जत्रा में श्रद्धालु अपनी मनोकामनाएं लेकर चिंतामन गणेश के दरबार में आते हैं। श्रद्धालुओं में यह विश्वास मजबूत है कि इस दिन की गई प्रार्थना फल देती है, इसलिए दूसरे बुधवार की जत्रा में भी भीड़ सामान्य दिनों से काफी ज्यादा रही।

मंदिर परिसर में सुबह से लेकर दोपहर तक लगातार आवागमन बना रहा और शाम की आरतियों तक संख्या और बढ़ने का अनुमान जताया गया। प्रशासनिक स्तर पर दर्शन के प्रवाह को बनाए रखने पर जोर रहा ताकि दूर-दराज से आए लोगों को लंबा इंतजार न करना पड़े।

इस साल कुल पांच जत्राएं आयोजित होनी हैं। दूसरी जत्रा के बाद अब आने वाले तीन बुधवार भी इसी क्रम में अहम रहेंगे, जहां फिर से विशेष पूजन और बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं के पहुंचने की तैयारी है।

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लेखक के बारे में
मैं ऋषभ नामदेव खेल से लेकर राजनीति तक हर तरह की खबर लिखने में सक्षम हूं। मैं जर्नलिज्म की फील्ड में पिछले 4 साल से काम कर रहा हूं। View all posts by Rishabh Namdev
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