उज्जैन के पुराने कारोबारी इलाके में सोमवार को बड़ा असर दिखेगा। गोपाल मंदिर, पटनी बाजार, बर्तन बाजार, गुदरी बाजार और महाकाल चौराहा क्षेत्र के व्यापारी प्रशासन के प्रस्तावित सड़क चौड़ीकरण के विरोध में अपने प्रतिष्ठान बंद रखेंगे। यह बंद गोपाल मंदिर से महाकाल मार्ग व्यापारी एवं रहवासी महासंघ के आह्वान पर किया जा रहा है।
विवाद की वजह वह योजना है, जिसकी जानकारी व्यापारियों को समाचार पत्रों के माध्यम से मिली। महासंघ के अनुसार एमआईसी (MIC) ने गोपाल मंदिर से महाकाल मार्ग को 20 मीटर यानी करीब 65 फीट चौड़ा करने का प्रस्ताव पारित किया है। व्यापारियों का कहना है कि इस प्रस्ताव के तहत पटनी बाजार से लेकर महाकाल चौराहा तक दोनों तरफ 12-12 फीट हिस्से में दुकानों और भवनों पर तोड़फोड़ की कार्रवाई हो सकती है।
पुराने व्यापारिक क्षेत्र पर सीधा असर का दावा
महासंघ ने इसे शहर के प्राचीनतम और सबसे व्यस्त व्यापारिक हिस्से से जुड़ा मुद्दा बताया है। संगठन का कहना है कि यहां लगभग 70 प्रतिशत प्रतिष्ठानों का क्षेत्रफल पहले से सीमित है। यदि 12 फीट तक हिस्से तोड़े गए, तो कई पुराने प्रतिष्ठान व्यवहारिक रूप से चलाना मुश्किल हो जाएगा और कुछ पूरी तरह समाप्त भी हो सकते हैं।
व्यापारी इस बिंदु पर जोर दे रहे हैं कि महाकाल मंदिर से जुड़े इस बेल्ट का चरित्र केवल यातायात मार्ग का नहीं, बल्कि पारंपरिक व्यापारिक और सांस्कृतिक क्षेत्र का भी है। इसलिए चौड़ीकरण पर अंतिम निर्णय से पहले स्थानीय वास्तविकताओं का पुनर्मूल्यांकन जरूरी है।
मुख्यमंत्री से पुनः निरीक्षण की मांग
महासंघ ने मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव से अनुरोध किया है कि इस हेरिटेज क्षेत्र का दोबारा निरीक्षण कराया जाए। व्यापारियों का तर्क है कि पीढ़ियों से यहां रह रहे और कारोबार कर रहे लोगों को सिर्फ ट्रैफिक कंट्रोल के नाम पर विस्थापित करना उचित नहीं होगा। सोमवार के बंद के दौरान व्यापारी संबंधित अधिकारियों के सामने वैकल्पिक सुझाव भी रखेंगे।
सिर्फ तोड़फोड़ करने के अलावा अन्य विकल्पों से भी व्यवस्था बनाई जा सकती है। — व्यापारी एवं रहवासी महासंघ
व्यापारियों के मुताबिक जाम की असली वजह क्या है
महासंघ ने मौजूदा सड़क चौड़ाई लगभग 40 से 45 फीट बताई है। उनके अनुसार सामान्य दिनों में भी इस मार्ग पर करीब 30 स्कूल बसें एक-दूसरे को क्रॉस करती हैं। भीड़भाड़ का दबाव तब बढ़ जाता है, जब ठेले, सड़क किनारे बैठकर होने वाला व्यापार और बड़ी संख्या में चल रहे ई-रिक्शा मार्ग को संकरा कर देते हैं।
यानी व्यापारी पक्ष यह कह रहा है कि समस्या केवल सड़क की चौड़ाई नहीं, बल्कि मार्ग प्रबंधन और अतिक्रमण नियंत्रण की भी है। इसी आधार पर उन्होंने प्रशासन से वैकल्पिक कदमों पर प्राथमिकता से विचार करने को कहा है।
ये विकल्प भी सामने रखे गए
महासंघ ने सुझाव दिया है कि पहले चरण में सड़क पर फैले अतिक्रमण हटाए जाएं, गोपाल मंदिर से महाकाल चौराहा मार्ग को एकांगी (वन-वे) घोषित करने की व्यवहार्यता देखी जाए और विद्युत लाइनों को अंडरग्राउंड करने जैसे कार्य लागू किए जाएं। व्यापारियों का दावा है कि ऐसे उपाय लागू होने पर चौड़ीकरण की जरूरत काफी हद तक कम हो सकती है।
सोमवार का बाजार बंद इसी मांग के साथ आयोजित किया जा रहा है कि प्रशासन प्रस्तावित चौड़ीकरण पर आगे बढ़ने से पहले स्थानीय व्यापार, हेरिटेज संरचना और वैकल्पिक यातायात प्रबंधन—तीनों पहलुओं पर संतुलित निर्णय ले।






